खरमास में थम जाते हैं सारे मांगलिक कार्य, लेकिन क्यों बढ़ जाता है विष्णु पूजा का महत्व?
खरमास के दौरान मांगलिक कार्य भले ही वर्जित हों, लेकिन यह समय भगवान विष्णु की भक्ति के लिए सर्वश्रेष्ठ है। पढ़ें खरमास की पौराणिक कथा। ...और पढ़ें

Kharmas 2026: खरमास में भगवान विष्णु की पूजा का महत्व (Image Source: AI-Generated)

समय कम है?
जानिए मुख्य बातें और खबर का सार एक नजर में
धर्म डेस्क, नई दिल्ली। हिंदू धर्म में खरमास (Kharmas 2026) का समय अक्सर लोगों को थोड़ा मायूस कर देता है। ऐसा इसलिए, क्योंकि खरमास के दौरान शादी-ब्याह, मुंडन और गृह प्रवेश जैसे मांगलिक कामों पर ब्रेक लग जाता है।
लेकिन, क्या आप जानते हैं कि जिसे हम 'खाली' महीना समझते हैं, वह असल में आध्यात्मिक रूप से कितना महत्वपूर्ण होता है?
क्या है खरमास की असली कहानी?
ज्योतिष शास्त्र के अनुसार, जब सूर्य देव बृहस्पति की राशि (धनु या मीन) में प्रवेश करते हैं, तो उनकी चमक और प्रभाव थोड़ा धीमा पड़ जाता है। इसे ही हम 'खरमास' कहते हैं।
वहीं, पौराणिक कथा के अनुसार, सूर्य देव अपने सात घोड़ों के रथ पर सवार होकर ब्रह्मांड की परिक्रमा कर रहे थे। तभी उनके घोड़े थक गए। प्यास बुझाने के लिए सूर्य देव उन्हें एक तालाब के पास ले गए, लेकिन नियम के अनुसार उन्हें रुकना नहीं था। वहां दो 'खर' (गधे) मौजूद थे।
सूर्य देव ने घोड़ों को आराम देने के लिए रथ में गधों को जोत दिया। गधों की गति धीमी होने के कारण सूर्य का तेज कम हो गया और इसी समय को 'खरमास' कहा जाने लगा।
भगवान विष्णु की पूजा ही क्यों?
खरमास के दौरान किसी भी सांसारिक शुभ कार्य की मनाही होती है। लेकिन, 'हरि' यानी भगवान विष्णु की उपासना के लिए यह समय स्वर्ण काल के समान माना जाता है। यही नहीं, इसे 'पुरुषोत्तम मास' के समान फलदायी माना गया है।
शास्त्रों का क्या कहना है?
पद्म पुराण के अनुसार, खरमास के दौरान जो व्यक्ति सूर्योदय से पहले उठकर भगवान विष्णु का ध्यान करता है और 'पुरुष सूक्त' का पाठ करता है, उसे जीवन के सभी कष्टों से मुक्ति मिलती है।
श्रीमद्भागवत पुराण के अनुसार, यह समय आत्म-चिन्तन और जप-तप का है। इस दौरान विष्णु सहस्रनाम का पाठ करना मानसिक शांति के लिए अचूक माना गया है।

(Image Source: AI-Generated)
खरमास में पूजा के खास लाभ
- चूंकि इस समय सूर्य और गुरु की स्थिति विशेष होती है, इसलिए विष्णु पूजा करने से कुंडली के 'गुरु दोष' और 'सूर्य दोष' शांत होते हैं।
- भागदौड़ भरी जिंदगी में जब बाहरी काम रुकते हैं, तो यह समय खुद को अंदर से साफ करने का होता है।
- माना जाता है कि खरमास में किए गए दान (तिल, गुड़ और वस्त्र) का फल सामान्य दिनों से कई गुना ज्यादा मिलता है।
आप क्या कर सकते हैं?
अगर आप इस महीने का पूरा फायदा उठाना चाहते हैं, तो बहुत ताम-झाम की जरूरत नहीं है। बस रोज सुबह स्नान के बाद "ॐ नमो भगवते वासुदेवाय" मंत्र का जाप करें। शाम को तुलसी के पास घी का दीपक जलाएं और हो सके तो गीता का पाठ करें।
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