गंधर्व विवाह क्या है? जानिए हिंदू शास्त्रों में 'प्रेम विवाह' के नियम और दिलचस्प बातें
गंधर्व विवाह, जिसे आज 'लव मैरिज' कहते हैं, हिंदू शास्त्रों में वर्णित एक प्राचीन विवाह पद्धति है। चलिए इसके बारे में विस्तार से जानते हैं। ...और पढ़ें

क्या आप जानते हैं गंधर्व विवाह का मतलब? (AI-Generated Image)

समय कम है?
जानिए मुख्य बातें और खबर का सार एक नजर में
धर्म डेस्क, नई दिल्ली। आज के समय में जिसे हम 'लव मैरिज' (Love Marriage) कहते हैं, हिंदू शास्त्रों में उसे 'गंधर्व विवाह' का नाम दिया गया है। यह कोई नया पश्चिमी चलन नहीं है, बल्कि हमारे प्राचीन ग्रंथों में भी इसका बहुत विस्तार से जिक्र मिलता है।
कहां से आया गंधर्व विवाह का कॉन्सेप्ट?
इस विवाह की शुरुआत का जिक्र सबसे पहले 'ऋग्वेद' में मिलता है। ऋग्वेद के दसवें मंडल (सूक्त 85, मंत्र 40 और 41) में गंधर्व का उल्लेख मिलता है। इसमें एक कथा के अनुसार, एक गंधर्व (देवता) ने एक अप्सरा से प्रेम विवाह किया था। इस शादी की सबसे खास बात यह थी कि इसमें कोई भारी-भरकम कर्मकांड या विशेष विधि-विधान नहीं था। यह पूरी तरह से सिर्फ और सिर्फ 'प्रेम' पर टिका था।
नारद स्मृति के श्लोक 12.44 में कहा गया है-
"इच्छादन्योन्यं संयोगः कन्यायाश्च वरस्य च। गान्धर्वः स तु विज्ञेयो मैथुन्यः कामसम्भवः॥"
इसका अर्थ है- जब एक युवक और युवती अपनी पूरी मर्जी और आपसी प्यार से एक-दूसरे को अपना जीवनसाथी मान लेते हैं, तो इसे 'गंधर्व विवाह' कहा जाता है। यह रिश्ता पूरी तरह से उन दोनों के मानसिक और शारीरिक जुड़ाव पर टिका होता है। इस विवाह में माता-पिता या समाज की कोई दखलअंदाजी नहीं होती। यह बिना किसी बाहरी दबाव के, सिर्फ दोनों के सच्चे प्रेम और आपसी आकर्षण पर आधारित होता है।
मनुस्मृति में गंधर्व विवाह का जिक्र
हिंदू धर्म के प्रमुख ग्रंथ 'मनुस्मृति' में कुल 8 तरह के विवाह का वर्णन किया गया है:
- ब्रह्म विवाह
- देव विवाह
- आर्ष विवाह
- प्राजापत्य विवाह
- आसुर विवाह
- गंधर्व विवाह
- राक्षस विवाह
- पैशाच विवाह
आज के समय में इसकी सच्चाई और चुनौतियां
प्राचीन काल में 8 तरह के विवाह होते थे, लेकिन आज के समाज में मुख्य रूप से दो ही विवाह बचे हैं- पहला 'ब्रह्म विवाह' (अरेंज मैरिज, जहां परिवार की पूरी सहमति होती है) और दूसरा 'गंधर्व विवाह' (लव मैरिज, जहां फैसले लड़का-लड़की खुद लेते हैं)। भारतीय परिप्रेक्ष्य में शकुंतला-दुश्यंत, पुरुरवा-उर्वशी, वासवदत्ता-उदयन के विवाह गंधर्व-विवाह के मशहूर उदाहरण हैं।
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हालांकि, गंधर्व विवाह की अपनी कुछ चुनौतियां भी हैं। चूंकि, इसमें परिवार का सपोर्ट अक्सर नहीं होता, इसलिए जब शादी के बाद जिंदगी की असली उलझनों से सामना होता है, तो रिश्ते में दरार पड़ने का डर रहता है। परिवार का मार्गदर्शन न होने के कारण कई बार बात बहुत जल्दी तलाक तक भी पहुंच जाती है।
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