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    Lohe ka Chhalla Rules: लोहे का छल्ला पहनने से पहले जान लें ये जरूरी नियम, वरना हो सकता है नुकसान

    Updated: Tue, 27 Jan 2026 03:24 PM (IST)

    क्या आप जानते हैं कि हाथ की उंगलियों में पहनी गई एक छोटी सी धातु आपके जीवन की दिशा बदल सकती है? ज्योतिष शास्त्र में लोहे का छल्ला (Iron Ring) केवल एक ...और पढ़ें

    लोहे का छल्ला पहनना कितना शुभ? (Image Source: AI-Generated)

    लोहे का छल्ला पहनना कितना शुभ? (Image Source: AI-Generated)

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    धर्म डेस्क, नई दिल्ली। ज्योतिष शास्त्र और हस्तरेखा विज्ञान में धातुओं का अपना एक विशेष प्रभाव माना गया है। शनि देव की कृपा पाने और जीवन की बाधाओं को दूर करने के लिए अक्सर लोग लोहे का छल्ला (Iron Ring) धारण करते हैं। लेकिन, क्या आप जानते हैं कि यह छल्ला हर किसी के लिए शुभ नहीं होता? बिना सोचे-समझे इसे पहनना फायदे की जगह बड़ा नुकसान भी करा सकता है।

    इन लोगों को भूलकर भी नहीं पहनना चाहिए लोहे का छल्ला

    अंक ज्योतिष और कुंडली के अनुसार, कुछ विशेष स्थितियों में लोहे का छल्ला पहनना वर्जित माना गया है:

    राहु-केतु का प्रभाव: अगर किसी व्यक्ति की कुंडली में राहु या केतु का नकारात्मक प्रभाव हो, तो उन्हें लोहे का छल्ला पहनने से सख्त परहेज करना चाहिए।

    बुध और सूर्य की स्थिति: जिन लोगों की कुंडली में बुध या सूर्य बहुत मजबूत स्थिति में होते हैं, उन्हें भी इसे धारण करने से पहले किसी विशेषज्ञ की सलाह लेनी चाहिए।

    शनि की शुभता: अगर शनि आपकी कुंडली में पहले से ही शुभ फल दे रहे हैं, तो बिना परामर्श के लोहा पहनना उनकी शक्ति को अनियंत्रित कर सकता है, जिससे लाभ के बजाय भारी नुकसान होने की संभावना है।

    किसे मिलता है इसका सबसे ज्यादा लाभ?

    शनि की साढ़ेसाती या ढैया: जो लोग शनि की साढ़ेसाती या ढैया के कठिन दौर से गुजर रहे हैं, उनके लिए यह छल्ला एक रक्षा कवच की तरह काम करता है।

    Iron ring rules

    (Image Source: AI-Gene)

    नकारात्मक ऊर्जा: जिन लोगों को नजर दोष की समस्या रहती है या जो अक्सर डरावने सपनों से परेशान रहते हैं, उन्हें लोहे का छल्ला पहनने की सलाह दी जाती है।

    धारण करने की सही विधि और समय

    शुभ दिन: इसे पहनने के लिए शनिवार का दिन सबसे उत्तम और प्रभावशाली माना जाता है।

    सही उंगली: पुरुषों को इसे अपने दाएं हाथ की और महिलाओं को बाएं हाथ की मध्यमा उंगली (Middle Finger) में धारण करना चाहिए।

    शुद्धिकरण: शनिवार की सुबह छल्ले को गंगाजल और कच्चे दूध से धोकर शुद्ध करें, फिर शनि देव के बीज मंत्र का जाप करते हुए इसे धारण करना अच्छा माना जाता है।

    सावधानी:

    छल्ला हमेशा घोड़े की नाल या नाव की पुरानी कील के लोहे से बना होना चाहिए, क्योंकि इसे ही सबसे अधिक प्रभावी माना जाता है।

    ध्यान रहे कि छल्ला पूरी तरह गोल होना चाहिए, उसमें कोई जोड़ या वेल्डिंग का निशान नहीं होना चाहिए।

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    अस्वीकरण: इस लेख में बताए गए उपाय/लाभ/सलाह और कथन केवल सामान्य सूचना के लिए हैं। दैनिक जागरण तथा जागरण न्यू मीडिया यहां इस लेख फीचर में लिखी गई बातों का समर्थन नहीं करता है। इस लेख में निहित जानकारी विभिन्न माध्यमों/ज्योतिषियों/पंचांग/प्रवचनों/मान्यताओं/धर्मग्रंथों/दंतकथाओं से संग्रहित की गई हैं। पाठकों से अनुरोध है कि लेख को अंतिम सत्य अथवा दावा न मानें एवं अपने विवेक का उपयोग करें। दैनिक जागरण तथा जागरण न्यू मीडिया अंधविश्वास के खिलाफ है।