खत्म हुआ शिवभक्तों का इंतजार! सावन में इस दिन से शुरू होगी कांवड़ यात्रा, नोट करें तारीख
कांवड़ यात्रा शिव भक्तों द्वारा हर साल सावन के महीने में की जाने वाली एक शुभ तीर्थयात्रा है, जिससे भगवान शिव की कृपा प्राप्त होती है। ...और पढ़ें

कांवड़ यात्रा के नियम (Picture Credit- AI Generated)
HighLights
हर साल सावन में की जाती है कांवड़ यात्रा
सावन शिवरात्रि पर होता है इस यात्रा का समापन
यात्रा में सात्विक भोजन और पैदल चलना अनिवार्य
धर्म डेस्क, नई दिल्ली। कांवड़ यात्रा सावन यानी भगवान शिव के प्रिय महीने में की जाती है। माना जाता है कि इस यात्रा की शुरुआत भगवान परशुराम ने की थी। इसमें भक्त पवित्र स्थानों से गंगाजल भरकर लाते हैं और शिवालयों में अभिषेक करते हैं।
यह एक कठिन यात्रा मानी जाती है, जिसके दौरान कठोर नियमों का भी पालन करना होता है, तभी यह यात्रा सफल मानी जाती है। चलिए जानते हैं कांवड़ यात्रा की शुरुआत की तारीख और इससे जुड़े कुछ जरूरी नियम।
क्या होती है कांवड़ यात्रा?
कांवड़ यात्रा भगवान शिव के भक्तों द्वारा हर साल सावन में की जाने वाली एक पवित्र जल यात्रा है। इन भक्तों को कांवड़ियां कहा जाता है। शिव भक्त गंगातट से कलश में गंगाजल को भरकर उसको अपनी कांवड़ से बांधते हैं और कंधों पर लटकाते हैं, जिसे कांवड़ कहा जाता है। इस दौरान भक्त हरिद्वार, गौमुख, गंगोत्री या सुल्तानगंज जैसे तीर्थों से पवित्र गंगाजल लाते हैं और अपने स्थानीय शिवालयों में महादेव का अभिषेक करते हैं।
कब होगी यात्रा की शुरुआत
सावन माह शुरू होने के साथ ही कांवड़ यात्रा की भी शुरुआत हो जाती है, जिसका समापन 'सावन शिवरात्रि' के दिन शिवलिंग पर जल चढ़ाने के साथ होता है। साल 2026 में सावन की शुरुआत 30 जुलाई, गुरुवार के दिन से हो रही है। ऐसे में कांवड़ यात्रा की भी शुरुआत इसी दिन से होगी। वहीं सावन शिवरात्रि 11 अगस्त को है, जिस दिन शिवलिंग पर जल चढ़ाकर कांवड़ यात्रा का समापन किया जाएगा।

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कांवड़ यात्रा के नियम और सावधानियां
- कांवड़ यात्रा के दौरान केवल सात्विक भोजन ही करना चाहिए और मांस-मदिरा, नशा या किसी भी तरह के तामसिक भोजन का त्याग कर देना चाहिए।
- पवित्र कांवड़ को कभी भी सीधे जमीन पर नहीं रखना चाहिए। अगर गलती से ऐसा हो जाता है, तो इससे यात्रा अधूरी मानी जाती है। ऐसे में कांवड़िए को दोबारा गंगाजल जल भरना पड़ता है।
- यह पूरी यात्रा केवल पैदल ही की जाती है, इसमें किसी भी वाहन का प्रयोग नहीं करना चाहिए।
- यात्रा के दौरान शरीर से चमड़े की कोई वस्तु स्पर्श नहीं होनी चाहिए।
- कांवड़ को किसी के ऊपर से नहीं निकालना चाहिए।
- अगर आप शौचालय आदि जाते हैं, तो स्नान के बाद ही कांवड़ को स्पर्श करें।
- यात्रा के दौरान निरंतर "बम-बम भोले" और भगवान शिव के मंत्रों का उच्चारण करते रहना चाहिए।
- इन सभी बातों का ध्यान रखने पर ही आपको कांवड़ यात्रा का पूरा लाभ प्राप्त हो सकती है।
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