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    Chaitra Purnima 2026: पूर्णिमा की रात करें इन मंत्रों का जप, खुल जाएंगे बंद किस्मत के ताले

    By Suman SainiEdited By: Suman Saini
    Updated: Tue, 24 Mar 2026 05:00 PM (IST)

    पूर्णिमा के दिन व्रत करने का भी विशेष महत्व है। इस दिन भगवान विष्णु और माता लक्ष्मी की विधि-विधान से पूजा करने से शुभ फल प्राप्त होते हैं। ...और पढ़ें

    Chaitra Purnima 2026 (AI Generated Image)

    Chaitra Purnima 2026 (AI Generated Image)

    HighLights

    1. 2 अप्रैल को मनाई जाएगी चैत्र पूर्णिमा

    2. इस दिन होती है लक्ष्मी-नारायण की पूजा

    3. सुख- समृद्धि के लिए करें इन मंत्रों का जप

    धर्म डेस्क, नई दिल्ली। हिंदू धर्म में पूर्णिमा तिथि (Chaitra Purnima 2026) को महत्वपूर्ण तिथियों में से एक माना गया है। इस बार चैत्र पूर्णिमा गुरुवार 2 अप्रैल को मनाई जाएगी। इस दिन को भगवान विष्णु और मां लक्ष्मी की कृपा प्राप्ति के लिए विशेष माना गया है। ऐसे में इस दिन चैत्र माह की पूर्णिमा पर आप कुछ खास मंत्रों का जप करके लाभ प्राप्त कर सकते हैं।

    पूर्णिमा शुभ मुहूर्त (Chaitra Purnima Muhurat)

    चैत्र माह की पूर्णिमा तिथि 1 अप्रैल को सुबह 7 बजकर 6 मिनट पर शुरू हो रही है। वहीं इस तिथि के समापन की बात की जाए, तो यह 2 अप्रैल को सुबह 7 बजकर 41 मिनट पर समाप्त होगी। इस दिन पर चंद्रोदय का समय कुछ इस प्रकार रहेगा।

    पूर्णिमा के दिन चंद्रोदय का समय - शाम 7 बजकर 7 मिनट पर

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    (AI Generated Image)

    1. भगवान विष्णु के मंत्र

    ॐ नमो नारायण

    ॐ नमो भगवते वासुदेवाय

    2. मां लक्ष्मी के मंत्र (Laxmi ji ke Mantra)

    श्री लक्ष्मी बीज मंत्र - ॐ श्री ह्रीं श्रीं कमले कमलालये प्रसीद श्रीं ह्रीं श्रीं ॐ महालक्ष्मयै नमः।।

    श्री लक्ष्मी महामंत्र - ॐ श्रीं ल्कीं महालक्ष्मी महालक्ष्मी एह्येहि सर्व सौभाग्यं देहि मे स्वाहा।।

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    (AI Generated Image)

    लक्ष्मी प्रार्थना मंत्र -

    नमस्ते सर्वगेवानां वरदासि हरे: प्रिया।
    या गतिस्त्वत्प्रपन्नानां या सा मे भूयात्वदर्चनात्।।

    श्री लक्ष्मी गायत्री मंत्र -

    ॐ श्री महालक्ष्म्यै च विद्महे विष्णु पत्न्यै च धीमहि तन्नो लक्ष्मी प्रचोदयात् ॐ॥

    3. चंद्र देव मंत्र -

    ॐ श्रां श्रीं श्रौं स: चन्द्रमसे नम:

    ॐ सों सोमाय नमः

    जरूर करें ये काम

    • पूर्णिमा के दिन विधि-विधान से लक्ष्मी-नारायण की पूजा करें।
    • पूजा में इत्र, फल, फूल और सुहाग की सामग्री अर्पित करें।
    • पूर्णिमा की रात में चंद्रमा को कच्चे दूध, चीनी और चावल मिलाकर अर्घ्य दें।
    • पूर्णिमा के दिन अन्न और धन का दान जरूर करें।

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