Trending

    विज्ञापन हटाएंसिर्फ खबर पढ़ें

    गरुड़ पुराण के अनुसार अंतिम संस्कार के बाद कितने दिनों तक सूतक मान्य रहता है? यहां जानें जरूरी नियम

    Updated: Sun, 12 Jul 2026 02:30 PM (IST)

    गरुड़ पुराण के अनुसार, किसी करीबी की मृत्यु के बाद घर में 'सूतक' काल लग जाता है जो कुछ विशेष दिनों तक रहता है, इसके कुछ नियम भी हैं और उनका पालन अनिवा ...और पढ़ें

    मृत्यु के बाद सूतक काल: गरुड़ पुराण के अनुसार जानें अवधि और महत्वपूर्ण नियम (Picture Credit: AI Generated)

    मृत्यु के बाद सूतक काल: गरुड़ पुराण के अनुसार जानें अवधि और महत्वपूर्ण नियम (Picture Credit: AI Generated)

    timer icon

    समय कम है?

    जानिए मुख्य बातें और खबर का सार एक नजर में

    संक्षेप में पढ़ें

    धर्म डेस्क, नई दिल्ली। हिंदू धर्म में, जीवन की हर घटना चाहे वह किसी का जन्म हो या फिर मृत्यु, इन सभी का विशेष महत्व होता है। यही नहीं किसी भी संस्कार के कुछ नियम बनाए गए हैं जिनका पालन जरूरी माना जाता है।

    ऐसे ही जब घर में किसी करीबी की मृत्यु होती है तो उसके भी कुछ नियम हैं जिनका पालन करना घर के अन्य सदस्यों के लिए जरूरी है। दरअसल, सभी नियमों का पालन घर की पवित्रता के लिए भी जरूरी होता है और मृतक की आत्मा को शांति भी मिलती है।

    इन घटनाओं से जुड़ी सबसे पुरानी और आध्यात्मिक परंपरा मानी जाती है 'सूतक' की अवधि। यह वो समय होता है को किसी करीबी की मृत्यु के बाद से उसके अंतिम संस्कार तुरंत बाद से ही लग जाता है।

    इस दौरान कुछ शुभ काम नहीं किए जाते हैं और इसके कुछ विशेष नियम भी होते हैं जिससे घर की शुध्दि बनी रहती है। आइए आपको बताते हैं अंतिम संस्कार के बाद कितने दिनों तक सूतक मान्य रहता है? यहां जानें जरूरी नियम क्या हैं।

    मृत्यु सूतक क्या होता है?

    घर में किसी करीबी व्यक्ति की मृत्यु के बाद सूतक काल आरंभ हो जाता है और गरुड़ पुराण के अनुसार इस दौरान मृत व्यक्ति के परिजनों को 10 से 13 दिनों तक सूतक के नियमों का पालन करने की सलाह दी जाती है। जो व्यक्ति मृतक का दाह संस्कार करता है उसे सूतक का पालन दृढ़ता से करना चाहिए जिससे मृतक की आत्मा को शांति मिले।

    खबरें और भी

    इस अवधि में लोग किसी के घर नहीं जाते हैं और घर में पूजा-पाठ नहीं किया जाता है। यह पूरा समय मृतक को समर्पित होता है और घर में गरुड़ पुराण का पाठ होता है जिससे जीवन और मृत्यु के सत्य के बारे में पता चलता हैं।

    मृत्यु के बाद शुरू होने के बाद सूतक काल का समापन 13 वे दिन होता है और इसी दिन घर में तेरहवीं का आयोजन होता है जिसमें ब्राह्मणों को भोजन कराया जाता है।

    सूतक काल के नियम क्या हैं?

    सूतक काल के दौरान घर में कुछ नियमों का पालन करने की सलाह दी जाती है, जिससे मृत व्यक्ति की आत्मा को शांति मिलती है और मोक्ष की प्राप्ति होती है। आइए जानें सूतक के नियमों के बारे में-

    पूजा-पाठ की होती है मनाही

    सूतक के दौरान घर में किसी भी तरह का पूजा-पाठ नहीं किया जाता है और लोग सिर्फ मृतक की आत्मा की शांति के लिए प्रार्थना करते हैं। इस दौरान घर में मंदिर में दीपक भी प्रज्वलित नहीं होता है और मृत व्यक्ति के नाम का दीपक घर की दक्षिण दिशा में जलाया जाता है।

    घर में नहीं बनता है भोजन

    सूतक के दौरान घर में भोजन नहीं बनाया जाता है। इस दौरान यदि भोजन तैयार भी किया जाता है तो घर के बाहरी हिस्से जैसे आंगन या छत में भोजन बनाने की व्यवस्था की जाती है। इस समय किसी भी तरह का तामसिक भोजन न तो बनाना चाहिए और न ही ग्रहण करना चाहिए।

    घर में कोई शुभ कार्य नहीं होता है

    सूतक के दौरान घर में किसी भी शुभ काम की मनाही होती है। इस दौरान मुंडन, गृहप्रवेश या शादी से जुड़ी रस्मों पर रोक लग जाती है। यही नहीं इस दौरान किसी समारोह में हिस्सा लेना भी अच्छा नहीं माना जाता है।

    परिवार में किसी की मृत्यु होने के बाद जब उसका अंतिम संस्कार हो जाता है तब से सूतक काल शुरू हो जाता है। ऐसे में इस अवधि के नियमों का पालन करना जरूरी होता है जिससे घर के लोगों में कोई दोष न लगे और मृतक की आत्मा को शांति भी मिले।

    यह भी पढ़ें- मृत्यु के बाद घर में क्यों नहीं जलाया जाता चूल्हा? गरुड़ पुराण में लिखे हैं 'सूतक' के नियम

    यह भी पढ़ें- क्या आपके घर में भी हुआ है बच्चे का जन्म? तो सूतक के इन नियमों को न करें अनदेखा

    अस्वीकरण: इस लेख में बताए गए उपाय/लाभ/सलाह और कथन केवल सामान्य सूचना के लिए हैं। दैनिक जागरण यहां इस लेख फीचर में लिखी गई बातों का समर्थन नहीं करता है। इस लेख में निहित जानकारी विभिन्न माध्यमों/ज्योतिषियों/पंचांग/प्रवचनों/मान्यताओं/धर्मग्रंथों/दंतकथाओं से संग्रहित की गई हैं। पाठकों से अनुरोध है कि लेख को अंतिम सत्य अथवा दावा न मानें एवं अपने विवेक का उपयोग करें। दैनिक जागरण अंधविश्वास के खिलाफ है।