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    Chandra Dev Mantra: सोमवार को शिव पूजा में जपें ये चमत्कारी मंत्र, चंद दिनों में गायब हो जाएगा सारा मानसिक तनाव

    Updated: Sun, 08 Mar 2026 07:37 PM (IST)

    कुंडली में चंद्रमा ग्रह के कमजोर होने पर जातक को मानसिक तनाव की समस्या होती है। कई अवसर पर जातक फैसले लेने में भी असमर्थ रहता है। ...और पढ़ें

    Chandra Dev Mantra: सोमवार को क्या करें और क्या न करें?

    Chandra Dev Mantra: सोमवार को क्या करें और क्या न करें?

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    धर्म डेस्क, नई दिल्ली। सोमवार का दिन देवों के देव महादेव को समर्पित होता है। इस शुभ अवसर पर भगवान शिव और मां पार्वती की भक्ति भाव से पूजा की जाती है। साथ ही उनके निमित्त सोमवार का व्रत रखा जाता है। इस व्रत को करने से साधक की हर मनोकामना पूरी होती है। साथ ही काल, कष्ट, दुख और संकट दूर हो जाते हैं।

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    ज्योतिष कुंडली में शुक्र और चंद्रमा को मजबूत करने के लिए शिवजी की पूजा करने की सलाह देते हैं। भगवान शिवजी की पूजा करने से चंद्र देव प्रसन्न होते हैं। चंद्र देव की कृपा से जातक को सभी प्रकार के शुभ कामों में सफलता मिलती है। साथ ही मानसिक तनाव से मुक्ति मिलती है।

    अगर आप भी मानसिक तनाव और चिंता से मुक्ति पाना चाहते हैं, तो सोमवार के दिन भक्ति भाव से शिवजी की पूजा करें। वहीं, पूजा के समय इन मंत्रों का जप करें।

    चंद्र मंत्र

    1. ऊँ इमं देवा असपत्नं ग्वं सुवध्यं ।
    महते क्षत्राय महते ज्यैश्ठाय महते जानराज्यायेन्दस्येन्द्रियाय
    इमममुध्य पुत्रममुध्यै पुत्रमस्यै विश वोsमी राज: सोमोsस्माकं ब्राह्माणाना ग्वं राजा।

    2. ऊँ ऐं क्लीं सोमाय नम:।
    ऊँ श्रां श्रीं श्रौं चन्द्रमसे नम:।
    ऊँ श्रीं श्रीं चन्द्रमसे नम:।

    3. ऊँ दधिशंखतुषाराभं क्षीरोदार्णवसंभवम ।
    नमामि शशिनं सोमं शंभोर्मुकुटभूषणम ।।

    4. ऊँ अमृतंग अन्गाये विधमहे कलारुपाय धीमहि, तन्नो सोम प्रचोदयात ।।

    5. ऊँ उद्बुध्यस्वाग्ने प्रतिजागृहि त्वमिष्टापूर्ते स सृजेथामयं च ।
    अस्मिन्त्सधस्थे अध्युत्तरस्मिन्विश्वे देवा यजमानश्च सीदत ।।

    6. प्रियंगुकलिकाश्यामं रुपेणाप्रतिमं बुधम ।
    सौम्यं सौम्यगुणोपेतं तं बुधं प्रणमाम्यहम ।।

    7. ऊँ चन्द्रपुत्राय विदमहे रोहिणी प्रियाय धीमहि तन्नोबुध: प्रचोदयात ।

    8. ॐ त्र्यम्बकं यजामहे सुगन्धिं पुष्टिवर्धनम् |
    उर्वारुकमिव बन्धनान्मृत्योर्मुक्षीय माऽमृतात् ||

    ऊँ अघोरेभ्यो अथघोरेभ्यो, घोर घोर तरेभ्यः।
    सर्वेभ्यो सर्व शर्वेभ्यो, नमस्ते अस्तु रूद्ररूपेभ्यः’।।

    9. मामिशमीशान निर्वाण रूपं विभुं व्यापकं ब्रह्म वेद स्वरूपं’।।

    10. ऊँ क्लीं क्लीं क्लीं वृषभारूढ़ाय वामांगे गौरी कृताय क्लीं क्लीं क्लीं ऊँ नमः शिवाय।।

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    अस्वीकरण: इस लेख में बताए गए उपाय/लाभ/सलाह और कथन केवल सामान्य सूचना के लिए हैं। दैनिक जागरण तथा जागरण न्यू मीडिया यहां इस लेख फीचर में लिखी गई बातों का समर्थन नहीं करता है। इस लेख में निहित जानकारी विभिन्न माध्यमों/ज्योतिषियों/पंचांग/प्रवचनों/मान्यताओं/धर्मग्रंथों/दंतकथाओं से संग्रहित की गई हैं। पाठकों से अनुरोध है कि लेख को अंतिम सत्य अथवा दावा न मानें एवं अपने विवेक का उपयोग करें। दैनिक जागरण तथा जागरण न्यू मीडिया अंधविश्वास के खिलाफ है।