पूजा-पाठ के बाद क्यों जरूरी है दक्षिणा देना? शास्त्रों से जानिए इसके नियम और सही तरीका
पूजा-पाठ और हवन के बाद दक्षिणा क्यों दी जाती है? शास्त्रों के अनुसार, दान और दक्षिणा में क्या अंतर है ...और पढ़ें
-1787309001580_m.webp)
दक्षिणा का क्या महत्व है? (AI-Generated Image)

समय कम है?
जानिए मुख्य बातें और खबर का सार एक नजर में
धर्म डेस्क, नई दिल्ली। धर्म डेस्क, नई दिल्ली। सनातन धर्म में जब भी कोई घर में पूजा-पाठ, हवन या कथा होती है, तो उसके अंत में 'दक्षिणा' देने की परंपरा काफी पुरानी है। आमतौर पर हम दक्षिणा का मतलब सिर्फ पैसे देने से जोड़ लेते हैं, लेकिन शास्त्रों के अनुसार इसका मतलब बहुत गहरा और पवित्र है। धार्मिक मान्यताओं में दक्षिणा पूजा संपन्न कराने वाले गुरु या धार्मिक व्यक्ति के प्रति हमारा सम्मान व्यक्त करने का एक माध्यम है।
दान और दक्षिणा में क्या अंतर है?
अक्सर लोग दान और दक्षिणा को एक ही चीज समझ लेते हैं, जबकि शास्त्रों में इन दोनों का स्वरूप अलग बताया गया है।
दान: जब हम किसी असहाय, गरीब या जरूरतमंद व्यक्ति की मदद के लिए उसे धन, अन्न या वस्त्र देते हैं, तो उसे 'दान' कहा जाता है। इसमें करुणा का भाव होता है।
दक्षिणा: जब ईश्वर की आराधना या धार्मिक कर्मकांड कराने वाले योग्य व्यक्ति को पूरे आदर के साथ कुछ भेंट किया जाता है, तो वह 'दक्षिणा' कहलाती है। शास्त्रों के अनुसार, दक्षिणा में दिखावे का कोई स्थान नहीं होता, यह हमेशा सच्ची श्रद्धा और अपनी सामर्थ्य के अनुसार दी जानी चाहिए।
दक्षिणा में किन चीजों को देना माना गया है शुभ?
शास्त्रों और ज्योतिषीय मान्यताओं के अनुसार, दक्षिणा में सिर्फ नकद पैसे ही नहीं, बल्कि कई अन्य चीजें भी भेंट की जा सकती हैं:
धन का दान: दक्षिणा में अपनी क्षमता के अनुसार धन (रुपये) देना बहुत शुभ माना जाता है। शास्त्रों में धन का सीधा संबंध माता लक्ष्मी से माना गया है। इसलिए यह जरूरी नहीं कि दक्षिणा की रकम बहुत बड़ी हो। बस जो भी दिया जाए सच्चे मन से दिया जाए।
तांबे और पीतल के बर्तन का दान: दक्षिणा में तांबे या पीतल के लोटे, थाली, कटोरी जैसी उपयोगी वस्तुएं देना भी बेहद शुभ होता है। ज्योतिष शास्त्र में इन दोनों धातुओं को बहुत पवित्र माना गया है। तांबे का संबंध 'सूर्य' ग्रह से और पीतल का संबंध 'गुरु' ग्रह यानी बृहस्पति से जोड़ा जाता है।
फल, मिठाई और पीले कपड़े का दान: किसी भी धार्मिक अनुष्ठान के बाद दक्षिणा के रूप में फल और मिठाई का दान बहुत शुभ माना जाता है। इसके अलावा, पीले रंग का कपड़ा और कलावा (रक्षासूत्र) भेंट करना शास्त्रों में बहुत ही और फलदायी बताया गया है।
यह भी पढ़ें- पूजा में भगवान को शहद क्यों अर्पित किया जाता है? वजह जानेंगे तो हर बार जरूर चढ़ाएंगे
यह भी पढ़ें- प्रेमानंद महाराज ने बताया भगवान शिव का वह खास मंत्र, जिसका बिना गुरु के कहीं भी कर सकते हैं जाप
अस्वीकरण: इस लेख में बताए गए उपाय/लाभ/सलाह और कथन केवल सामान्य सूचना के लिए हैं। दैनिक जागरण यहां इस लेख फीचर में लिखी गई बातों का समर्थन नहीं करता है। इस लेख में निहित जानकारी विभिन्न माध्यमों/ज्योतिषियों/पंचांग/प्रवचनों/मान्यताओं/धर्मग्रंथों/दंतकथाओं से संग्रहित की गई हैं। पाठकों से अनुरोध है कि लेख को अंतिम सत्य अथवा दावा न मानें एवं अपने विवेक का उपयोग करें।
