भगवान विष्णु कैसे बने माता पार्वती के भाई? शिव महापुराण के इस प्रसंग के बारे में जरूर पढ़ें
पुराणों के अनुसार भगवान विष्णु को माता पार्वती का आध्यात्मिक भाई माना जाता है। शिव-पार्वती विवाह में उन्होंने भाई की रस्में निभाईं।

भगवान विष्णु और माता पार्वती का रिश्ता (Picture Credit: AI Generated)
HighLights
शिव-पार्वती विवाह में विष्णु ने निभाई भाई की रस्में।
कृष्ण की बहन के रूप में जन्मी थीं माता पार्वती।
भगवान मुरुगन को विष्णु जी का भांजा कहा जाता है।
धर्म डेस्क, नई दिल्ली। हमारे पुराणों में ऐसी कई कथाओं का जिक्र है जो आज भी प्रासंगिक हैं। कई ऐसी कहानियां भी हैं जिनसे आज भी लोग अनजान हैं। ऐसे एक कथा है भगवान विष्णु और माता पार्वती के रिश्ते की। पुराणों की मानें तो भगवान विष्णु को माता पार्वती के आध्यात्मिक भाई के रूप में पूजा जाता है।
वहीं कुछ ग्रंथों के अनुसार, विष्णु, शिव, पार्वती और लक्ष्मी सभी एक ही हैं। पार्वती जी भगवान विष्णु को अपना बड़ा भाई मानती थीं और इसी वजह से उन्होंने शिव-पार्वती विवाह में भाई की सभी रस्में निभाई थीं। जहां एक तरफ द्वापर युग में, भगवान कृष्ण की रक्षा करने और राक्षस कंस को दंडित करने के लिए पार्वती ने उनकी बेटी के रूप में जन्म लिया था।
वहीं कई और बार विष्णु जी और माता पार्वती का प्रसंग सामने आता है। पार्वती रूप में जन्म लेनेसे पहले वह 'सती' या 'दक्षायणी' नाम की एक मानव स्त्री थीं। आइए आपको बताते हैं भगवान विष्णु माता पार्वती के भाई के रूप में कैसे पूजे जाने लगे।
क्या भगवान विष्णु और माता पार्वती भाई-बहन हैं?
देवी पराशक्ति के अवतारों जैसे कि दक्षायणी, पार्वती और मीनाक्षी के रूप में, भगवान विष्णु उनके भाई के रूप पर पैदा नहीं हुए थे, लेकिन भगवान कृष्ण के अवतार के समय, वे भाई-बहन के रूप में दिखाई देते हैं। जिस समय देवकी ने भगवान कृष्ण को जन्म दिया, तब भगवान विष्णु के आदेशानुसार वासुदेव गोकुल गए और यशोदा और नंद की बेटी को ले आए, जिनका जन्म भी उसी समय हुआ था जब भगवान कृष्ण का हुआ था। मथुरा लौटने पर, कंस जेल में आया और बच्चे को मांगा।
उस समय वासुदेव ने बच्ची कंस को दे दी। उस समय जब कंस ने बच्ची को मारने की कोशिश की तब वो आसमान में चली गई और उसने माता का रूप ले लिया। चूंकि उस समय माता पार्वती के अवतार और विष्णु जी के कृष्ण अवतार का जन्म हुआ था, इसलिए दोनों को भाई -बहन का रूप माना गया।
शिव महापुराण में लिखा है यह रहस्य
शिव महापुराण में इस बात का वर्णन मिलता है कि जिस समय माता पार्वती और भगवान शिव का विवाह होने वाला था तब माता पार्वती का कोई भाई न होने के कारण वो विवाह की रस्मों को लेकर चिंतित थीं।
उस समय भगवान विष्णु प्रकट हुए और उन्होंने शिव-पार्वती विवाह में भाई की सभी रस्में निभाने का वचन दिया। यही नहीं शादी की सभी रस्मों में उन्होंने माता पार्वती के भाई की भूमिका निभाई। उसी समय से भगवान विष्णु को माता पार्वती का दर्जा दिया गया और उन्हें एक इस रूप में भी पूजा जाने लगा।
भगवान मुरुगन को विष्णु जी का भांजा कहा जाता है
दक्षिण भारत में पूजे जाने वाले मुरुगन स्वामी जिन्हें कार्तिकेय नाम से जाना जाता है और वो माता पार्वती के पुत्र हैं। उन्हें विष्णु जी का भांजा कहा जाता है जिसका सीधा सा मतलब यह है कि विष्णु जी माता पार्वती के भाई हैं।
ये सभी बातें बताती हैं कि भगवान विष्णु और माता पार्वती भाई-बहन के रूप में भी पूजे जाते हैं और उनकी कथा पुराणों में भी वर्णित है।
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