सांप से भी ज्यादा खतरनाक हैं 3 तरह के दोस्त, चाणक्य नीति के अनुसार, आज ही तोड़ दें इनसे नाता
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इन 3 तरह के दोस्तों से रहें सावधान
HighLights
दुष्ट व्यक्ति सांप से भी अधिक हानिकारक होते हैं
दुराचारी और षड्यंत्रकारी लोगों से दोस्ती न करें
ज्ञान और अच्छे कर्म ही व्यक्ति के सच्चे मित्र हैं
धर्म डेस्क, नई दिल्ली। चाणक्य नीति के अनुसार, कुछ दोस्त सांप से भी ज्यादा खतरनाक साबित हो सकते हैं, जिनसे दूरी बनाना ही बेहतर है। ऐसे में चलिए जानते हैं चाणक्य नीति के कुछ ऐसे ही श्लोक, जो आपको बताते हैं कि जीवन में किन लोगों से दोस्ती नहीं करनी चाहिए।
ऐसे दोस्त से सांप अच्छा है
1. दुर्जनेषु च सर्पेषु वरं सर्पो न दुर्जनः ।
सर्पो दंशति कालेन दुर्जनस्तु पदे-पदे ।।
आचार्य चाणक्य ने इस श्लोक में बताया है कि अगर किसी दुष्ट व्यक्ति की तुलना सांप से की जाए, तो सांप को अच्छा कहा जाएगा। क्योंकि सांप केवल एक बार आपको घाव पहुंचाता है, लेकिन एक दुष्ट व्यक्ति या दोस्त हर कदम पर आपको हानि पहुंचा सकता है। इसलिए ऐसे लोगों को दोस्त बनाने से कोसों दूर रहना चाहिए, क्योंकि यह लोग सांप से भी ज्यादा घातक साबित होते हैं।

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ऐसे लोगों से न करें दोस्ती
2. दुराचारी च दुर्दृष्टिर्दुराऽऽवासी च दुर्जनः ।
यन्मैत्री क्रियते पुम्भिर्नरः शीघ्र विनश्यति ।।
चाणक्य नीति के श्लोक में आचार्य कहा गया है कि सज्जन व्यक्ति को दुराचारी और दुष्ट स्वभाव वाले लोगों से कभी भी दोस्ती नहीं करनी चाहिए। चाणक्य कहते हैं कि ऐसे लोगों से कोई भी रिश्ता न रखें, जो दूसरों को नुकसान पहुंचाने के लिए हर समय षड्यंत्र रचते रहते हों। क्योंकि इसका प्रभाव कभी-न-कभी आपके ऊपर भी पढ़ सकता है। इसलिए जितनी जल्दी हो सके, इस तरह के लोगों से दूरी बना लें।
इन लोगों से बनाए दूरी
3. कुराजराज्येन कुतः प्रजासुखं कुमित्रमित्रेण कुतोऽभिनिवृत्तिः।
कुदारदारैश्च कुतो गृहे रतिः कृशिष्यमध्यापयतः कुतो यशः।।
आचार्य चाणक्य अपने इस श्लोक में कहते हैं कि जिस तरह एक दुष्ट राजा के राज्य में प्रजा कभी सुखी नहीं रह सकती। एक बुरे आचरण वाले पार्टनर के साथ कभी सुख नहीं मिल सकता, ठीक उसी तरह एक दुष्ट मित्र के साथ रहने में कोई आनंद नहीं मिलता। ऐसे में अगर आप चाहते हैं कि आपका जीवन खुशहाल रहे, तो इस तरह के लोगों को दोस्त बनाने से बचें।
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कौन है सबसे अच्छा दोस्त?
4. विद्या मित्रं प्रवासेषु भार्या मित्रं गृहेषु च।
व्याधितस्यौषधं मित्रं धर्मो मित्रं मृतस्य च॥
सच्चे दोस्त के महत्व पर प्रकाश डालते हुए यह श्लोक बताता है कि एक रोगी के लिए सबसे बड़ा मित्र उसकी दवाई है। विदेश या घर से दूर यात्रा में ज्ञान ही सबसे बड़ा दोस्त है, क्योंकि यह राह दिखाता है। घर में पार्टनर (पत्नी) ही आपका सबसे बड़ा दोस्त है, जो सुख-दुःख में आपका साथ निभाता है। इसी तरह मृत्यु के पश्चात केवल व्यक्ति के किए गए अच्छे कर्म ही साथ चलते हैं, इसलिए वही आपके सच्चे मित्र हैं।