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बड़े-बुजुर्ग क्यों करते हैं महिलाओं को श्मशान जाने से मना? गरुड़ पुराण में बताई गई है असली वजह

Published: Thu, 07 May 2026 10:32 AM (IST)

हिंदू धर्म में किसी की मृत्यु हो जाने पर उस व्यक्ति से संबंधित महिलाओं को श्मशान घाट जाने की अनुमति नहीं होती। इसका रहस्य गरुड़ पुराण में छिपा है।

गरुड़ पुराण का खुलासा (Picture Credit- AI Generated)

गरुड़ पुराण का खुलासा (Picture Credit- AI Generated)

HighLights

  1. महिलाओं का माना जाता है भावुक स्वभाव

  2. रोने से पड़ सकती है मृत आत्मा की शांति में बाधा

  3. शमशान घाट में रहता है नकारात्मक ऊर्जा के प्रभाव

धर्म डेस्क, नई दिल्ली। 'गरुड़ पुराण' मोक्ष का मार्ग तो दिखाता ही है, साथ ही हमारे दैनिक जीवन और परंपराओं के पीछे छिपे गूढ़ तर्कों को भी स्पष्ट करता है। अक्सर यह सवाल आपके मन में आता होगा कि महिलाओं को श्मशान घाट जाने से क्यों रोका जाता है? गरुड़ पुराण और हिंदू मान्यताओं के अनुसार, इसके पीछे केवल परंपरा नहीं, बल्कि मनोवैज्ञानिक, आध्यात्मिक और सुरक्षात्मक कारण छिपे हैं। चलिए जानते हैं इस बारे में।

क्या कहता है गरुड़ पुराण

शास्त्रीय और मनोवैज्ञानिक दृष्टिकोण से, महिलाओं को पुरुषों की तुलना में अधिक कोमल हृदय और भावुक माना जाता है। श्मशान का भयानक दृश्य, विलाप और मृत शरीर को जलते देखना किसी भी संवेदनशील व्यक्ति को मानसिक रूप से विचलित कर सकता है। गरुड़ पुराण के अनुसार, महिलाओं की यह संवेदनशीलता उन्हें गहरे सदमे में डाल सकती है।

लेकिन साथ ही गरुड़ पुराण के प्रेत खंड के अध्याय 8 में इस बात का भी वर्णन किया गया है कि, अगर परिवार में कोई पुरुष सदस्य न हो, तो घर की महिलाएं जैसे पत्नी, बेटी या बहन अंतिम संस्कार कर सकती हैं। गरुड़ पुराण में दिए गए ये तर्क मानसिक स्वास्थ्य और ऊर्जा संतुलन पर आधारित हैं। इन परंपराओं का मूल उद्देश्य परिवार के सदस्यों, खासकर महिलाओं को भावनात्मक और आध्यात्मिक चोट से बचाना है।

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मृत आत्मा की शांति में बाधा

एक प्रचलित आध्यात्मिक मान्यता यह है कि अंतिम संस्कार के समय रोना या विलाप करना मृत आत्मा के लिए कष्टकारी होता है। यदि श्मशान में कोई बहुत अधिक रोता है, तो आत्मा का सांसारिक मोह नहीं छूटता और उसे परलोक की यात्रा शुरू करने में बाधा महसूस होती है। चूंकि महिलाएं अक्सर भावनाओं को रोक नहीं पातीं, इसलिए भी उन्हें श्मशान से दूर रखा जाता है।

पड़ सकता है नकारात्मक ऊर्जा का प्रभाव

हिंदू धर्म में श्मशान घाट को नकारात्मक ऊर्जा और भटकती आत्माओं का केंद्र माना जाता है। वहीं महिलाओं की ऊर्जा प्रणाली को अधिक ग्रहणशील माना गया है। ऐसे में महिलाओं के श्मशान घाट जाने पर यह डर बना रहता है कि नकारात्मक शक्तियां महिलाओं पर आसानी से अपना प्रभाव डाल सकती हैं, जिससे उनके स्वास्थ्य और मानसिक स्थिति पर बुरा असर पड़ सकता है।

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(Picture Credit- AI Generated)

मुंडन संस्कार की परंपरा

हिंदू धर्म के अनुसार, श्मशान से लौटने के बाद परिवार के पुरुषों को मुंडन (बाल कटवाना) कराना अनिवार्य होता है, जो शुद्धिकरण का एक जरूरी हिस्सा है। वहीं भारतीय संस्कृति में महिलाओं के लिए बाल कटवाना वर्जित या अमंगल माना गया है, इसलिए इस नियम के पालन के लिए भी महिलाओं को श्मशान जाने से दूर रखा जाता है।

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अस्वीकरण: इस लेख में बताए गए उपाय/लाभ/सलाह और कथन केवल सामान्य सूचना के लिए हैं। दैनिक जागरण यहां इस लेख फीचर में लिखी गई बातों का समर्थन नहीं करता है। इस लेख में निहित जानकारी विभिन्न माध्यमों/ज्योतिषियों/पंचांग/प्रवचनों/मान्यताओं/धर्मग्रंथों/दंतकथाओं से संग्रहित की गई हैं। पाठकों से अनुरोध है कि लेख को अंतिम सत्य अथवा दावा न मानें एवं अपने विवेक का उपयोग करें। दैनिक जागरण अंधविश्वास के खिलाफ है।

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