Chaitra Navratri 2026: मां महागौरी की पूजा में जरूर करें इस चालीसा का पाठ, सुखों से भर जाएगा जीवन
चैत्र नवरात्र का आठवां दिन मां दुर्गा के आठवें स्वरूप मां महागौरी को समर्पित है। देवी का यह शांत स्वरूप भक्तों के पाप धोकर सुख-समृद्धि लाता है। ...और पढ़ें

Chaitra Navratri 2026: मां महागौरी की पूजा। (Ai Generated Image)
HighLights
आज चैत्र नवरात्र का आठवां दिन है
यह मां महागौरी को समर्पित है
देवी का यह स्वरूप बेहद शांत है
धर्म डेस्क, नई दिल्ली। Chaitra Navratri 2026: चैत्र नवरात्र के पावन पर्व का आठवां दिन यानी अष्टमी तिथि, मां दुर्गा के आठवें स्वरूप मां महागौरी को समर्पित है। देवी का यह स्वरूप बेहद शांत है। माना जाता है कि मां महागौरी की पूजा करने से भक्तों के सभी पाप धुल जाते हैं और जीवन में सुख-समृद्धि का वास होता है। इस साल अष्टमी तिथि विशेष फलदायी मानी जा रही है। मान्यता है कि इस दिन अगर विधि-विधान से मां की पूजा के साथ महागौरी चालीसा का पाठ किया जाए, तो वैवाहिक जीवन की बाधाएं दूर होती हैं और मनचाहा वर मिलता है।
मां महागौरी की महिमा
मां महागौरी का नाम उनके गौर वर्ण के कारण पड़ा है। पौराणिक कथाओं के अनुसार, भगवान शिव को पति रूप में पाने के लिए मां ने कठोर तपस्या की थी, जिससे उनका शरीर काला पड़ गया था। बाद में महादेव ने गंगा जल से उन्हें स्नान कराया, जिससे उन्हें बेहद गौर वर्ण की प्राप्ति हुई।

।।गौरी चालीसा।।
।।चौपाई।।
मन मंदिर मेरे आन बसो,
आरम्भ करूं गुणगान,
गौरी माँ मातेश्वरी,
दो चरणों का ध्यान।
पूजन विधि न जानती,
पर श्रद्धा है अपार,
प्रणाम मेरा स्वीकारिये,
हे माँ प्राण आधार।
नमो नमो हे गौरी माता,
आप हो मेरी भाग्य विधाता,
शरणागत न कभी घबराता,
गौरी उमा शंकरी माता।
आपका प्रिय है आदर पाता,
जय हो कार्तिकेय गणेश की माता,
महादेव गणपति संग आओ,
मेरे सकल क्लेश मिटाओ।
सार्थक हो जाए जग में जीना,
सत्कर्मो से कभी हटूं ना,
सकल मनोरथ पूर्ण कीजो,
सुख सुविधा वरदान में दीज्यो।
हे माँ भाग्य रेखा जगा दो,
मन भावन सुयोग मिला दो,
मन को भाए वो वर चाहूं,
ससुराल पक्ष का स्नेहा मैं पायु।
परम आराध्या आप हो मेरी,
फ़िर क्यों वर में इतनी देरी,
हमरे काज सम्पूर्ण कीजियो,
थोडे़ में बरकत भर दीजियो।
अपनी दया बनाए रखना,
भक्ति भाव जगाये रखना,
गौरी माता अनसन रहना,
कभी न खोयूं मन का चैना।
देव मुनि सब शीश नवाते,
सुख सुविधा को वर मैं पाते,
श्रद्धा भाव जो ले कर आया,
बिन मांगे भी सब कुछ पाया।
हर संकट से उसे उबारा,
आगे बढ़ के दिया सहारा,
जब भी माँ आप स्नेह दिखलावे,
निराश मन में आस जगावे।
शिव भी आपका काहा ना टाले,
दया दृष्टि हम पे डाले,
जो जन करता आपका ध्यान,
जग में पाए मान सम्मान।
सच्चे मन जो सुमिरन करती,
उसके सुहाग की रक्षा करती,
दया दृष्टि जब माँ डाले,
भव सागर से पार उतारे।
जपे जो ओम नमः शिवाय,
शिव परिवार का स्नेहा वो पाए,
जिसपे आप दया दिखावे,
दुष्ट आत्मा नहीं सतावे।
सात गुण की हो दाता आप,
हर इक मन की ज्ञाता आप,
काटो हमरे सकल क्लेश,
निरोग रहे परिवार हमेशा।
दुख संताप मिटा देना माँ,
मेघ दया के बरसा देना माँ,
जबही आप मौज में आय,
हठ जय माँ सब विपदाएं।
जिस पे दयाल हो माता आप,
उसका बढ़ता पुण्य प्रताप,
फल-फूल मै दुग्ध चढ़ाऊ,
श्रद्धा भाव से आपको ध्यायु।
अवगुण दृष्टि दृष्टि दृष्टि मेरे ढक देना माँ,
ममता आंचल कर देना मां,
कठिन नहीं कुछ आपको माता,
जग ठुकराया दया को पाता।
बिन पाऊ न गुन माँ तेरे,
नाम धाम स्वरूप बहू तेरे,
जितने आपके पावन धाम,
सब धामो को मां प्राणम।
आपकी दया का है ना पार,
तभी को पूजे कुल संसार,
निर्मल मन जो शरण में आता,
मुक्ति की वो युक्ति पाता।
संतोष धन्न से दामन भर दो,
असम्भव को माँ सम्भव कर दो,
आपकी दया के भारे,
सुखी बसे मेरा परिवार।
आपकी महिमा अति निराली,
भक्तो के दुःख हरने वाली,
मनोकामना पुरन करती,
मन की दुविधा पल मे हरती।
चालीसा जो भी पढें सुनाया,
सुयोग वर् वरदान में पाए,
आशा पूर्ण कर देना माँ,
सुमंगल साखी वर देना माँ।
गौरी माँ विनती करूँ,
आना आपके द्वार,
ऐसी माँ कृपा किजिये,
हो जाए उद्धार।
हीं हीं हीं शरण में,
दो चरणों का ध्यान,
ऐसी माँ कृपा कीजिये,
पाऊँ मान सम्मान।
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