दोपहर में पूजा करना शुभ या अशुभ? जानिए क्या कहते हैं नियम और कौन सा समय है सबसे बेस्ट
क्या दोपहर के समय भगवान की पूजा करना सही है? जानें शास्त्रों के अनुसार दोपहर में पूजा-पाठ के नियम, विशेष परिस्थितियां और पूजा के लिए सबसे फलदायी समय। ...और पढ़ें

दोपहर में पूजा करना सही या गलत? (AI-Generated Image)

समय कम है?
जानिए मुख्य बातें और खबर का सार एक नजर में
धर्म डेस्क, नई दिल्ली। हम में से कई लोग अपनी व्यस्त जीवनशैली के कारण दोपहर में स्नान करके पूजा-पाठ करते हैं। कई बार घर में चल रहे बड़े धार्मिक अनुष्ठान भी दोपहर तक जारी रहते हैं। लेकिन क्या आपने कभी सोचा है कि दोपहर के समय पूजा की शुरुआत करना सही माना जाता है या नहीं? आइए आसान भाषा में समझते हैं कि शास्त्रों में इसके क्या नियम बताए गए हैं।
क्या दोपहर में पूजा करनी चाहिए?
साधारण नियम के मुताबिक, दोपहर में नए सिरे से पूजा की शुरुआत करना वर्जित माना जाता है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, दोपहर 12 बजे से लेकर शाम 4 बजे तक का समय देवी-देवताओं के विश्राम का होता है। इसी कारण इस दौरान मंदिरों के कपाट बंद कर दिए जाते हैं, ताकि भगवान के विश्राम में कोई खलल न पड़े। ऐसे में इस समय सामान्य पूजा का शुभारंभ करने से बचना चाहिए।
हालांकि, कुछ विशेष परिस्थितियों में दोपहर की पूजा दोषपूर्ण नहीं मानी जाती:
लंबे अनुष्ठान: अगर कोई पूजा-पाठ सुबह से ही शुरू हो चुका है और वह दोपहर या शाम तक जारी रहता है, तो उसमें कोई दोष नहीं होता।
शुभ मुहूर्त: नवरात्र में कलश स्थापना के लिए अगर सुबह का मुहूर्त छूट जाए, तो दोपहर के 'अभिजीत मुहूर्त' में स्थापना की जा सकती है।
विशेष उपाय: कालसर्प दोष निवारण जैसी कुछ पूजा राहुकाल में की जाती हैं। अगर उस दिन राहुकाल दोपहर में पड़े, तो दोपहर को अनुष्ठान किया जा सकता है।

(AI-Generated Image)
दोपहर में कैसे करें भगवान का ध्यान?
अगर आपको दोपहर के समय भगवान को याद करना है, तो आप मूर्ति को बिना छुए मानसिक पूजा कर सकते हैं। अपने इष्टदेव का नाम स्मरण करना और विश्राम कर रहे देवी-देवताओं को दूर से ही प्रणाम कर लेना शुभ रहता है।
पूजा-पाठ का सबसे सही समय कौन सा है?
शास्त्रों में पूजा-पाठ के लिए मुख्य रूप से तीन समय सबसे फलदायी बताए गए हैं:
ब्रह्म मुहूर्त (सुबह 4:00 से 5:30 बजे): यह सूर्योदय से लगभग डेढ़-दो घंटे पहले का समय होता है। इस समय वातावरण शांत, शुद्ध और सकारात्मक ऊर्जा से भरपूर होता है, जिससे ध्यान आसानी से लगता है।
प्रातः काल (सूर्योदय से सुबह 8:00 बजे तक): इस समय देवी-देवता जागृत अवस्था में होते हैं। इस दौरान पूजा करने से आरोग्य, बुद्धि, यश और सुख-समृद्धि में वृद्धि होती है।
प्रदोष काल (सूर्यास्त के समय): यह समय भगवान शिव और माता लक्ष्मी की पूजा के लिए उत्तम माना जाता है। शाम के समय घर के मुख्य द्वार पर दीप जलाने से नकारात्मक ऊर्जा दूर हो जाती है।
निशिता मुहूर्त (मध्य रात्रि): तांत्रिक अनुष्ठान और मंत्रों की सिद्धि के लिए देर रात की पूजा का विधान है।
यह भी पढ़ें- पूजा में फूलों का महत्व: किस देवी-देवता को कौन सा फूल चढ़ाने से मिलती है विशेष कृपा?
यह भी पढ़ें- क्या पूजा करते समय आपकी आंखों से भी आते हैं आंसू? जानिए ये किस बात का है बड़ा संकेत
अस्वीकरण: इस लेख में बताए गए उपाय/लाभ/सलाह और कथन केवल सामान्य सूचना के लिए हैं। दैनिक जागरण यहां इस लेख फीचर में लिखी गई बातों का समर्थन नहीं करता है। इस लेख में निहित जानकारी विभिन्न माध्यमों/ज्योतिषियों/पंचांग/प्रवचनों/मान्यताओं/धर्मग्रंथों/दंतकथाओं से संग्रहित की गई हैं। पाठकों से अनुरोध है कि लेख को अंतिम सत्य अथवा दावा न मानें एवं अपने विवेक का उपयोग करें।