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    Amalaki Ekadashi 2026: आखिर क्यों नवविवाहित महिलाओं के लिए सबसे खास है यह व्रत?

    Updated: Sat, 21 Feb 2026 09:00 AM (IST)

    जानें क्यों नवविवाहित महिलाओं के लिए यह व्रत अखंड सौभाग्य लेकर आता है और आंवले के वृक्ष की पूजा का क्या है धार्मिक महत्व। ...और पढ़ें

    Amalaki Ekadashi 2026: नवविवाहित महिलाएं जरूर करें ये व्रत

    Amalaki Ekadashi 2026: नवविवाहित महिलाएं जरूर करें ये व्रत

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    धर्म डेस्क, नई दिल्ली। हिंदू धर्म में एकादशी का व्रत सबसे उत्तम माना जाता है, लेकिन फाल्गुन मास (Falgun Maas) के शुक्ल पक्ष में आने वाली 'आमलकी एकादशी' (Amalaki Ekadashi 2026) (जिसे रंगभरी एकादशी भी कहते हैं) का महत्व सबसे अलग है। इस दिन भगवान विष्णु के साथ-साथ 'आंवले' के वृक्ष की पूजा की जाती है।

    शुभ तिथि और मुहूर्त

    एकादशी तिथि प्रारंभ: 27 फरवरी 2026, सुबह 12:33 बजे से

    एकादशी तिथि समाप्त: 27 फरवरी 2026, रात 10:32 बजे तक

    व्रत की तिथि: उदया तिथि के अनुसार, 27 फरवरी 2026, शुक्रवार को ही यह व्रत रखा जाएगा।

    शास्त्रों के अनुसार, जब सृष्टि की रचना के लिए ब्रह्मा जी प्रकट हुए थे, तब भगवान विष्णु के आंसुओं से आंवले के पेड़ की उत्पत्ति हुई थी। इसी कारण इस पेड़ के कण-कण में देवताओं का वास माना जाता है।

    नवविवाहित महिलाओं के लिए इसका महत्व

    पौराणिक मान्यताओं के अनुसार, यह एकादशी नवविवाहित महिलाओं के लिए सौभाग्य का वरदान लेकर आती है।

    अखंड सौभाग्य: ऐसी मान्यता है कि शादी के बाद पहली बार इस व्रत को करने से वैवाहिक जीवन में आने वाली बाधाएं दूर होती हैं।

    बाबा विश्वनाथ का संबंध: इसे 'रंगभरी एकादशी' भी कहते हैं क्योंकि माना जाता है कि इसी दिन भगवान शिव (Lord Shiva) माता पार्वती (Devi Parvati) का गौना कराकर पहली बार काशी आए थे। इसलिए, नए जोड़ों के लिए यह दिन प्रेम और सामंजस्य बढ़ाने वाला माना जाता है।

    व्रत के लाभ और पूजा विधि

    आंवले का वृक्ष: इस दिन आंवले के वृक्ष के नीचे बैठकर पूजन करने का विधान है।

    आरोग्य की प्राप्ति: आयुर्वेद और पुराणों, दोनों में आंवले को अमृत फल कहा गया है। इसकी पूजा करने से स्वास्थ्य बेहतर होता है।

    Ekadashi

    (Image Source: AI-Generated)

    पापों से मुक्ति: धार्मिक ग्रंथों में उल्लेख है कि जो फल कठिन तपस्या या बड़े यज्ञों से नहीं मिलता, वह श्रद्धापूर्वक आमलकी एकादशी का व्रत रखने से मिल जाता है।

    दान का फल: इस दिन आंवले का दान करना और स्वयं आंवला खाना बेहद शुभ माना जाता है।

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    अस्वीकरण: इस लेख में बताए गए उपाय/लाभ/सलाह और कथन केवल सामान्य सूचना के लिए हैं। दैनिक जागरण तथा जागरण न्यू मीडिया यहां इस लेख फीचर में लिखी गई बातों का समर्थन नहीं करता है। इस लेख में निहित जानकारी विभिन्न माध्यमों/ज्योतिषियों/पंचांग/प्रवचनों/मान्यताओं/धर्मग्रंथों/दंतकथाओं से संग्रहित की गई हैं। पाठकों से अनुरोध है कि लेख को अंतिम सत्य अथवा दावा न मानें एवं अपने विवेक का उपयोग करें। दैनिक जागरण तथा जागरण न्यू मीडिया अंधविश्वास के खिलाफ है।

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