चाणक्य नीति: इन लोगों को कभी न दें महत्व, सफलता के लिए इनसे रहें दूर
आचार्य चाणक्य के नीति शास्त्र के अनुसार, कुछ लोगों को अत्यधिक महत्व देना आपके आत्म-सम्मान और सफलता के लिए हानिकारक हो सकता है। ...और पढ़ें
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इन लोगों को कभी न दें महत्व (Picture Credit- AI Generated)
HighLights
सांप से भी अधिक घातक होते हैं ये लोग
ज्ञानहीन सुंदर व्यक्ति का नहीं होता अर्थ
अत्यधिक सीधा होने से होता है नुकसान
धर्म डेस्क, नई दिल्ली। आचार्य चाणक्य ने अपने नीति शास्त्र में कुछ ऐसे लोगों के बारे में बताया है, जिन्हें अत्यधिक महत्व (वैल्यू) देने से बचना चाहिए। उन पर भरोसा करना आपके आत्म-सम्मान और सफलता के लिए घातक हो साबित हो सकता है। चलिए जानते हैं इन लोगों के बारे में।
इन लोगों से रहें कोसों दूर
1. दुर्जनेषु च सर्पेषु वरं सर्पो न दुर्जनः ।
सर्पो दंशति कालेन दुर्जनस्तु पदे-पदे ।।
चाणक्य नीति के इस श्लोक का अर्थ है कि किसी बुरे व्यक्ति की तुलना अगर सांप से की जाए, तो सांप ज्यादा अच्छा होगा। क्योंकि सांप केवल एक बार आपको काटता है, लेकिन एक बुरा व्यक्ति हर कदम पर आपको नुकसान पहुंचा सकता है। इसलिए अपने जीवन में इस तरह के लोगों को अपने जीवन में बिल्कुल भी तवज्जो नहीं देनी चाहिए, क्योंकि यह लोग आपके लिए सांप से भी ज्यादा घातक साबित हो सकते हैं।
ऐसे लोगों से न रखें कोई नाता
2. रूपयौवनसम्पन्ना विशालकुलसम्भवाः।
विद्याहीना न शोभन्ते निर्गन्धा इव किंशुकाः ॥
इस श्लोक में आचार्य चाणक्य कहते हैं कि रूप, यौवन और उच्च कुल में जन्म लेने के बाव भी अगर यदि किसी व्यक्ति में ज्ञान की कमी है, तो वह सुगंधहीन किंशुक (पलाश) के फूल के समान ही है, जो सुंदर होकर भी निरर्थक और अशोभनीय है। ऐसे में यह जरूरी है कि आप किसी व्यक्ति की केवल ऊपरी सुंदरता को ही वैल्यू न दें, बल्कि व्यक्ति का स्वभाव और गुण भी देखें।
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(Picture Credit- AI Generated)
इस चीज को न दें महत्व
3. "नात्यन्तं सरलैर्भाव्यं गत्वा पश्य वनस्थलीम् ।
छिद्यन्ते सरलास्तत्र कुब्जास्तिष्ठन्ति पादपाः॥"
चाणक्य नीति कहती है कि किसी व्यक्ति का बहुत ज्यादा सीधा-साधा या भोला होना भी सही नहीं है। चाणक्य इसका उदहारण देते हुए कहते हैं कि जैसे जंगल में सीधे पेड़ों को सबसे पहले काटा जाता है औप टेढ़े-मेढ़े पेड़ बचे रह जाते हैं, ठीक उसी तरह चालाक लोग सीधे लोगों का फायदा उठा लेते हैं। इसलिए जीवन में भोलेपन को महत्व देना आपके लिए नुकसानदायक साबित हो सकता है।
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इन लोगों से बना लें दूरी
4. दुराचारी च दुर्दृष्टिर्दुराऽऽवासी च दुर्जनः ।
यन्मैत्री क्रियते पुम्भिर्नरः शीघ्र विनश्यति ।।
चाणक्य नीति के श्लोक में आचार्य कहा गया है कि सज्जन व्यक्ति को दुराचारी और दुष्ट स्वभाव वाले लोगों से कभी भी दोस्ती नहीं करनी चाहिए। चाणक्य कहते हैं कि ऐसे लोगों से कोई भी रिश्ता न रखें, जो दूसरों को नुकसान पहुंचाने के लिए हर समय षड्यंत्र रचते रहते हों। क्योंकि इसका प्रभाव कभी-न-कभी आपके ऊपर भी पढ़ सकता है। इसलिए जितनी जल्दी हो सके, इस तरह के लोगों से दूरी बना लें।