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मृत्यु के बाद घर में क्यों नहीं जलाया जाता चूल्हा? गरुड़ पुराण में लिखे हैं 'सूतक' के नियम

Published: Fri, 10 Apr 2026 04:00 PM (IST)

हिंदू धर्म में मृत्यु के बाद 'सूतक' के दौरान घर में चूल्हा न जलाने की परंपरा सदियों पुरानी है। गरुड़ ...और पढ़ें

पढ़ें गरुड़ पुराण के नियम (Image Source: AI-Generated)

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संक्षेप में पढ़ें

धर्म डेस्क, नई दिल्ली। मृत्यु एक ऐसा सत्य है जिसे टाला नहीं जा सकता, लेकिन हिंदू धर्म में मृत्यु के बाद की परंपराएं बहुत गहरी और अर्थपूर्ण हैं। अक्सर आपने देखा होगा कि जब किसी घर में किसी सदस्य का निधन हो जाता है, तो उस घर में कई दिनों तक चूल्हा नहीं जलाया जाता। आखिर ऐसा क्यों होता है? क्या यह सिर्फ एक पुरानी रीत है या इसके पीछे कोई ठोस कारण है?

गरुड़ पुराण और सूतक के नियम

इस परंपरा का सबसे बड़ा आधार गरुड़ पुराण है। गरुड़ पुराण में मृत्यु और उसके बाद की स्थितियों का विस्तार से वर्णन मिलता है। मृत्यु के बाद परिवार में 'सूतक' लग जाता है। सूतक का अर्थ है वह समय जब परिवार को धार्मिक दृष्टि से 'अशुद्ध' माना जाता है।

इस दौरान घर में पूजा-पाठ या रसोई का काम करना बंद होता है। किसी भी इंसान की मृत्यु के बाद 3 से 13 दिनों तक सूतक काल का समय माना जाता है। इस दौरान घर में कई तरह के नियमों का पालन करते हैं। इसमें एक नियम चूल्हा न जलाना भी है।

जब घर का कोई अपना चला जाता है, तो पूरा परिवार गहरे शोक और सदमे में होता है। ऐसे दुख के समय में किसी का मन खाना बनाने या घर के रोजमर्रा के काम करने में नहीं लगता। समाज और पड़ोसियों द्वारा भोजन भेजने की रीत इसलिए बनाई गई थी ताकि दुखी परिवार को अकेलापन महसूस न हो और उन्हें इस मुश्किल घड़ी में सहारा मिल सके।

Garuda purana

(Image Source: AI-Generated)

अग्नि का सम्मान

एक और मान्यता यह भी है कि घर की रसोई की अग्नि को 'लक्ष्मी' का रूप माना जाता है। जब घर में शोक की अग्नि (चित्ता की अग्नि) जलाई गई होती है, तो उस समय मंगल कार्य या तृप्ति के लिए रसोई की अग्नि जलाना उचित नहीं माना जाता। यह एक तरह से जाने वाले के प्रति सम्मान व्यक्त करने का एक तरीका है।

साफ-सफाई और शुद्धि

  • शव के पास कई तरह के बैक्टीरिया और कीटाणु पनपने का खतरा रहता है, जो स्वास्थ्य के लिए हानिकारक हो सकते हैं।
  • संक्रमण से बचाव के लिए शव के घर में रहते हुए रसोई में खाना बनाना असुरक्षित माना जाता था।
  • जब तक अंतिम संस्कार के बाद घर की पूरी तरह सफाई नहीं हो जाती, तब तक चूल्हा जलाना टाल दिया जाता है।
  • घर की शुद्धि के लिए साफ-सफाई और गंगाजल का छिड़काव अनिवार्य माना गया है।
  • यह नियम धार्मिक आस्था के साथ-साथ हाइजीन (स्वच्छता) के महत्व को भी दर्शाता है।

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अस्वीकरण: इस लेख में बताए गए उपाय/लाभ/सलाह और कथन केवल सामान्य सूचना के लिए हैं। दैनिक जागरण यहां इस लेख फीचर में लिखी गई बातों का समर्थन नहीं करता है। इस लेख में निहित जानकारी विभिन्न माध्यमों/ज्योतिषियों/पंचांग/प्रवचनों/मान्यताओं/धर्मग्रंथों/दंतकथाओं से संग्रहित की गई हैं। पाठकों से अनुरोध है कि लेख को अंतिम सत्य अथवा दावा न मानें एवं अपने विवेक का उपयोग करें।

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