आचार्य चाणक्य ने बताई हैं माता-पिता की ये जिम्मेदारियां, जो संतान के लिए खोलती हैं सफलता की राह
आचार्य चाणक्य ने माता-पिता के लिए महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां बताई हैं, जिनके बारे में सभी माता-पिता को जरूर पता होना चाहिए। चाणक्य नीति में बताए गए ये स ...और पढ़ें

माता-पिता के लिए चाणक्य नीति के टिप्स
HighLights
माता-पिता के लिए भी चाणक्य नीति में बताई गई हैं कुछ टिप्स
बच्चों के उज्ज्वल भविष्य के लिए जरूरी हैं ये जिम्मेदारियां
उम्र के अनुसार बच्चों से करें मित्रवत व्यवहार
धर्म डेस्क, नई दिल्ली। चाणक्य नीति (Chanakya Niti tips) लोकप्रिय नीतियों में से एक है, जिसकी प्रासंगिकता आज के समय में भी बनी बुई है। अगर आप चाणक्य नीति को अपने जीवन में अपनाते हैं, तो इससे आपके लिए सफलता प्राप्ति की राह आसान हो सकती है। आज हम जानेंगे कि आचार्य चाणक्य ने माता-पिता के लिए कौन-सी जिम्मेदारियां जरूरी बताई हैं।
1. माता शत्रुः पिता वैरी येनवालो न पाठितः।
न शोभते सभामध्ये हंसमध्ये वको यथा ॥
आचार्य चाणक्य अपनी नीति में कहते हैं कि बच्चे को न पढ़ानेवाली माता शत्रु तथा पिता वैरी के समान होते हैं। अनपढ़ व्यक्ति विद्वानों की सभा में वैसे ही शोभा नहीं पाता, जैसे हंसों के झुंड के बीच एक बगुला। ऐसे में हर माता-पिता के लिए यह जरूरी है कि वह अपनी संतान की शिक्षा का पूरा ध्यान रखें।

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2. लालनाद् बहवो दोषास्ताडनाद् बहवो गुणाः।
तस्मात्पुत्रं च शिष्यं च ताडयेन्न तु लालयेत् ॥
इस श्लोक में चाणक्य कहते हैं कि ज्यादा लाड़-प्यार करने से बच्चों में अनेक दोष पैदा हो सकते हैं। इसलिए कभी-कभी डाट-फटकार या सख्ती भी जरूरी है। इस श्लोक में वह कहते हैं कि संतान और शिष्य को लालन की नहीं ताड़न की आवश्यकता होती है।
आज के समय में कुछ माता-पिता अपने बच्चे को जरूरत से ज्यादा लाड़-प्यार देकर उन्हें बिगड़ देते हैं। बच्चे को अच्छा व्यवहार सिखाने के लिए कभी-कभी सख्ती भी बरतनी चाहिए।

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3. लालयेत् पंचवर्षाणि दशवर्षाणि ताडयेत्।
प्राप्ते तु षोडशे वर्षे पुत्रं मित्रवदाचरेत्॥
इस श्लोक के माध्यम में आचार्य चाणक्य कहते है कि एक पिता को पांच वर्ष तक अपने पुत्र का अच्छे से लालन-पालन करना चाहिए। दस वर्ष तक ताड़न करे अर्थात जरूरत पड़ने पर डांट-डपट भी लगानी चाहिए और सोलहवें वर्ष में पुत्र के साथ मित्र के समान व्यवहार करना चाहिए।
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4. जनिता चोपनेता च यस्तु विद्यां प्रयच्छति।
अन्नदाता भयत्राता पञ्चैता पितरः स्मृताः॥
जन्म देनेवाला, उपनयन संस्कार करनेवाला, विद्या देनेवाला, अन्नदाता तथा भय से रक्षा करनेवाला, ये पांचों पिता के समान आदरणीय हैं।अर्थात एक पिता के लिए यह 5 जिम्मेदारियां जरूरी होती हैं।
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अस्वीकरण: इस लेख में बताए गए उपाय/लाभ/सलाह और कथन केवल सामान्य सूचना के लिए हैं। दैनिक जागरण तथा जागरण न्यू मीडिया यहां इस लेख फीचर में लिखी गई बातों का समर्थन नहीं करता है। इस लेख में निहित जानकारी विभिन्न माध्यमों/ज्योतिषियों/पंचांग/प्रवचनों/मान्यताओं/धर्मग्रंथों/दंतकथाओं से संग्रहित की गई हैं। पाठकों से अनुरोध है कि लेख को अंतिम सत्य अथवा दावा न मानें एवं अपने विवेक का उपयोग करें। दैनिक जागरण तथा जागरण न्यू मीडिया अंधविश्वास के खिलाफ है।