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    Chaitra Navratri 2026: अगर टूट गया है नवरात्र व्रत तो घबराएं नहीं, तुरंत करें ये महाउपाय

    Updated: Fri, 20 Mar 2026 01:52 PM (IST)

    चैत्र नवरात्र (Chaitra Navratri 2026) के दौरान अगर अनजाने में व्रत टूट जाए, तो घबराने की जरूरत नहीं है। शास्त्रों में इसके लिए प्रायश्चित के उपाय बताए ...और पढ़ें

    Chaitra Navratri 2026: नवरात्र व्रत टूटने पर करें ये काम। (Ai Generated Image)

    Chaitra Navratri 2026: नवरात्र व्रत टूटने पर करें ये काम। (Ai Generated Image)

    HighLights

    1. चैत्र नवरात्र का पर्व बेहद शुभ माना जाता है

    2. यह मां दुर्गा को समर्पित है

    3. आज नवरात्र का तीसरा दिन है

    धर्म डेस्क, नई दिल्ली। Chaitra Navratri 2026: चैत्र नवरात्र के नौ दिन शक्ति उपासना के लिए बहुत महत्वपूर्ण माने जाते हैं। इस दौरान भक्त बड़ी श्रद्धा के साथ उपवास रखते हैं और पूजा-पाठ करते हैं। लेकिन कई बार अनजाने में या खराब सेहत के चलते व्रत खंडित हो जाता है। ऐसे में मन में डर और पाप का भाव आने लगता है। आज नवरात्र का तीसरा दिन है। अगर आपसे भी जाने-अनजाने में कोई गलती हो गई है और व्रत टूट गया है, तो घबराने की जरूरत नहीं है, क्योंकि शास्त्रों में हर भूल के लिए प्रायश्चित का विधान बताया गया है, तो आइए इसके नियम जानते हैं।

    Chaitra Navratri 2026 remedies 1

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    क्षमा याचना और विशेष मंत्र का जाप

    जैसे ही आपको अपनी भूल का पता चले, सबसे पहले शुद्ध जल से हाथ-मुंह धोएं और मंदिर के सामने बैठकर मां दुर्गा से हाथ जोड़कर अपनी गलती की माफी मांगें। फिर इस मंत्र "अच्युत-अनंत-गोविंद" का 108 नाम का जप करें। इसके बाद भगवान विष्णु और मां दुर्गा का ध्यान करें। इसके अलावा 'ॐ दुं दुर्गायै नमः' मंत्र का 108 बार जाप करने से मन की अशुद्धि दूर होती है और व्रत खंडित होने का दोष कम हो जाता है।

    हवन

    अगर आपसे भारी चूक हुई है, तो घर में छोटा सा हवन करें। आम की लकड़ियों पर घी, कपूर और हवन सामग्री से मां के नाम की आहुतियां दें। इससे घर की नकारात्मक ऊर्जा खत्म होती है और आपका व्रत पुनः 'संकल्पित' माना जाता है। हवन के बाद पूरे घर में गंगाजल का छिड़काव करें।

    दान-पुण्य और कन्या पूजन

    व्रत टूटने के दोष को कम करने का सबसे अच्छा तरीका दान है। ऐसे में अपनी क्षमता के अनुसार, सफेद चीजों जैसे कि दूध, चीनी, चावल या सफेद वस्त्रों का दान किसी जरूरतमंद या ब्राह्मण को करें। इसके साथ ही अगर हो पाए तो उसी दिन या अगले दिन दो छोटी कन्याओं को भोजन कराएं और उन्हें फल या दक्षिणा देकर विदा करें, क्योंकि कन्याओं को मां दुर्गा का स्वरूप माना गया है।

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    अस्वीकरण: इस लेख में बताए गए उपाय/लाभ/सलाह और कथन केवल सामान्य सूचना के लिए हैं। दैनिक जागरण तथा जागरण न्यू मीडिया यहां इस लेख फीचर में लिखी गई बातों का समर्थन नहीं करता है। इस लेख में निहित जानकारी विभिन्न माध्यमों/ज्योतिषियों/पंचांग/प्रवचनों/मान्यताओं/धर्मग्रंथों/दंतकथाओं से संग्रहित की गई हैं। पाठकों से अनुरोध है कि लेख को अंतिम सत्य अथवा दावा न मानें एवं अपने विवेक का उपयोग करें। दैनिक जागरण तथा जागरण न्यू मीडिया अंधविश्वास के खिलाफ है।