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    देवताओं के हाथों में अलग-अलग आयुध क्यों हैं? हर अस्त्र देता है एक जीवन संदेश

    Updated: Fri, 07 Aug 2026 12:31 PM (IST)

    देवी-देवताओं की मूर्तियों में दिखने वाले त्रिशूल, चक्र और गदा सिर्फ हथियार नहीं हैं। जानिए इन आयुधों के पीछे छिपे जीवन के गहरे आध्यात्मिक और नैतिक संद ...और पढ़ें

    भगवान के प्रमुख अस्त्रों का अर्थ (AI-Generated Image)

    भगवान के प्रमुख अस्त्रों का अर्थ (AI-Generated Image)

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    धर्म डेस्क, नई दिल्ली। जब भी हम किसी मंदिर में जाते हैं या अपने घरों में देवी-देवताओं की तस्वीरें देखते हैं, तो उनके हाथों में अलग-अलग तरह के अस्त्र-शस्त्र जरूर नजर आते हैं। भगवान शिव के हाथ में त्रिशूल, विष्णु जी की उंगली पर सुदर्शन चक्र, और हनुमान जी व मां दुर्गा के हाथों में भारी-भरकम गदा होती है।

    कभी आपने सोचा है कि हमेशा शांति और प्रेम का संदेश देने वाले हमारे भगवान इन हथियारों को क्यों धारण करते हैं? पहली नजर में यह हिंसक लग सकता है, लेकिन सच तो यह है कि ये अस्त्र विनाश का नहीं, बल्कि हमारे जीवन के लिए एक बहुत बड़ा आध्यात्मिक संदेश देते हैं।

    एस्ट्रोपत्री के ज्योतिषियों के मुताबिक, भगवान के हाथों में सजे ये आयुध बाहरी दुश्मनों को मारने के लिए नहीं, बल्कि इंसान के अंदर बैठे दुश्मनों को खत्म करने का प्रतीक हैं। ये अंदरूनी दुश्मन हैं- अज्ञान, काम, क्रोध, लोभ, और अहंकार। जब तक इंसान के अंदर ये बुराइयां रहेंगी, वह कभी सुखी नहीं रह सकता। भगवान के अस्त्र हमें इन्हीं बुराइयों से लड़ने की प्रेरणा देते हैं।

    आइए इसे कुछ प्रमुख अस्त्रों के जरिए समझते हैं:

    1. भगवान विष्णु का सुदर्शन चक्र:

    सुदर्शन चक्र केवल एक अस्त्र नहीं है, बल्कि यह समय के लगातार चलने वाले पहिए और इंसान के कर्मों के चक्र को दर्शाता है। यह हमें सिखाता है कि समय कभी नहीं रुकता और बुरे कर्मों (अधर्म) का विनाश एक दिन तय है, ताकि समाज में न्याय की स्थापना हो सके।

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    2. भगवान शिव का त्रिशूल:

    भोलेनाथ का त्रिशूल तीन मुख्य चीजों का प्रतीक है- दैहिक (शरीर के), दैविक (प्रकृति या भाग्य के) और भौतिक (संसार के) कष्ट। इसके अलावा यह हमारे अंदर के तीन गुणों- सत्व, रज और तम के बीच सही तालमेल और नियंत्रण रखने का कड़ा संदेश देता है।

    3. मां दुर्गा और हनुमान जी की गदा:

    गदा हमेशा इंसान के आत्मबल, उसकी मानसिक और शारीरिक शक्ति को दर्शाती है। यह सिखाती है कि अगर हम अपनी ताकत को सही दिशा में संजो कर रखें, तो धर्म और अच्छाई की रक्षा आसानी से की जा सकती है।

    जीवन के लिए सीख

    ये आयुध हमें सिखाते हैं कि संसार में शांति और धर्म की स्थापना केवल ज्ञान से ही नहीं, बल्कि उस ज्ञान की रक्षा करने की सामर्थ्य से भी होती है। ईश्वर के हाथों में स्थित अस्त्र मनुष्य को चेतावनी देते हैं कि वह असत्य और अधर्म के मार्ग पर न चले, क्योंकि नियम अंततः सत्य की विजय सुनिश्चित करता है।

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    अस्वीकरण: इस लेख में बताए गए उपाय/लाभ/सलाह और कथन केवल सामान्य सूचना के लिए हैं। दैनिक जागरण यहां इस लेख फीचर में लिखी गई बातों का समर्थन नहीं करता है। इस लेख में निहित जानकारी विभिन्न माध्यमों/ज्योतिषियों/पंचांग/प्रवचनों/मान्यताओं/धर्मग्रंथों/दंतकथाओं से संग्रहित की गई हैं। पाठकों से अनुरोध है कि लेख को अंतिम सत्य अथवा दावा न मानें एवं अपने विवेक का उपयोग करें।