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    कालसर्प दोष से हैं परेशान? तो आज ही पहनें ये रत्न, आपकी हर परेशानी होगी कोसों दूर

    Updated: Mon, 25 May 2026 07:45 PM (GMT+05:30)

    वैदिक ज्योतिष में कालसर्प दोष से मुक्ति पाने के लिए गोमेद और लहसुनिया रत्नों के महत्व को बताया गया है। इन रत्नों को धारण करने से जीवन में आने वाली बाध ...और पढ़ें

    कालसर्प दोष दूर करने के लिए कौन-से रत्न हैं सबसे बेस्ट? (Picture Credit- AI Generated)

    कालसर्प दोष दूर करने के लिए कौन-से रत्न हैं सबसे बेस्ट? (Picture Credit- AI Generated)

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    धर्म डेस्क, नई दिल्ली। वैदिक ज्योतिष में कालसर्प दोष के बारे में विस्तार से बताया गया है। कुंडली में कालसर्प दोष तब बनता है, जब सभी मुख्य ग्रह राहु और केतु के बीच एक ही तरफ आ जाते हैं। इस स्थिति में व्यक्ति को कालसर्प दोष की समस्या का सामना करना पड़ सकता है। इससे व्यक्ति की तरक्की में बाधा आती है और जीवन में कई तरह की परेशानियों का सामना करना पड़ सकता है।
    रत्न शास्त्र में कालसर्प दोष से मुक्ति पाने के लिए दो रत्नों के बारे में बताया गया है। इन रत्नों को पहनने से कालसर्प दोष का प्रभाव दूर होता है और धन लाभ के योग बनते हैं। ऐसे में आइए इस आर्टिकल में आपको बताते हैं कि किन रत्नों को पहनने से कालसर्प दोष कोसों दूर होता है।

    gomed stone  (1)

    (Picture Credit- AI Generated)

    1. गोमेद- इस रत्न का संबंध राहु से है। अगर आपकी कुंडली में कालसर्प दोष है, तो ऐसी स्थिति में गोमेद रत्न पहनना बहुत लाभकारी माना जाता है। इस रत्न को पहनने से रुके हुए पूरे होते हैं और करियर में आ रही बाधा दूर होती है। साथ ही निर्णय लेने की क्षमता लेने में वृद्धि होती है। इस रत्न को पहनने के लिए शनिवार का दिन शुभ माना जाता है। गोमेद रत्न को स्वाति, शतभिषा या आर्द्रा नक्षत्र में चांदी या अष्टधातु की अंगूठी में मध्यमा उंगली में पहनना शुभ माना जाता है।

    2. लहसुनिया- इस रत्न का संबंध केतु से है। कालसर्प दोष की परेशानी में इस रत्न पहनना लाभकारी माना जाता है। रत्न शास्त्र के अनुसार, इस रत्न को धारण करने से बुरी नजर और मानसिक तनाव की समस्या से छुटकारा मिलता है। कामों में सफलता मिलती है। साथ ही मानसिक शांति प्राप्त होती है। व्यापार में तरक्की के मार्ग खुलते हैं। इस रत्न को पहनने के लिए मंगलवार या शनिवार के दिन शुभ माना जाता है। इसे चांदी की अंगूठी में तर्जनी या मध्यमा उंगली में पहनना शुभ माना जाता है।

    इन बातों का रखें खास ध्यान

    • अगर आपका रत्न खंडित हो गया है, तो ऐसे में उसे न पहनें। इससे रत्न आर्थिक हानि या मानसिक तनाव दे सकता है।
    • इसके अलावा रत्न को पहनकर श्मशान घाट, अंतिम संस्कार में नहीं जाना जाता है।
    • रत्न को भगवान के चरणों में रखकर और गंगाजल से धोकर ही पहनें।

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    अस्वीकरण: इस लेख में बताए गए उपाय/लाभ/सलाह और कथन केवल सामान्य सूचना के लिए हैं। दैनिक जागरण यहां इस लेख फीचर में लिखी गई बातों का समर्थन नहीं करता है। इस लेख में निहित जानकारी विभिन्न माध्यमों/ज्योतिषियों/पंचांग/प्रवचनों/मान्यताओं/धर्मग्रंथों/दंतकथाओं से संग्रहित की गई हैं। पाठकों से अनुरोध है कि लेख को अंतिम सत्य अथवा दावा न मानें एवं अपने विवेक का उपयोग करें। दैनिक जागरण अंधविश्वास के खिलाफ है।