Trending

    विज्ञापन हटाएंसिर्फ खबर पढ़ें

    Gangaur 2026: 20 या 21 मार्च, कब है गणगौर पूजा? जानें तिथि और पूजा विधि

    Updated: Fri, 13 Mar 2026 04:11 PM (IST)

    गणगौर पर्व (Gangaur Puja 2026 Significance) चैत्र माह के शुक्ल पक्ष की तृतीया को मुख्य रूप से राजस्थान और उत्तर भारत में मनाया जाता है। ...और पढ़ें

    Gangaur 2026: गणगौर पूजा का महत्व। (Ai Generated Image)

    Gangaur 2026: गणगौर पूजा का महत्व। (Ai Generated Image)

    HighLights

    1. गणगौर का पर्व बेहद शुभ माना जाता है

    2. यह पर्व शिव और शक्ति के अटूट प्रेम का प्रतिक है

    3. यह पूजा महिलाओं के लिए किसी महापर्व से कम नहीं है

    धर्म डेस्क, नई दिल्ली। चैत्र महीने के शुक्ल पक्ष की तृतीया तिथि को मनाया जाने वाला गणगौर का पर्व मुख्य रूप से राजस्थान, मध्य प्रदेश और उत्तर भारत के कई हिस्सों में बड़े भक्ति भाव के साथ मनाया जाता है। यह पर्व (Gangaur 2026) विवाहित महिलाओं के लिए अखंड सौभाग्य और कुंवारी कन्याओं के लिए मनचाहे वर की प्राप्ति का प्रतीक है। इस साल गणगौर व्रत कब मनाया जाएगा? आइए यहां इसकी सही तिथि जानते हैं, जो इस प्रकार हैं -

    Mahashivratri 2026 upay 1

    Ai Generated Image

    गणगौर पूजा शुभ मुहूर्त (Gangaur Puja 2026 Date And Time)

    हिंदू पंचांग के अनुसार, इस साल चैत्र महीने के शुक्ल पक्ष की तृतीया तिथि 21 मार्च 2026 को सुबह 02 बजकर 30 मिनट पर शुरू होगी। वहीं, इसका समापन इसी दिन रात में 11 बजकर 56 मिनट पर हो जाएगा। पंचांग को देखते हुए 21 मार्च दिन शनिवार को गणगौर व्रत किया जाएगा।

    गणगौर का महत्व (Gangaur Puja 2026 Significance)

    गण का मतलब है भगवान शिव और गौर का मतलब है माता पार्वती। यह पर्व शिव और शक्ति के अटूट प्रेम और समर्पण का प्रतिक है। ऐसी मान्यता है कि माता पार्वती ने कड़ी तपस्या के बाद भगवान शिव को पति के रूप में प्राप्त किया था। चैत्र नवरात्र के तीसरे दिन आने वाली यह पूजा महिलाओं के लिए किसी महापर्व से कम नहीं होती है।

    पूजा विधि (Gangaur Puja Vidhi)

    • लकड़ी की एक चौकी पर लाल कपड़ा बिछाएं और उस पर शिव-पार्वती की मिट्टी की बनी प्रतिमाएं स्थापित करें।
    • माता पार्वती को सोलह शृंगार की वस्तुएं जैसे मेहंदी, चूड़ियां, सिंदूर और बिंदी अर्पित करें। भगवान शिव को पीले वस्त्र और अक्षत चढ़ाएं।
    • नवरात्र के समय बोए गए जवारे इस पूजा में विशेष रूप से उपयोग किए जाते हैं। माता को फल, मिठाई और घेवर का भोग लगाएं।
    • पूजा के दौरान गणगौर व्रत की पौराणिक कथा सुनें या पढ़ें।
    • अंतिम दिन शाम के समय महिलाएं गाते-बजाते हुए किसी पवित्र नदी पर जाकर प्रतिमा का विसर्जन करती हैं।

    खबरें और भी

    यह भी पढ़ें- 19 मार्च से चैत्र नवरात्र शुरू, माता का डोली पर आगमन, 27 मार्च को हवन और कुमारी पूजन

    अस्वीकरण: इस लेख में बताए गए उपाय/लाभ/सलाह और कथन केवल सामान्य सूचना के लिए हैं। दैनिक जागरण तथा जागरण न्यू मीडिया यहां इस लेख फीचर में लिखी गई बातों का समर्थन नहीं करता है। इस लेख में निहित जानकारी विभिन्न माध्यमों/ज्योतिषियों/पंचांग/प्रवचनों/मान्यताओं/धर्मग्रंथों/दंतकथाओं से संग्रहित की गई हैं। पाठकों से अनुरोध है कि लेख को अंतिम सत्य अथवा दावा न मानें एवं अपने विवेक का उपयोग करें। दैनिक जागरण तथा जागरण न्यू मीडिया अंधविश्वास के खिलाफ है।