जॉब में बार-बार आ रही है रुकावट? कुंडली में हो सकता है गुरु चांडाल योग, इन लक्षणों से तुरंत पहचानें
ज्योतिष शास्त्र के अनुसार, कुंडली में गुरु और राहु के एक ही भाव में आने से गुरु चांडाल योग बनता है, जो जीवन में कई नकारात्मक प्रभाव डालता है। ...और पढ़ें
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गुरु चांडाल योग का पड़ता है नकारात्मक प्रभाव (Picture Credit- AI Generated)

समय कम है?
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धर्म डेस्क, नई दिल्ली। ज्योतिष शास्त्र के अनुसार, व्यक्ति की कुंडली में कई तरह के योग का निर्माण होता है, जिसका प्रभाव समय-समय पर उसके जीवन पर सकारात्मक और नकारात्मक पड़ता है। ऐसे में व्यक्ति को प्रभाव से बचने के लिए विशेष उपाय करने की सलाह दी जाती है।
इन्हीं में से एक गुरु चांडाल योग है। इस योग का नाम सुनते ही लोग डरने लगते हैं, क्योंकि इस योग को अशुभ माना जाता है और कुंडली में गुरु चांडाल योग का निर्माण होने से व्यक्ति के जीवन पर नकारात्मक प्रभाव पड़ता है, लेकिन क्या आप जानते हैं कि आखिर ये योग कब बनता है और इसके नकारात्मक प्रभाव कौन से होते हैं। अगर नहीं पता, तो ऐसे में आइए इस आर्टिकल में आपको बताते हैं इसके बारे में विस्तार से।

(Picture Credit- AI Generated)
कुंडली में कब बनता है गुरु चांडाल योग?
ज्योतिष शास्त्र में गुरु चांडाल योग को अशुभ बताया गया है। जब किसी व्यक्ति की कुंडली में एक ही भाव में गुरु और राहु आ जाते हैं, तो गुरु और राहु की युति से गुरु चांडाल योग का निर्माण होता है। इस योग के बनने पर व्यक्ति पर नकारात्मक प्रभाव पड़ता है। इस अशुभ प्रभाव से बचने के लिए विशेष उपाय करने की सलाह दी जाती है।
कौन से हैं गुरु चांडाल योग के नकारात्मक प्रभाव
ज्योतिष शास्त्र के अनुसार, गुरु चांडाल योग के बनने से व्यक्ति को जीवन में भूमि और भवन का सुख प्राप्त नहीं होता है और जीवन में कई तरह की समस्याओं का सामना करना पड़ सकता है। समाज में मान-सम्मान की कमी होती है।
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अगर महिलाओं की कुंडली में गुरु चांडाल योग बनता है, तो वैवाहिक जीवन में खुशियों का आगमन नहीं होता और भारी कलह की परेशानी जीवन में आती है। इसके अलावा लोगों को जॉब में भी समस्याएं आ सकती हैं। अगर आप भी इस तरह की परेशानी का सामना कर रहे हैं, तो नीचे दिए गए उपाय जरूर करें या फिर किसी ज्योतिष विद्वान की सलाह लें।
कैसे दूर करें नकारात्मक प्रभाव
- गुरु चांडाल योग के नकारात्मक प्रभाव को दूर करने के लिए पीला पुखराज धारण करें।
- इसके अलावा रोजाना सुबह स्नान करने के बाद सूर्य देव को अर्घ्य दें और पूजा-अर्चना करें।
- गुरु चांडाल योग के दोष से बचने के लिए भगवान शिव की पूजा-अर्चना करने का अधिक महत्व है।
- माता-पिता व गुरु की सेवा करें और उनका आशीर्वाद प्राप्त करें।
- रोजाना सात्विक भोजन करें। तामसिक भोजन से बचें। ऐसा माना जाता है कि तामसिक भोजन से राहु की नकारात्मक ऊर्जा में वृद्धि होती है।
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अस्वीकरण: इस लेख में बताए गए उपाय/लाभ/सलाह और कथन केवल सामान्य सूचना के लिए हैं। दैनिक जागरण यहां इस लेख फीचर में लिखी गई बातों का समर्थन नहीं करता है। इस लेख में निहित जानकारी विभिन्न माध्यमों/ज्योतिषियों/पंचांग/प्रवचनों/मान्यताओं/धर्मग्रंथों/दंतकथाओं से संग्रहित की गई हैं। पाठकों से अनुरोध है कि लेख को अंतिम सत्य अथवा दावा न मानें एवं अपने विवेक का उपयोग करें।