Chaitra Navratri 2026: नवमी के दिन घर पर ही करें हवन, ये रही सबसे आसान विधि और मंत्र
चैत्र नवरात्र 2026 की नवमी के दिन घर में हवन कैसे करें? पढ़ें मार्कंडेय पुराण के अनुसार सही विधि, मंत्र और सामग्री। ...और पढ़ें

Ram Navami 2026: राम नवमी पर इस विधि से करें हवन (Image Source: AI-Generated)
HighLights
नवमी का हवन नवरात्र पूजा की पूर्णता का प्रतीक है
'ॐ ऐं ह्रीं क्लीं चामुण्डायै विच्चे स्वाहा' मंत्र के साथ आहुति दें
नारियल की आहुति के साथ पूजा का समापन होता है
धर्म डेस्क, नई दिल्ली। नवरात्र के नौ दिनों तक उपवास और पूजा करने के बाद, नवमी का दिन श्रद्धा और उल्लास का होता है। इस दिन हवन करना धार्मिक रूप से बेहद जरूरी माना जाता है। यह घर की नकारात्मक ऊर्जा (Negative Energy) को दूर कर मन को सुकून देने वाला भी होता है।
साल 2026 में चैत्र नवमी (Chaitra Navami) का अवसर विशेष है, क्योंकि यह नई ऊर्जा के साथ आध्यात्मिक शुरुआत का संकेत है।
हवन का महत्व
मार्कंडेय पुराण और देवी माहात्म्य में जिक्र मिलता है कि 'अग्नि' देवताओं का मुख है। हम अग्नि में जो भी आहुति देते हैं, वह सीधे उन देवी-देवताओं तक पहुंचती है, जिन्हें हम याद कर रहे होते हैं। शास्त्रों के अनुसार, हवन से निकलने वाला धुआं वातावरण को शुद्ध करता है और घर में सुख-समृद्धि का संचार करता है। नवमी के दिन हवन करने से नौ दिनों की पूजा का पूर्ण फल प्राप्त होता है।

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हवन की सरल विधि
- हवन कुंड को साफ करके उसे गंगाजल से पवित्र करें। आम की लकड़ियां, कपूर, घी और हवन सामग्री (Hawan Samagri) पहले से जुटा लें।
- कपूर की मदद से लकड़ियों में अग्नि प्रज्वलित करें। इसे जलाते समय मन ही मन मां दुर्गा (Maa Durga) का ध्यान करें।
- सबसे पहले गणेश जी और फिर नवग्रहों के नाम की आहुति दें। इसके बाद मुख्य आहुति मां दुर्गा के 'निर्वाण मंत्र' (ॐ ऐं ह्रीं क्लीं चामुण्डायै विच्चे स्वाहा) के साथ कम से कम 11, 21 या 108 बार दें।
- अंत में एक सूखा नारियल (गोला) लेकर उसमें घी और सामग्री भरकर 'पूर्णाहूति' दें। यह इस बात का प्रतीक है कि हमने अपना अहंकार और बुराइयां मां के चरणों में समर्पित कर दी हैं।
हवन के दौरान करें इन मंत्रों का जप
- ऊं ऐं ह्रीं क्लीं चामुण्डयै विच्चै नमः
- ओम आग्नेय नम: स्वाहा
- ओम गणेशाय नम: स्वाहा
- ओम गौरियाय नम: स्वाहा
- ओम नवग्रहाय नम: स्वाहा
- ओम दुर्गाय नम: स्वाहा
- ओम महाकालिकाय नम:
- ओम हनुमते नम: स्वाहा
- ओम भैरवाय नम: स्वाहा
- ओम कुल देवताय नम: स्वाहा
- ओम स्थान देवताय नम: स्वाहा
- ओम ब्रह्माय नम: स्वाहा
- ओम विष्णुवे नम: स्वाहा
- ओम शिवाय नम: स्वाहा
- ओम जयंती मंगलाकाली, भद्रकाली कपालिनी दुर्गा क्षमा शिवाधात्री स्वाहा
- स्वधा नमस्तुति स्वाहा
- ओम ब्रह्मा मुरारी त्रिपुरांतकारी भानु: शशि भूमि सुतो बुधश्च: गुरुश्च शुक्र शनि राहु केतव सर्वे ग्रहा शांति करा भवंतु स्वाहा
- ओम गुरुर्ब्रह्मा, गुरुर्विष्णु, गुरुर्देवा महेश्वर: गुरु साक्षात् परब्रह्मा तस्मै श्री गुरुवे नम: स्वाहा
- ओम शरणागत दीनार्त परित्राण परायणे, सर्व स्थार्ति हरे देवि नारायणी नमस्तुते
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