नवग्रह शांति के लिए केवल आम नहीं, ये लकड़ियां भी इस्तेमाल होती हैं, चुनें हवन की सही लकड़ी?
हवन में प्रयुक्त लकड़ी यानी समिधा का विशेष महत्व होता है। जानिए किस ग्रह, मनोकामना और ऋतु के अनुसार कौन-सी समिधा चुननी चाहिए। ...और पढ़ें

हवन से पहले जान लें समिधा का महत्व (AI-Generated Image)
HighLights
हवन में प्रयुक्त लकड़ी को समिधा कहा जाता है
नवग्रह शांति के लिए प्रत्येक ग्रह की अलग समिधा होती है
अलग-अलग उद्देश्यों के लिए अलग-अलग समिधा बताई गई है
धर्म डेस्क, नई दिल्ली। हिंदू धर्म में हवन को अत्यंत पवित्र और प्रभावशाली धार्मिक कर्म माना जाता है। सामान्यतः लोग हवन सामग्री और मंत्रों पर अधिक ध्यान देते हैं, लेकिन शास्त्रों में हवन के लिए इस्तेमाल की जाने वाली लकड़ी यानी "समिधा" का भी विशेष महत्व बताया गया है। माना जाता है कि हवन का पूरा फल तभी मिलता है, जब उचित उद्देश्य के अनुसार सही समिधा का चयन किया जाए।
अक्सर यह धारणा सुनने को मिलती है कि हवन के लिए आम की लकड़ी सबसे श्रेष्ठ होती है। हालांकि, धार्मिक ग्रंथों में केवल आम की लकड़ी को सर्वोत्तम नहीं बताया गया है। विभिन्न उद्देश्यों, देवताओं और ग्रहों के अनुसार अलग-अलग समिधाओं का उल्लेख मिलता है। साथ ही, कई शोधों में यह भी पाया गया है कि केवल आम की लकड़ी जलाने से वातावरण को विशेष लाभ नहीं मिलता, बल्कि जब उसमें हवन सामग्री और औषधीय पदार्थ डाले जाते हैं, तब उसका प्रभाव बढ़ता है।
महर्षि पराशर द्वारा रचित बृहत् पाराशर होरा शास्त्र (ग्रह शान्ति अध्याय), अध्याय 84, श्लोक 21-22 में साफ तौर पर लिखा है-
अर्कः पलाशः खदिरस्त्वपामार्गस्तु पिप्पलः ।
उदुम्बरः शमी दुर्वा कुशाश्च समिधः क्रमात् ॥ २१॥
होतव्या मधुसर्पिभ्यां दध्ना क्षीरेण वा युताः ।
एकैकस्य त्वष्ट शतमष्टाविंशतिरेव वा ॥ २२॥
अगर नवग्रह शांति के लिए हवन किया जा रहा हो, तो प्रत्येक ग्रह के लिए अलग समिधा का उपयोग बताया गया है। सूर्य के लिए मदार, चंद्रमा के लिए पलाश, मंगल के लिए खैर, बुध के लिए चिड़चिड़ा, बृहस्पति के लिए पीपल, शुक्र के लिए गूलर, शनि के लिए शमी, राहु के लिए दूर्वा और केतु के लिए कुशा का उपयोग किया जाता है।
रोगों से भी मिलेगी मुक्ति
इसी प्रकार विशेष फल प्राप्त करने के लिए भी अलग-अलग समिधाओं का विधान है। मदार की समिधा रोगों के नाश के लिए उपयोगी मानी जाती है। पलाश की समिधा कार्यों में सफलता और उन्नति प्रदान करने वाली कही गई है। पीपल की समिधा संतान और वंश वृद्धि से जुड़ी मानी जाती है। गूलर धन और समृद्धि का प्रतीक माना गया है। शमी पापों के क्षय तथा दूर्वा दीर्घायु की कामना के लिए प्रयोग की जाती है। वहीं सभी मनोकामनाओं की पूर्ति के लिए कुशा की समिधा का विशेष महत्व बताया गया है।
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कर्मकांड परंपराओं में ऋतुओं के अनुसार भी समिधा चुनने का उल्लेख मिलता है। वसंत ऋतु में शमी, ग्रीष्म (गरमी) में पीपल, वर्षा में ढाक या बेल, शरद ऋतु में आम या पाकर, हेमंत में खैर तथा शिशिर ऋतु में गूलर या बरगद की लकड़ी का इस्तेमाल शुभ माना गया है।
कौन सी लकड़ी है उत्तम?
मान्यता है कि हवन के लिए लकड़ी चुनते समय कुछ सावधानियां भी जरूरी हैं। सड़ी-गली, भीगी हुई, घुन लगी या कीड़ों से प्रभावित लकड़ी का उपयोग नहीं करना चाहिए। इसके अलावा, श्मशान में उगे वृक्षों या उन शाखाओं की लकड़ी, जिन पर पक्षियों के घोंसले हों, हवन में इस्तेमाल करने से बचना चाहिए। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार जंगल और नदी किनारे उगे वृक्षों की लकड़ियां हवन के लिए अधिक उत्तम मानी जाती हैं।
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