Hindu Nav Varsh 2026: हिंदू नववर्ष के पहले दिन न करें ये भूल, जानें क्या कहता है शास्त्र?
हिंदू नववर्ष (Hindu Nav Varsh 2026 Rules) चैत्र शुक्ल प्रतिपदा से शुरू होता है, जिसे ब्रह्मा जी द्वारा सृष्टि रचना का दिन माना जाता है। ...और पढ़ें

Hindu Nav Varsh 2026: हिंदू नववर्ष के नियम। (Ai Generated Image)

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धर्म डेस्क, नई दिल्ली। Hindu Nav Varsh 2026: चैत्र महीने के शुक्ल पक्ष की प्रतिपदा तिथि यानी आज से हिंदू नववर्ष का आरंभ हो गया है। भारतीय संस्कृति में यह दिन केवल एक तिथि परिवर्तन नहीं, बल्कि प्रकृति और भक्ति के मिलन का प्रतीक है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, इसी दिन ब्रह्मा जी ने सृष्टि की रचना की थी। मान्यता है कि साल का पहला दिन जैसा बीतता है, उसका असर पूरे साल रहता है।
अगर आप चाहते हैं कि पूरे साल आपके घर में सुख-शांति और मां लक्ष्मी का वास रहे, तो नववर्ष के पहले दिन इन विशेष नियमों का पालन जरूर करें, जो इस प्रकार हैं -
हिंदू नववर्ष के नियम (Hindu Nav Varsh 2026 Rules)

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वाद-विवाद
नववर्ष के पहले दिन घर का माहौल खुशनुमा रखें। इस दिन किसी भी तरह के विवाद से बचें। शास्त्रों के अनुसार, जिस घर में कलह होती है, वहां से मां लक्ष्मी चली जाती हैं। ऐसे में इस दिन वाणी पर संयम रखें और अपशब्दों का प्रयोग बिल्कुल न करें।
तामसिक भोजन
हिंदू नववर्ष का स्वागत सात्विकता से करना चाहिए। इस दिन मांस, मदिरा या लहसुन-प्याज जैसे तामसिक भोजन का सेवन नहीं करना चाहिए। यह दिन आत्म-शुद्धि का होता है, इसलिए सात्विक भोजन करें। हो पाए तो इस दिन नीम की पत्तियां और मिश्री खाने की परंपरा का पालन करें, इससे सेहत अच्छी रहती है।
कर्ज के लेन-देन से बचें
आर्थिक समृद्धि के लिए नए साल के पहले दिन न तो किसी को उधार दें और न ही किसी से कर्ज लें। ऐसा माना जाता है कि पहले दिन धन का बाहर जाना या कर्ज लेना पूरे साल आर्थिक तंगी का कारण बन सकता है। ऐसे में अपनी आय का कुछ हिस्सा दान में दें।
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घर में अंधेरा
मां लक्ष्मी का आगमन रोशनी वाले स्थान पर होता है। ऐसे में आज यानी साल की पहली शाम घर साफ-सुथरा रखें। घर के किसी भी कोने में अंधेरा न रहने दें। मुख्य द्वार पर वंदनवार लगाएं और शाम के समय दीपक जलाएं।
देर तक सोना
नववर्ष के पहले दिन सूर्योदय से पूहले उठना चाहिए। देर तक सोने से शरीर में आलस्य बढ़ता है और सकारात्मक ऊर्जा का नाश होता है। ऐसे में ब्रह्म मुहूर्त में उठकर स्नान के बाद सूर्य देव को अर्घ्य दें और अपने ईष्ट की पूजा करें।
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