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    Bhalchandra Chaturthi 2026: भालचंद्र चतुर्थी पर बन रहे हैं ये 3 दुर्लभ संयोग, बरसेगी गणपति बप्पा की कृपा

    Updated: Sun, 01 Mar 2026 02:50 PM (GMT+05:30)

    वैदिक पंचांग के अनुसार, 6 मार्च शुक्रवार को भालचंद्र संकष्टी चतुर्थी है। इस दिन भगवान गणेश की पूजा की जाती है और व्रत रखने से सुख-सौभाग्य में वृद्धि ह ...और पढ़ें

    Bhalchandra Chaturthi 2026: भालचंद्र चतुर्थी का धार्मिक महत्व

    Bhalchandra Chaturthi 2026: भालचंद्र चतुर्थी का धार्मिक महत्व 

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    धर्म डेस्क, नई दिल्ली। वैदिक पंचांग के अनुसार, शुक्रवार 06 मार्च को भालचंद्र संकष्टी चतुर्थी है। यह पर्व हर साल चैत्र माह के कृष्ण पक्ष की चतुर्थी तिथि को मनाया जाता है। इस शुभ अवसर पर भगवान गणेश की भक्ति भाव से पूजा की जाती है। साथ ही चतुर्थी का व्रत रखा जाता है। इस व्रत के पुण्य-प्रताप से साधक के सुख और सौभाग्य में वृद्धि होती है।

    ganesh ji

    ज्योतिषियों की मानें तो भालचंद्र संकष्टी चतुर्थी पर भद्रावास समेत कई मंगलकारी संयोग बन रहे हैं। इन योग में गणपति बप्पा की विशेष पूजा-अर्चना की जाएगी। आइए, चैत्र माह के कृष्ण पक्ष की चतुर्थी तिथि पर बनने वाले योग के बारे में जानते हैं-

    भालचंद्र संकष्टी चतुर्थी शुभ मुहूर्त (Bhalchandra Sankashti Chaturthi 2026)

    भालचंद्र संकष्टी चतुर्थी की शुरुआत- शुक्रवार 06 मार्च को शाम 05 बजकर 53 मिनट पर
    भालचंद्र संकष्टी चतुर्थी का समापन- शनिवार 07 मार्च को शाम 07 बजकर 17 मिनट पर
    भालचंद्र संकष्टी चतुर्थी पर चन्द्रोदय का समय- रात 09 बजकर 14 मिनट पर

    भद्रावास योग (Shubh Yog and Muhurat)

    चैत्र माह के कृष्ण पक्ष की चतुर्थी तिथि पर दुर्लभ भद्रावास योग का संयोग बन रहा है। भद्रावास योग का संयोग शाम 05 बजकर 53 मिनट तक है। इस दौरान भद्रा पाताल लोक में रहेंगी। भद्रा के पाताल लोक में रहने के दौरान चराचर के समस्त जीवों का कल्याण होता है। इस समय भगवान गणेश की पूजा करने से साधक के सकल मनोरथ सिद्ध होंगे।

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    वृद्धि योग

    ज्योतिषियों की मानें तो चैत्र माह के कृष्ण पक्ष की चतुर्थी तिथि पर वृद्धि योग का भी निर्माण हो रहा है। वृद्धि योग का संयोग सुबह 07 बजकर 06 मिनट से है। इस योग में भगवान गणेश की पूजा करने से सुख और सौभाग्य में अपार वृद्धि होगी। साथ ही हर मनोकामना पूरी होगी। इसके साथ ही संध्याकाल में शिववास योग का भी निर्माण हो रहा है।

    पंचांग

    • सूर्योदय - सुबह 06 बजकर 41 मिनट पर
    • सूर्यास्त - शाम 06 बजकर 24 मिनट पर
    • चन्द्रोदय- रात 09 बजकर 14 मिनट पर
    • चन्द्रास्त- सुबह 08 बजकर 01 मिनट पर
    • ब्रह्म मुहूर्त - सुबह 05 बजकर 03 मिनट से 05 बजकर 52 मिनट तक
    • विजय मुहूर्त - दोपहर 02 बजकर 30 मिनट से 03 बजकर 16 मिनट तक
    • गोधूलि मुहूर्त - शाम 06 बजकर 21 मिनट से 06 बजकर 46 मिनट तक
    • निशिता मुहूर्त - रात्रि 12 बजकर 07 मिनट से 12 बजकर 57 मिनट तक

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    अस्वीकरण: इस लेख में बताए गए उपाय/लाभ/सलाह और कथन केवल सामान्य सूचना के लिए हैं। दैनिक जागरण तथा जागरण न्यू मीडिया यहां इस लेख फीचर में लिखी गई बातों का समर्थन नहीं करता है। इस लेख में निहित जानकारी विभिन्न माध्यमों/ज्योतिषियों/पंचांग/प्रवचनों/मान्यताओं/धर्मग्रंथों/दंतकथाओं से संग्रहित की गई हैं। पाठकों से अनुरोध है कि लेख को अंतिम सत्य अथवा दावा न मानें एवं अपने विवेक का उपयोग करें। दैनिक जागरण तथा जागरण न्यू मीडिया अंधविश्वास के खिलाफ है।