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जन्‍माष्‍टमी: मध्यरात्रि 12 बजे ही क्यों हुआ कृष्ण जन्म? गहरी है इसके पीछे की वजह

Published: Thu, 03 Sep 2026 01:42 PM (GMT+05:30)

जन्माष्टमी पर भगवान श्रीकृष्ण का जन्म मध्यरात्रि में क्यों हुआ, इसके पीछे कई गहरे धार्मिक और आध्यात्मिक कारण हैं। कंस ...और पढ़ें

जन्माष्टमी पर जानें कृष्ण जन्‍म की कथा। (Picture Credit- AI Generated)

जन्माष्टमी पर जानें कृष्ण जन्‍म की कथा। (Picture Credit- AI Generated)

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धर्म डेस्क, नई दिल्ली। 4 सितंबर को जन्माष्टमी का त्योहार है। इस दिन धूमधाम से भगवान श्रीकृष्ण का जन्मोत्सव मनाया जाता है। इस दिन से जुड़ी और भगवान श्रीकृष्ण के जन्म को लेकर बहुत सारी कथाएं प्रचलित हैं। हर साल जन्माष्टमी के अवसर पर भक्त आधी रात को भगवान कृष्ण का जन्मोत्सव मनाते हैं।

धार्मिक मान्यता के अनुसार, श्रीकृष्ण का जन्म भाद्रपद मास के कृष्ण पक्ष की अष्टमी तिथि को मध्यरात्रि में हुआ था। ऐसे में सभी के मन में सवाल उठता है कि श्रीकृष्ण भगवान विष्णु का स्वरूप थे, आखिर उन्होंने जन्म के लिए रात के 12 बजे का ही वक्त क्यों चुना? इसके पीछे कई धार्मिक और आध्यात्मिक अर्थ बताए जाते हैं। चलिए जानते हैं कि श्रीमद्भागवत महापुराण के दशम स्कंध में इस बारे में क्‍या लिखा है।

अंधकार को मिटाने के लिए

मध्यरात्रि के गहरे अंधकार में जब भगवान श्री कृष्ण का जन्म हुआ था, तब मथुरा में कंस के अत्याचार और अधर्म का प्रभाव बढ़ गया था। पूरे नगर में अज्ञान, भय और अधर्म का अंधकार फैला हुआ था। भगवान कृष्ण का प्रकट होना इस बात का संदेश देता है कि जब जीवन में अंधकार बढ़ जाता है, तब ईश्वर आशा और प्रकाश का मार्ग दिखाते हैं।

कंस के कारागार में हुआ जन्म

पौराणिक कथा के अनुसार, भगवान कृष्ण का जन्म मथुरा के राजा कंस के कारागार में देवकी और वासुदेव के यहां हुआ था। कंस को भविष्यवाणी से पता चला था कि देवकी की आठवीं संतान उसके विनाश का कारण बनेगी। इसी भय के कारण उसने देवकी और वासुदेव को कारागार में बंद कर दिया था। इस वजह से भगवान ने अपने श्रीकृष्ण अवतार के जन्‍म के लिए मध्‍यरात्रि का वक्‍त चुना था। ताकि उस वक्‍त सभी सिपाही और कंस आदि सो रहे होंगे और किसी को इस दिव्‍य जन्‍म के बारे में पता भी नहीं चलेगा।

वासुदेव को कृष्ण को गोकुल ले जाना था

भगवान कृष्ण के जन्म के तुरंत बाद वासुदेव को उन्हें कंस से बचाकर गोकुल पहुंचाना था। अअपने अवतार के जन्‍म से पहले ही भगवान श्री हरि विष्‍णु ने देवकी और नंदबाबा को अपने दिव्‍य दर्शन देकर यह बात बता दी थी कि अवतार के जन्म के बाद उन्हें क्या करना होगा। कथा के अनुसार, उस समय कारागार के पहरेदार गहरी नींद में सो गए और बंदीगृह के दरवाजे खुल गए। इसके बाद वासुदेव शिशु कृष्ण को लेकर यमुना पार करते हुए गोकुल पहुंचे, जहां उन्होंने उन्हें नंद बाबा और यशोदा के पास पहुंचाया। धार्मिक कथा में मध्यरात्रि का शांत और सुनसान समय इस गुप्‍त यात्रा के लिए अनुकूल बताया गया है।

निशिता काल का आध्यात्मिक महत्व

हिंदू पंचांग में मध्यरात्रि के आसपास के विशेष समय को निशिता काल कहा जाता है। धार्मिक मान्‍यताओं में इसे साधना और आध्यात्मिक चिंतन के लिए विशेष समय माना गया है। जन्माष्टमी पर इसी समय भगवान कृष्ण के जन्म का उत्सव मनाने की परंपरा है। मंदिरों में इस समय शंख, घंटियां और भजन-कीर्तन के साथ भगवान का जन्मोत्सव मनाया जाता है।

अधर्म पर धर्म की विजय का संदेश

श्रीकृष्ण का मध्यरात्रि में जन्म केवल एक धार्मिक घटना के रूप में नहीं, बल्कि एक गहरे आध्यात्मिक संदेश के रूप में भी देखा जाता है। जब संसार में अधर्म, अत्याचार और नकारात्मकता बढ़ती है, तब धर्म और सत्य की शक्ति का उदय होता है। भगवान कृष्ण के जीवन का उद्देश्य भी धर्म की रक्षा और अधर्म के विनाश से जोड़ा जाता है।

अत: श्री कृष्ण का मध्‍यरात्रि में जन्म होना हमें यह संदेश देता है कि अंधकार कितना भी गहरा क्यों न हो, प्रकाश का आगमन निश्चित है।

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