हरियाली तीज पर मायके से क्यों आता है सिंधारा? इसके पीछे की परंपरा और महत्व के बारे में पढ़ें
हरियाली तीज पर मायके से सिंधारा भेजने की परंपरा सदियों पुरानी है, जो विवाहित बेटी के लिए सौभाग्य का प्रतीक है। इसमें कपड़े, मिठाइयां और सुहाग का सामान ...और पढ़ें

हरियाली तीज पर सिंधारे की रस्म: जानें मायके से आने वाले इस उपहार का महत्व (Picture Credit: AI Generated)
HighLights
हरियाली तीज उत्तर भारत का एक महत्वपूर्ण पर्व है।
सिंधारा मायके से बेटी के लिए सौभाग्य का प्रतीक है।
इसमें सोलह श्रृंगार और मिठाइयां भेजी जाती हैं।
धर्म डेस्क, नई दिल्ली। हरियाली तीज का पर्व किसी भी महिला के लिए बहुत खास माना जाता है। यह मुख्य रूप से उत्तर भारत का पर्व है और राजस्थान, झारखंड, उत्तर प्रदेश, पंजाब, दिल्ली, चंडीगढ़, बिहार और मध्य प्रदेश राज्यों में धूमधाम से मनाया जाता है।
हर साल यह पर्व श्रावण महीने के शुक्ल पक्ष के तीसरे दिन मनाया जाता है। इसी वजह से इसे 'सावन तीज' के नाम से भी जाना जाता है। विवाहित महिलाओं के लिए इस त्योहार का महत्व बहुत ज्यादा है क्योंकि इस दिन विवाहित महिलाएं पति की दीर्घायु की कामना में व्रत और उपवास करती हैं और माता पार्वती की पूजा विधि-विधान के साथ करती हैं।
इस दौरान निभाई जाने वाली एक रस्म होती है सिंधारे की रस्म जो मायके वाले बेटी के ससुराल में भेजते हैं। आइए आपको बताते हैं आखिर क्यों हमेशा सिंधारा या सिंजारा दुल्हन के मायके से आता है और इसका महत्व क्या होता है?
हरियाली तीज का पर्व क्यों है खास
हरियाली तीज का पर्व हर महिला के लिए बेहद खास माना जाता है चाहे वह शादीशुदा हो या फिर कुंवारी हो। जहां एक तरफ सुहागिन महिलाएं पति की दीर्घायु की कामना में यह व्रत करती हैं, वहीं कुंवारी लड़कियां अच्छे जीवनसाथी की चाह में यह व्रत करती हैं।
खबरें और भी
इस दिन भगवान शिव और माता पार्वती की पूजा करने की मान्यता तो है ही और हरियाली तीज के दिन नव विवाहित महिलाओं के लिए 16 श्रृंगार करना जरूरी माना जाता है। हरियाली तीज से जुड़ी एक ऐसी परंपरा भी है जो कि आज भी सदियों से कायम है। वो परंपरा है मायके से सिंधारा भेजने की।
हरियाली तीज पर मायके से क्यों आता है सिंधारा?
सदियों से हिंदू धर्म में हर शादीशुदा बेटियों के घर मायके से सिंधारा भेजने की परंपरा चली आ रही है। इसमें मायके से सिधारे में कपड़े मिठाइयां और सुहाग का सामान भेजा जाता है और इसमें आने वाली मिठाइयों को ससुराल में करीबी रिश्तेदारों को दिया जाता है।
सिंधारा में आने वाली चीजों को सुहागिन महिलाओं को दिया जाता है और दुल्हन के लिए इसे सौभाग्य का प्रतीक माना जाता है। वैसे तो शादीशुदा महिलाएं अपने सभी पर्व ससुराल में मनाती हैं, लेकिन हरियाली तीज पर शादीशुदा बेटियां मायके आती हैं।
सिंधारा को माना जाता है विशेष उपहार
हरियाली तीज हर साल सावन महीने के शुक्ल पक्ष की तृतीया तिथि को मनाई जाती है और यह पर्व पूर्ण रूप से शिव जी और माता पार्वती की पूजा के लिए शुभ माना जाता है। सिंधारा को मायके की तरफ से आने वाला एक ऐसा उपहार माना जाता है जिसमें शादीशुदा बेटी के लिए सौभाग्य का आशीर्वाद छिपा रहता है।
इसमें बेटी को सोलह श्रृंगार उपहार में दिए जाते हैं और ये मायके वालों की तरफ से बेटी के सौभाग्य के आशीर्वाद का प्रतीक माना जाता है। शादीशुदा बेटी को को श्रृंगार की सामग्री के साथ सिंधारा देना एक पुण्य कर्म माना जाता है जो मायके और ससुराल दोनों की समृद्धि के लिए जरूरी होता है।
हरियाली तीज पर मायके में सिंधारा भेजने की परंपरा अत्यंत महत्वपूर्ण है और इससे वैवाहिक जीवन में खुशहाली का आशीर्वाद मिलता है।
यह भी पढ़ें- हरियाली तीज पर माता पार्वती को जरूर चढ़ाएं सुहाग की ये 16 चीजें, वैवाहिक जीवन में बनी रहेगी खुशहाली
यह भी पढ़ें- हरियाली तीज 2026 कब है? अखंड सौभाग्य पाने के लिए महिलाएं सही तिथि सहित नोट करें पूजा का शुभ मुहूर्त
अस्वीकरण: इस लेख में बताए गए उपाय/लाभ/सलाह और कथन केवल सामान्य सूचना के लिए हैं। दैनिक जागरण यहां इस लेख फीचर में लिखी गई बातों का समर्थन नहीं करता है। इस लेख में निहित जानकारी विभिन्न माध्यमों/ज्योतिषियों/पंचांग/प्रवचनों/मान्यताओं/धर्मग्रंथों/दंतकथाओं से संग्रहित की गई हैं। पाठकों से अनुरोध है कि लेख को अंतिम सत्य अथवा दावा न मानें एवं अपने विवेक का उपयोग करें। दैनिक जागरण अंधविश्वास के खिलाफ है।