Chandra Grahan 2026: चंद्र ग्रहण में गर्भवती महिलाएं भूलकर भी न करें ये गलतियां, वरना पड़ सकता है अशुभ प्रभाव
चंद्र ग्रहण के दौरान गर्भवती महिलाओं को नियम का पालन जरूर करना चाहिए। ऐसा न करने से ग्रहण का अशुभ प्रभाव पड़ता है। ...और पढ़ें

चंद्र ग्रहण के दौरान क्या न करें? (Image Source: AI-Generated)
HighLights
होलिका दहन पर चंद्र ग्रहण का साया
ग्रहण से पहले 9 घंटे पहले सूतक लगता है
गर्भवती महिलाएं जरूर करें नियम का पालन
धर्म डेस्क, नई दिल्ली। वैदिक पंचांग के अनुसार, आज यानी देशभर में होलिका दहन का पर्व मनाया जा रहा है। इस बार होलिका दहन के दिन चंद्र ग्रहण का साया रहेगा। चंद्र ग्रहण की शुरुआत दोपहर 03 बजकर 20 मिनट पर होगी और समापन शाम 06 बजकर 46 मिनट पर होगा। सूतक काल की शुरुआत सुबह 06 बजकर 20 मिनट पर हो गई है। सूतक काल के दौरान कई सावधानी बरतनी होती है। ग्रहण के समय गर्भवती महिलाओं को घर बाहर न निकलने की सलाह दी जाती है। ऐसे में आइए इस आर्टिकल में आपको बताते हैं कि गर्भवती महिलाओं को ग्रहण के दौरान कौन-सी गलितयां नहीं करनी चाहिए।
-1772516104619.jpg)
(Image Source: AI-Generated)
इन बातों का रखें ध्यान
- गर्भवती महिलाओं को चंद्र ग्रहण के दौरान कैंची, सुई या ब्लेड जैसी धारदार और नुकीली चीजों का इस्तेमाल भूलकर भी नहीं करना चाहिए। ऐसा माना जाता है कि इस गलती को करने से गर्भवती महिलाओं को जीवन में कई परेशानियों का सामना करना पड़ सकता है।
- इसके अलावा चंद्र ग्रहण के समय घर से बाहर भूलकर भी न निकलें। ग्रहण की रोशनी या नकारात्मक ऊर्जा गर्भवती महिलओं पर न पड़े। इसलिए गर्भवती महिलाओं को ग्रहण के दौरान घर के अंदर ही रहने की सलाह दी जाती है।
- गर्भवती महिलाएं सूतक और चंद्र ग्रहण के दौरान किसी से वाद-विवाद न करें।
- किसी के बारे में गलत न सोचें।
- घर में तनावपूर्ण माहौल न बनाए।
इस तरह दूर करें चंद्र ग्रहण का अशुभ प्रभाव
- ग्रहण काल के दौरान पूजा-पाठ करने की मनाही है। ऐसे में मन ही मन में देवी-देवताओं के मंत्रों का जप करें।
- ग्रहण खत्म होने के बाद स्नान कर पूजा-पाठ करें। अन्न-धन और कपड़े समेत आदि चीजों का दान करें। धार्मिक मान्यता के अनुसार, इस उपाय को करने से चंद्र ग्रहण का अशुभ प्रभाव दूर होता है और सुख-समृद्धि में वृद्धि होती है।
तनाव दूर करने के मंत्र
1. ऊँ इमं देवा असपत्नं ग्वं सुवध्यं ।
महते क्षत्राय महते ज्यैश्ठाय महते जानराज्यायेन्दस्येन्द्रियाय
इमममुध्य पुत्रममुध्यै पुत्रमस्यै विश वोsमी राज: सोमोस्माकं ब्राह्माणाना ग्वं राजा।
2. ऊँ ऐं क्लीं सोमाय नम:।
ऊँ श्रां श्रीं श्रौं चन्द्रमसे नम:।
ऊँ श्रीं श्रीं चन्द्रमसे नम:।
3. ऊँ दधिशंखतुषाराभं क्षीरोदार्णवसंभवम ।
नमामि शशिनं सोमं शंभोर्मुकुटभूषणम ।।
4. ऊँ अमृतंग अन्गाये विधमहे कलारुपाय धीमहि, तन्नो सोम प्रचोदयात ।।
यह भी पढ़ें- Chandra Grahan 2026: होलिका दहन के दिन इतने बजे से शुरू होगा चंद्र ग्रहण, पढ़ें सूतक समय और नियम
यह भी पढ़ें- Aaj Ka Panchang 3 March 2026: होलिका दहन पर चंद्र ग्रहण का साया, बन रहे ये योग, पढ़ें पूजा का शुभ मुहर्त
अस्वीकरण: इस लेख में बताए गए उपाय/लाभ/सलाह और कथन केवल सामान्य सूचना के लिए हैं। दैनिक जागरण तथा जागरण न्यू मीडिया यहां इस लेख फीचर में लिखी गई बातों का समर्थन नहीं करता है। इस लेख में निहित जानकारी विभिन्न माध्यमों/ज्योतिषियों/पंचांग/प्रवचनों/मान्यताओं/धर्मग्रंथों/दंतकथाओं से संग्रहित की गई हैं। पाठकों से अनुरोध है कि लेख को अंतिम सत्य अथवा दावा न मानें एवं अपने विवेक का उपयोग करें। दैनिक जागरण तथा जागरण न्यू मीडिया अंधविश्वास के खिलाफ है।