कांवड़ का जल किसे अर्पित किया जाता है? जानिए सावन में जलाभिषेक की सही विधि और नियम
सावन में कांवड़ का जल किसे और कैसे चढ़ाया जाता है? जानिए शिवलिंग पर जलाभिषेक की सही विधि, नियम और वे गलतियां जिनसे कांवड़ यात्रा खंडित हो सकती है। ...और पढ़ें

क्या आप जानते हैं कांवड़ यात्रा से जुड़े ये नियम? (AI-Generated Image)

समय कम है?
जानिए मुख्य बातें और खबर का सार एक नजर में
धर्म डेस्क, नई दिल्ली। सावन का महीना आते ही देश भर के शिवभक्त कांवड़ यात्रा की तैयारियों में जुट जाते हैं। हर साल लाखों श्रद्धालु हरिद्वार, गौमुख जैसी पवित्र जगहों से गंगाजल भरते हैं और पैदल चलकर भगवान शिव का जलाभिषेक करते हैं। लेकिन, क्या आप जानते हैं कि यह यात्रा सिर्फ जल लाकर चढ़ाने तक सीमित नहीं है?
दरअसल, कांवड़ यात्रा भक्त की आस्था, शुद्धता और कड़े नियमों की एक बहुत बड़ी परीक्षा होती है। अगर आप भी इस बार कांवड़ यात्रा कर रहे हैं या इसके बारे में जानना चाहते हैं, तो शास्त्रों में बताए गए कुछ खास नियमों का पालन करना बेहद जरूरी है। इस आर्टिकल में जानेंगे कि कांवड़ से जुड़ी हर जरूरी बात।
कांवड़ का जल किसे और क्यों चढ़ाया जाता है?
कांवड़ यात्रा का सीधा संबंध भगवान शिव (महादेव) से है और यह जल उन्हीं को अर्पित किया जाता है। इसके पीछे एक बहुत ही रोचक कथा है। मान्यता है कि जब देवताओं और असुरों के बीच समुद्र मंथन हुआ था, तो उसमें से 'हलाहल' नाम का भयंकर विष निकला था। पूरी सृष्टि को बचाने के लिए शिवजी ने वह विष ग्रहण कर लिया था।

(AI-Generated Image)
विष के प्रभाव से उनके शरीर में भयंकर जलन होने लगी। महादेव की इस जलन को शांत करने के लिए देवराज इंद्र समेत सभी देवताओं ने पवित्र नदियों का जल लाकर उन पर चढ़ाया। बस उसी परंपरा को निभाते हुए शिव भक्त सावन में महादेव को शीतल गंगाजल अर्पित करते हैं।
खबरें और भी
शिवलिंग पर जल चढ़ाने का सही तरीका
- मंदिर परिसर में जाने से पहले हाथ-पैर अच्छे से धो लें। जल चढ़ाते समय मन ही मन 'ॐ नमः शिवाय' या 'बम बम भोले' का जप करते रहें।
- जल चढ़ाते समय आपका मुंह हमेशा उत्तर दिशा की ओर होना चाहिए, क्योंकि इसे शिव-पार्वती का निवास स्थान माना जाता है।
- जल को सीधे शिवलिंग के ऊपर न डालें। सबसे पहले जलाधारी के दाईं ओर (गणेश जी का स्थान) और बाईं ओर (कार्तिकेय जी का स्थान) थोड़ा जल चढ़ाएं। फिर बीच के हिस्से (माता अशोक सुंदरी की जगह) पर जल अर्पित करें।
- आखिर में एक पतली और धीमी धार बनाते हुए शिवलिंग पर जल चढ़ाएं। ध्यान रहे कि जलाभिषेक के बाद शिवलिंग की हमेशा आधी परिक्रमा ही की जाती है। जलाधारी (जहां से जल बहकर निकलता है) को कभी लांघना नहीं चाहिए।
इन गलतियों से खंडित हो सकती है कांवड़
- कांवड़ को कभी भी सीधे जमीन पर नहीं रखा जाता। आराम करते समय इसे किसी स्टैंड या पेड़ की डाली पर टांगना जरूरी होता है। अगर जल से भरी कांवड़ जमीन से छू जाए, तो वह अशुद्ध हो जाती है।
- पूरी यात्रा में बेल्ट, पर्स या जूते जैसी चमड़े की चीजें बिल्कुल इस्तेमाल न करें।
- जब तक यात्रा पूरी न हो जाए, सिर्फ सात्विक खाना ही खाएं। किसी भी तरह के नशे (शराब, सिगरेट आदि) से पूरी तरह दूर रहें।
- अगर आप रास्ते में शौच (टॉयलेट) के लिए जाते हैं, तो बिना दोबारा नहाए कांवड़ को हाथ नहीं लगा सकते।
यह भी पढ़ें- देवताओं के काल से है कांवड़ जल से जलाभिषेक की परंपरा, सोमवार के साथ ही मंगलवार का दिन भी खास
यह भी पढ़ें- महादेव नहीं, तो फिर किस देवता के लिए दक्षिण भारत में उठती है कांवड़? सच जानेंगे तो हैरान रह जाएंगे
अस्वीकरण: इस लेख में बताए गए उपाय/लाभ/सलाह और कथन केवल सामान्य सूचना के लिए हैं। दैनिक जागरण यहां इस लेख फीचर में लिखी गई बातों का समर्थन नहीं करता है। इस लेख में निहित जानकारी विभिन्न माध्यमों/ज्योतिषियों/पंचांग/प्रवचनों/मान्यताओं/धर्मग्रंथों/दंतकथाओं से संग्रहित की गई हैं। पाठकों से अनुरोध है कि लेख को अंतिम सत्य अथवा दावा न मानें एवं अपने विवेक का उपयोग करें।