Bhishma Ashtami 2026: भीष्म पितामह ने शरशय्या से पांडवों को दिए थे जीवन बदलने वाले ये उपदेश
पंचांग के अनुसार, हर साल माघ माह के शुक्ल पक्ष की अष्टमी तिथि पर भीष्म अष्टमी मनाई जाती है। ऐसे में इस बार यह 26 जनवरी को मनाई जा रही है। भीष्म पितामह ...और पढ़ें

भीष्म पितामह ने बताई हैं ये अनमोल बातें (AI Generated Image)
HighLights
26 जनवरी को मनाई जाएगी भीष्म अष्टमी
अंतिम समय में युद्धिष्ठिर को दिए थे ये उपदेश
भीष्म पितामह ने बताया कि क्या है एक राजा का धर्म
धर्म डेस्क, नई दिल्ली। एकोदिष्ट श्राद्ध (Ekoddishta Shraddha) भीष्म अष्टमी के दिन किया जाता है। आज हम आपको भीष्म पितामह के कुछ मूल्यवान वचन बताने जा रहे हैं, जो आज के समय में भी सार्थक बने हुए हैं।पितामह ने अपने जीवन के अंतिम क्षणों में पांडवों को जो उपदेश दिए, उन्हें 'राजधर्म' और 'अनुशासन पर्व' के नाम से जाना जाता है, जो इस प्रकार हैं -
क्या है एक शासक का कर्तव्य
भीष्म पितामह ने युधिष्ठिर को बताया कि एक राजा का सबसे पहला धर्म अपनी प्रजा की रक्षा करना है। ऐसे में एक राजा को वही करना चाहिए, जो उसकी प्रजा के हित में हो, न कि जो राजा को स्वयं प्रिय हो। इसके साथ ही दंड देते समय राजा को निष्पक्ष रहना चाहिए। अगर कोई राजा अपराधी को दंड नहीं देता, तो वह स्वयं पाप का भागी बन जाता है।

भीष्म ने समझाया त्याग और दान का महत्व
भीष्म पितामह ने युधिष्ठिर व अन्य पांडवों को त्याग का महत्व समझाते हुए कहा कि संसार में बिना त्याग के कोई बड़ी उपलब्धि या सिद्धि हासिल नहीं की जा सकती। आगे वह कहते हैं कि सच्चा त्याग ही मनुष्य को वास्तविक सुख प्रदान करता है। इसके साथ ही दान का महत्व बताते हुए भीष्म पितामह कहते हैं कि दान केवल धन का नहीं होता। भूखे को अन्न, प्यासे को जल और डरे हुए व्यक्ति को अभय यानी सुरक्षा प्रदान करना भी सबसे बड़ा दान है।
महिलाओं का सम्मान है जरूरी
युधिष्ठिर को समझाते हुए पितामह कहते हैं कि "जिस कुल में स्त्रियों का सम्मान नहीं होता और जहां स्त्रियां दुखी रहती हैं, उस कुल के सभी शुभ कर्म नष्ट हो जाते हैं और वह वंश समाप्त हो जाता है।" इसलिए यह जरूरी है कि महिलाओं का सम्मान किया जाए और उन्हें आदर दिया जाए।
खबरें और भी

(AI Generated Image)
क्रोध का त्याग
भीष्म पितामह कहते हैं कि क्रोध मनुष्य का सबसे बड़ा दुश्मन है और क्रोध में लिया गया निर्णय हमेशा विनाशकारी साबित होता है। बुद्धिमान व्यक्ति वही है, जो अपनी वाणी और क्रोध पर काबू रख सके। इसलिए क्रोध के अधीन होकर व्यक्ति को कभी भी अपना विवेक नहीं खोना चाहिए।
बताई हैं ये जरूरी बातें
भीष्म युधिष्ठिर से कहते हैं कि मनुष्य का मन बहुत ही चंचल होता है, जो क्षण भर में भटक जाता है। ऐसे में मनुष्य को चाहिए कि वह सफल और संतुलित जीवन जीने के लिए सबसे पहले अपने मन को नियंत्रित करना सीखे। साथ ही भीष्म पितामह ने सत्य को सबसे बड़ा तप बताया है। वह कहते हैं कि सत्य मनुष्य को उत्थान और स्वर्ग की ओर ले जाता है, जबकि झूठ अंधकार की ओर धकेलता है, जिससे निराशा और पतन निश्चित है। वहीं सत्यवादी व्यक्ति हमेशा उन्नति करता है।
यह भी पढ़ें- Bhishma Ashtami 2026: भीष्म अष्टमी के दिन जरूर करें इन चीजों का दान, मिलेगा पितरों का आशीर्वाद
यह भी पढ़ें- Bhishma Ashtami 2026: क्यों खास है भीष्म अष्टमी, इस व्रत को करने से मिलते हैं ये लाभ
अस्वीकरण: इस लेख में बताए गए उपाय/लाभ/सलाह और कथन केवल सामान्य सूचना के लिए हैं। दैनिक जागरण तथा जागरण न्यू मीडिया यहां इस लेख फीचर में लिखी गई बातों का समर्थन नहीं करता है। इस लेख में निहित जानकारी विभिन्न माध्यमों/ज्योतिषियों/पंचांग/प्रवचनों/मान्यताओं/धर्मग्रंथों/दंतकथाओं से संग्रहित की गई हैं। पाठकों से अनुरोध है कि लेख को अंतिम सत्य अथवा दावा न मानें एवं अपने विवेक का उपयोग करें। दैनिक जागरण तथा जागरण न्यू मीडिया अंधविश्वास के खिलाफ है।