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मृत्यु के बाद क्यों जरूरी है अस्थि विसर्जन? पढ़ें गरुड़ पुराण का ये रहस्य

Published: Mon, 20 Apr 2026 03:30 PM (IST)

गरुड़ पुराण के अनुसार, मृत्यु के बाद अस्थि विसर्जन का विशेष महत्व है। मानव शरीर पंच तत्वों से बना है, ...और पढ़ें

अस्थि विसर्जन का महत्व (Image Source: AI-Generated)

अस्थि विसर्जन का महत्व (Image Source: AI-Generated) 

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संक्षेप में पढ़ें

धर्म डेस्क, नई दिल्ली। गरुड़ पुराण में मृत्यु के बाद नई यात्रा की शुरुआत के बारे में वर्णन किया गया है। व्यक्ति के अंतिम संस्कार के बाद उसकी अस्थियों को पवित्र नदी में प्रवाहित किया जाता है। गरुड़ पुराण में अस्थि विसर्जन का बेहद खास महत्व है। अब आपके मन में ये सवाल आ रहा होगा की कि आखिर क्यों किया जाता है अस्थि विसर्जन। अगर नहीं पता, तो आइए जानते हैं गरुड़ पुराण में वर्णित इसकी वजह के बारे में।

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(Image Source: AI-Generated) 

इसलिए किया जाता है अस्थि विसर्जन

मानव शरीर पांच तत्व (जल, वायु, अग्नि, पृथ्वी और आकाश) से मिलाकर बना हुआ है। अंतिम संस्कार के बाद व्यक्ति का शरीर अग्नि, वायु और आकाश तत्व में मिल जाता है और जो राख और अस्थियां बच जाती हैं। वे पृथ्वी का प्रतीक होती हैं। ऐसे में अस्थियों को जल में बहा देने से व्यक्ति का शरीर पांच तत्वों में विलीन हो जाता है। इसलिए अंतिम संस्कार के बाद अस्थि विसर्जन करने का विधान है।

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मोक्ष की प्राप्ति और पापों से छुटकारा

धार्मिक मान्यता के अनुसार, अस्थियों को किसी पवित्र नदी में विसर्जित करने से मृतक की व्यक्ति की आत्मा को शांति मिलती है। साथ ही मोक्ष की प्राप्ति होती है। अस्थियों को पवित्र नदी में इसलिए विसर्जित किया जाता है, क्योंकि पवित्र नदियों का जल जीवनदायिनी और मोक्षदायिनी कहा जाता है। इससे मृतक की आत्मा को आत्मा को स्वर्ग में जगह मिलती है और मोक्ष की प्राप्त होती है।

मोह-माया से छुटकारा

ऐसा माना जाता है कि मृत्यु के बाद मृतक का परिवार वालों से मोह बना रहता है। जब तक अस्थियां घर या श्मशान में मौजूद रहती हैं, तो उसे अगले सफर को करने में कठिनाई होती है। ऐसे में पवित्र नदी में अस्थि विसर्जन करने से मृतक की आत्मा का भौतिक संपर्क भी टूट जाता है।

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अस्वीकरण: इस लेख में बताए गए उपाय/लाभ/सलाह और कथन केवल सामान्य सूचना के लिए हैं। दैनिक जागरण यहां इस लेख फीचर में लिखी गई बातों का समर्थन नहीं करता है। इस लेख में निहित जानकारी विभिन्न माध्यमों/ज्योतिषियों/पंचांग/प्रवचनों/मान्यताओं/धर्मग्रंथों/दंतकथाओं से संग्रहित की गई हैं। पाठकों से अनुरोध है कि लेख को अंतिम सत्य अथवा दावा न मानें एवं अपने विवेक का उपयोग करें।

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