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    Gudi Padwa 2026: गुड़ी पड़वा के ये अनोखे संयोग बना देंगे आपके बिगड़े काम, मां भवानी की कृपा से चमकेगा करियर और व्यापार

    Updated: Wed, 25 Feb 2026 01:30 PM (GMT+05:30)

    सनातन धर्म में चैत्र माह का विशेष महत्व है, जिसमें चैत्र नवरात्र और गुड़ी पड़वा मनाए जाते हैं। यह महीना देवी दुर्गा और उनके नौ रूपों की पूजा को समर्पि ...और पढ़ें

    Gudi Padwa 2026: गुड़ी पड़वा का धार्मिक महत्व

    Gudi Padwa 2026: गुड़ी पड़वा का धार्मिक महत्व


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    संक्षेप में पढ़ें

    धर्म डेस्क, नई दिल्ली। सनातन धर्म में चैत्र महीने का खास महत्व है। यह महीना देवी मां पार्वती को समर्पित होता है। इस महीने में चैत्र नवरात्र का त्योहार धूमधाम से मनाया जाता है। यह पर्व चैत्र माह के शुक्ल पक्ष की प्रतिपदा तिथि से लेकर नवमी तिथि तक मनाया जाता है। इस दौरान देवी मां दुर्गा और उनके नौ रूपों की पूजा की जाती है। साथ ही मनचाही मुराद पाने के लिए व्रत रखा जाता है। चैत्र नवरात्र के पहले दिन गुड़ी पड़वा मनाया जाता है।

    ज्योतिषियों की मानें तो गुड़ी पड़वा के शुभ अवसर पर ब्रह्म और शुक्ल (Chaitra Navratri Career Success) समेत कई अद्भुत संयोग बन रहे हैं। इन योग में देवी मां दुर्गा की पूजा करने से साधक की हर एक मनोकामना पूरी होगी। साथ ही सुख और सौभाग्य में वृद्धि होगी। आइए, शुभ मुहूर्त और संयोग के बारे में जानते हैं।

    गुड़ी पड़वा शुभ मुहूर्त (Gudi Padwa 2026 Date Shubh Muhurat)

    चैत्र माह के शुक्ल पक्ष की प्रतिपदा तिथि (Chaitra Shukla Pratipada) 19 मार्च को सुबह 06 बजकर 52 मिनट पर शुरू होगी और 20 मार्च को सुबह 04 बजकर 52 मिनट पर प्रतिपदा तिथि की समाप्त होगी। उदया तिथि गणना अनुसार 19 मार्च को गुड़ी पड़वा मनाया जाएगा। इस दिन से चैत्र नवरात्र की शुरुआत होगी।

    शुक्ल योग (Shukla Yoga 2026)

    गुड़ी पड़वा के दिन शुक्ल योग का दुर्लभ संयोग (Gudi Padwa Business Muhurat) है। इस योग का संयोग दिन भर है। वहीं, शुक्ल योग का समापन 20 मार्च को देर रात 01 बजकर 17 मिनट पर होगा। इसके बाद ब्रह्म योग का संयोग बनेगा। ज्योतिष शुक्ल योग को शुभ मानते हैं। इस योग में देवी मां दुर्गा की पूजा करने से साधक के सकल मनोरथ सिद्ध होंगे। साथ ही जीवन में व्याप्त सभी प्रकार के संकटों से मुक्ति मिलेगी।

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    नक्षत्र और करण

    चैत्र माह के शुक्ल पक्ष की प्रतिपदा तिथि पर उत्तर भाद्रपद नक्षत्र का संयोग बन रहा है। उत्तर भाद्रपद नक्षत्र का संयोग 20 मार्च को सुबह 04 बजकर 05 मिनट तक है। इस योग में देवी मां दुर्गा की पूजा करने से हर एक मनोकामना पूरी होगी।

    पंचांग

    • सूर्योदय - सुबह 06 बजकर 26 मिनट पर
    • सूर्यास्त - शाम 06 बजकर 32 मिनट पर
    • चंद्रास्त- शाम 06 बजकर 59 मिनट पर
    • ब्रह्म मुहूर्त - सुबह 04 बजकर 51 मिनट से 05 बजकर 39 मिनट तक
    • विजय मुहूर्त - दोपहर 02 बजकर 30 मिनट से 03 बजकर 18 मिनट तक
    • गोधूलि मुहूर्त - शाम 06 बजकर 29 मिनट से लेकर शाम 06 बजकर 53 मिनट तक
    • निशिता मुहूर्त - रात्रि 12 बजकर 05 मिनट से लेकर 12 बजकर 52 मिनट तक

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    अस्वीकरण: इस लेख में बताए गए उपाय/लाभ/सलाह और कथन केवल सामान्य सूचना के लिए हैं। दैनिक जागरण तथा जागरण न्यू मीडिया यहां इस लेख फीचर में लिखी गई बातों का समर्थन नहीं करता है। इस लेख में निहित जानकारी विभिन्न माध्यमों/ज्योतिषियों/पंचांग/प्रवचनों/मान्यताओं/धर्मग्रंथों/दंतकथाओं से संग्रहित की गई हैं। पाठकों से अनुरोध है कि लेख को अंतिम सत्य अथवा दावा न मानें एवं अपने विवेक का उपयोग करें। दैनिक जागरण तथा जागरण न्यू मीडिया अंधविश्वास के खिलाफ है।