विज्ञापन हटाएंसिर्फ खबर पढ़ें

बुद्ध पूर्णिमा पर अद्भुत संयोग, इन 5 कामों से घर आएगी खुशहाली; नोट करें चंद्रमा को अर्घ्य देने का समय

Published: Wed, 29 Apr 2026 06:52 PM (GMT+05:30)

बुद्ध पूर्णिमा 2026: वैशाख पूर्णिमा 1 मई 2026 को मनाई जाएगी। जानें भगवान बुद्ध के जन्म, ज्ञान और निर्वाण से ...और पढ़ें

बुद्ध पूर्णिमा 2026 पर करें दीपदान (AI-Generated Image)

बुद्ध पूर्णिमा 2026 पर करें दीपदान (AI-Generated Image)

timer icon

समय कम है?

जानिए मुख्य बातें और खबर का सार एक नजर में

संक्षेप में पढ़ें

धर्म डेस्क, नई दिल्ली। हिंदू धर्म में वैशाख महीने की पूर्णिमा का विशेष धार्मिक और आध्यात्मिक महत्व है। इस पावन तिथि को बुद्ध पूर्णिमा और बुद्ध जयंती के नाम से जाना जाता है। इस साल यह पर्व 1 मई 2026 को मनाया जाएगा।

यह दिन न केवल बौद्ध धर्म के अनुयायियों के लिए बल्कि हिंदू धर्म को मानने वालों के लिए भी बहुत खास है।  

तीन प्रमुख घटनाओं का संगम

बुद्ध पूर्णिमा की सबसे बड़ी विशेषता यह है कि भगवान बुद्ध के जीवन की तीन सबसे महत्वपूर्ण घटनाएं इसी दिन हुई थीं, उनका जन्म, उन्हें ज्ञान (निर्वाण) की प्राप्ति और उनका महापरिनिर्वाण (परम मोक्ष)। यही कारण है कि इसे आध्यात्मिक दृष्टि से साल की सबसे शक्तिशाली पूर्णिमाओं में से एक माना जाता है।

शुभ मुहूर्त और उदया तिथि

पूर्णिमा तिथि की शुरुआत 30 अप्रैल 2026 को रात 9:13 बजे से हो जाएगी और इसकी समाप्ति 1 मई को रात 10:53 बजे होगी। उदया तिथि के प्रभाव के कारण बुद्ध पूर्णिमा का व्रत और उत्सव शुक्रवार, 1 मई 2026 को मनाया जाएगा। इस दिन 'रवि योग' का शुभ संयोग भी बन रहा है।

वैशाख की आखिरी तीन तिथियों का महत्व

स्कंद पुराण और अन्य शास्त्रों के अनुसार, वैशाख महीने की आखिरी तीन तिथियां (त्रयोदशी, चतुर्दशी और पूर्णिमा) अत्यंत पवित्र होती हैं। त्रयोदशी को नृसिंह जयंती, चतुर्दशी को कूर्म जयंती और पूर्णिमा को बुद्ध जयंती मनाई जाती है।

purnima

(AI-Generated Image)

मान्यता है कि जो व्यक्ति पूरे महीने तीर्थ स्नान नहीं कर पाया, वह अगर इन तीन दिनों में सूर्योदय से पहले पवित्र नदियों में स्नान कर ले, तो उसे पूरे वैशाख मास का पुण्य फल मिल जाता है।

बुद्ध पूर्णिमा पर क्या करें?

स्नान और दान: सुबह जल्दी उठकर गंगा या किसी पवित्र नदी में स्नान करें। अगर घर पर नहा रहे हैं, तो पानी में थोड़ा गंगाजल जरूर मिलाएं। स्नान के बाद ब्राह्मणों और जरूरतमंदों को भोजन व कपड़े दान करें।

पूजा और पाठ: इस दिन भगवान विष्णु और माता लक्ष्मी की पूजा करें। शास्त्रों के अनुसार, इस दिन श्रीविष्णु सहस्रनाम या गीता का पाठ करने से अश्वमेध यज्ञ के समान फल मिलता है।

चंद्रमा को अर्घ्य: पूर्णिमा की रात चंद्रमा को जल (अर्घ्य) देने की परंपरा है। माना जाता है कि इससे मानसिक शांति मिलती है और घर में सुख-समृद्धि का वास होता है।

दीपदान: इस दिन बोधि वृक्ष (बिहार के बोधगया में स्थित एक पवित्र पीपल का पेड़) या पीपल के पेड़ के पास दीपक जलाना बहुत शुभ माना जाता है।

 यह भी पढ़ें- बुद्ध पूर्णिमा को यूं ही नहीं कहा जाता 'तीन बार धन्य उत्सव', इस दिन हुए थे 3 महाचमत्कार

यह भी पढ़ें- बुद्ध पूर्णिमा की रात दक्षिण दिशा में क्यों जलाना चाहिए दीपक? पितृ दोष से मुक्ति का सबसे सरल तरीका

अस्वीकरण: इस लेख में बताए गए उपाय/लाभ/सलाह और कथन केवल सामान्य सूचना के लिए हैं। दैनिक जागरण यहां इस लेख फीचर में लिखी गई बातों का समर्थन नहीं करता है। इस लेख में निहित जानकारी विभिन्न माध्यमों/ज्योतिषियों/पंचांग/प्रवचनों/मान्यताओं/धर्मग्रंथों/दंतकथाओं से संग्रहित की गई हैं। पाठकों से अनुरोध है कि लेख को अंतिम सत्य अथवा दावा न मानें एवं अपने विवेक का उपयोग करें।

देश और दुनिया की ताजा खबरों के लिए Hindi News देखें। Live Cricket Score , IPO Listings, Shiv Chalisa, राशिफल और दुर्गा चालीसा पर अन्य जानकारी पाएं।