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    चारधाम यात्रा 2026: इंतजार खत्म! नोट करें कब से शुरू होगी यात्रा? पढ़ें इसका धार्मिक महत्व

    Updated: Thu, 09 Apr 2026 03:03 PM (IST)

    हिंदू धर्म में चारधाम यात्रा का बड़ा महत्व है, जिसे मोक्ष प्राप्ति का मार्ग माना जाता है। यह यात्रा हर साल अक्षय तृतीया पर शुरू होती है। ...और पढ़ें

    Chardham Yatra 2026: चारधाम यात्रा का महत्व। (Ai Generated Image)

    Chardham Yatra 2026: चारधाम यात्रा का महत्व। (Ai Generated Image)

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    धर्म डेस्क, नई दिल्ली। पवित्र चारधाम की यात्रा का इंतजार हर साल करोड़ों श्रद्धालुओं को रहता है। हिंदू धर्म में चारधाम यात्रा का बहुत बड़ा महत्व है और इसे जीवन में कम से कम एक बार जरूर करना चाहिए। कहते हैं कि इस यात्रा को करने से मोक्ष प्राप्ति के मार्ग खुलते हैं और पापों का नाश होता है, तो आइए इस पवित्र यात्रा की तिथि, शुभ मुहूर्त और धार्मिक महत्व को जानते हैं।

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    चारधाम यात्रा शुभ मुहूर्त (Chardham Yatra 2026 Date And Time)

    वैदिक पंचांग के अनुसार, चारधाम यात्रा (Uttarakhand Temple Opening Date) की शुरुआत हर साल अक्षय तृतीया के दिन होती है। इस साल अक्षय तृतीया 19 अप्रैल को पड़ रही है। यानी चारधाम यात्रा की शुरुआत 19 अप्रैल को होगी।

    अक्षय तृतीया 2026 कब है? (Akshaya Tritiya 2026 Shubh Muhurat)

    हिंदू पंचांग के अनुसार, वैशाख माह के शुक्ल पक्ष की तृतीया तिथि 19 अप्रैल को सुबह 10 बजकर 49 मिनट पर शुरू होगी। वहीं, इसका समापन 20 अप्रैल को सुबह 07 बजकर 27 मिनट पर होगा। पंचांग को देखते हुए अक्षय तृतीया का पर्व 19 अप्रैल को मनाया जाएगा।

    चारधाम यात्रा का धार्मिक महत्व (Chardham Yatra 2026 Significance)

    • यमुनोत्री धाम - यह यमुना नदी का पावन स्थल है। यहां स्नान करने से अकाल मृत्यु का भय दूर होता है।
    • गंगोत्री धाम - मां गंगा के इस पावन तट पर आने से साधक के जन्म-जन्मांतर के पाप धुल जाते हैं।
    • केदारनाथ धाम - भगवान शिव के 12 ज्योतिर्लिंगों में से एक, यह धाम भक्तों को महादेव की कृपा पाने का शुभ अवसर देता है।
    • बद्रीनाथ धाम - यह धाम भगवान विष्णु को समर्पित है। ऐसा माना जाता है कि यहां के दर्शन मात्र से व्यक्ति को पुनर्जन्म के चक्र से मुक्ति मिल जाती है।

    शुभ संयोग (Chardham Yatra 2026 Shubh Yog)

    अक्षय तृतीया पर बन रहे ग्रहों के शुभ संयोग इस यात्रा को और भी फलदायी बना रहे हैं। अक्षय तृतीया को 'स्वयंसिद्ध मुहूर्त' माना जाता है, जिसमें किसी भी नए काम की शुरुआत सफलता प्रदान करती है। इस दौरान किए गए दान और तीर्थ यात्रा का पुण्य कभी समाप्त नहीं होता।

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    अस्वीकरण: इस लेख में बताए गए उपाय/लाभ/सलाह और कथन केवल सामान्य सूचना के लिए हैं। दैनिक जागरण यहां इस लेख फीचर में लिखी गई बातों का समर्थन नहीं करता है। इस लेख में निहित जानकारी विभिन्न माध्यमों/ज्योतिषियों/पंचांग/प्रवचनों/मान्यताओं/धर्मग्रंथों/दंतकथाओं से संग्रहित की गई हैं। पाठकों से अनुरोध है कि लेख को अंतिम सत्य अथवा दावा न मानें एवं अपने विवेक का उपयोग करें।