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    हरियाली तीज पर पेड़ों की पूजा क्यों मानी जाती है शुभ? पढ़ें वृक्षों में मौजूद देव ऊर्जा का धार्मिक महत्व

    Updated: Sun, 09 Aug 2026 07:40 PM (IST)

    हरियाली तीज प्रकृति, भगवान शिव और माता पार्वती की आराधना का प्रमुख पर्व है, जिसमें सुहागिन महिलाएं पति की दीर्घायु के लिए व्रत रखती हैं। इस दिन बरगद, ...और पढ़ें

    हरियाली तीज पर वृक्षों की पूजा का धार्मिक महत्व (Picture Credit: AI Generated)

    हरियाली तीज पर वृक्षों की पूजा का धार्मिक महत्व (Picture Credit: AI Generated)

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    संक्षेप में पढ़ें

    धर्म डेस्क, नई दिल्ली। हिंदू धर्म में सावन के मुख्य पर्वों में से एक हरियाली तीज को माना जाता है। यह मुख्य रूप से प्राकृति और भगवान शिव के साथ माता पार्वती की आराधना का प्रतीक है। इस दौरान बारिश की बूंदों के बीच मौसम में हरियाली छाई रहती है और प्रकृति भी शिव भक्ति में लीन दिखाई देती है।

    मुख्य रूप से हरियाली तीज का पर्व सुहागिन महिलाओं के लिए बहुत खास होता है। इस दिन सुहागिन महिलाएं पति की दीर्घायु और सुखी वैवाहिक जीवन की कामना से व्रत रखती हैं और भगवान शिव तथा माता पार्वती की पूजा करती हैं।

    यही नहीं इस दिन की मुख्य परंपराओं में से एक झूला झुलाना और पेड़ों को पूजा करना भी है। आइए आपको बताते हैं इस शुभ अवसर पर कुछ पवित्र पेड़ों की पूजा क्यों की जाती है और इनका क्या महत्व होता है।

    हरियाली तीज पर पेड़ों की पूजा शुभ क्यों होती है?

    हिंदू धर्म में कुछ वृक्षों को अत्यंत पवित्र माना जाता है और कुछ विशेष अवसरों में इनकी पूजा भी की जाती है। पेड़ों को केवल प्रकृति का हिस्सा नहीं, बल्कि जीवन और ऊर्जा का प्रतीक भी माना गया है।

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    यही नहीं कुछ वृक्षों जैसे बरगद, पीपल, तुलसी, बेल, शमी आदि में ईश्वर का वास माना जाता है और इनकी पूजा हरियाली तीज के दिन करने से ईश्वरीय आशीर्वाद मिलता है।

    हरियाली तीज सावन महीने में आती है, जब बारिश के कारण चारों ओर हरियाली छा जाती है। ऐसे में पेड़ों की पूजा प्रकृति के प्रति सम्मान का संदेश भी देती है। धार्मिक दृष्टि से ऐसा कहा जाता है कि पेड़ों की पूजा करने से सभी नकारात्मक ऊर्जाएं दूर होती हैं और हमारे आस-पास सकारात्मक ऊर्जा का प्रवेश हो जाता है।

    किन पेड़ों में होता है ईश्वर का वास

    हिंदू धर्म में ऐसा कहा जाता है कि कई वृक्षों को विशेष रूप से पीपल में ब्रह्म देव, बरगद में भगवान शिव, तुलसी में माता लक्ष्मी, शमी में शनिदेव और बेल में शिव जी का वास होता है। इन वृक्षों की पूजा हरियाली तीज के दिन करने से सभी देवताओं का आशीर्वाद एक साथ मिलता है और जीवन में इनका आशीर्वाद बना रहता है।

    बरगद को दीर्घायु का प्रतीक भी माना जाता है, इसलिए हरियाली तीज के दिन महिलाएं पति की दीर्घायु की कामना में इस वृक्ष की पूजा करती हैं। चूंकि सावन का पूरा महीना भगवान शिव को समर्पित है, इसलिए इस दिन बेल के पेड़ की पूजा करने और शिवलिंग पर बेलपत्र चढ़ाने से सभी दुखों का नाश होता है और जीवन में खुशहाली बनी रहती है।

    हरियाली तीज का शिव-पार्वती से संबंध

    हरियाली तीज भगवान शिव और माता पार्वती के पुनर्मिलन से जुड़ा पर्व है। सावन का महीना स्वयं भगवान शिव की भक्ति के लिए विशेष माना जाता है। बारिश के कारण प्रकृति में नई ऊर्जा और हरियाली आती है।

    इसी वजह से हरियाली तीज पर प्रकृति की पूजा के सभी भगवान शिव और माता पार्वती की पूजा भी की जाती है। ऐसी मान्यता है कि इसी दिन भगवान शिव ने माता पार्वती को वामांगी के रूप में स्वीकार किया था।

    हरियाली तीज पर पेड़ों की पूजा से न सिर्फ प्रकृति का आशीर्वाद मिलता है बल्कि सभी देवी-देवताओं का आशीर्वाद भी बना रहता है।

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    अस्वीकरण: इस लेख में बताए गए उपाय/लाभ/सलाह और कथन केवल सामान्य सूचना के लिए हैं। दैनिक जागरण यहां इस लेख फीचर में लिखी गई बातों का समर्थन नहीं करता है। इस लेख में निहित जानकारी विभिन्न माध्यमों/ज्योतिषियों/पंचांग/प्रवचनों/मान्यताओं/धर्मग्रंथों/दंतकथाओं से संग्रहित की गई हैं। पाठकों से अनुरोध है कि लेख को अंतिम सत्य अथवा दावा न मानें एवं अपने विवेक का उपयोग करें। दैनिक जागरण अंधविश्वास के खिलाफ है।