जन्माष्टमी 2026: महाभारत युद्ध से लेकर ब्रज लीला तक, श्रीकृष्ण ने कब-कब और किसे दिखाए अपने विराट रूप?
भगवान श्रीकृष्ण ने अपने जीवनकाल में कई लोगों को अपना दिव्य विराट स्वरूप दिखाया था। जिन्होंने उनके ईश्वरीय रूप का अनुभव किया।

भगवान कृष्ण का दिव्य रूप (Picture Credits- AI Images)

समय कम है?
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धर्म डेस्क, नई दिल्ली। हिंदू धर्म में भगवान श्रीकृष्ण अत्यंत पूजनीय देवताओं में से एक हैं। उन्हें भगवान विष्णु का आठवां अवतार माना जाता है, जो अच्छाई और बुराई के बीच संतुलन स्थापित करने के लिए आए पृथ्वी पर आए थे।
करीब 5000 साल से भी ज्यादा समय पहले मथुरा में भगवान श्रीकृष्ण का जन्म हुआ था। हर साल उनके जन्मोत्सव के उपलक्ष्य पर जन्माष्टमी मनाई जाती है, जो इस साल 4 सितंबर 2026, शुक्रवार को है।
हम सभी को पता है कि, महाभारत काल में कुरुक्षेत्र युद्ध के दौरान भगवान श्रीकृष्ण ने अर्जुन को अपने दिव्य विराट स्वरूप के दर्शन दिए थे। इसके अलावा क्या आप जानते हैं कि भगवान कृष्ण-कन्हैया ने कब-कब और किसे अपने ईश्वर स्वरूप में दर्शन दिए। आइए जानते हैं।

मां यशोदा (Maa Yashoda)
पौराणिक मान्यताओं के मुताबिक, माता यशोदा को भगवान श्रीकृष्ण ने विश्व रूप में दर्शन कराया था। जब उन्होंने श्रीकृष्ण को अपना मुंह खोलने को कहा, तब उनके मुंह के अंदर दांत नहीं, बल्कि पूरा ब्रह्मांड दिखाई दे रहा था।
भगवान श्रीकृष्ण के मुंह में सभी 14 लोक, ब्रह्मा, शिव, समुद्र, तारे उनके छोटे मुंह के अंदर थे, जिसके बाद मां यशोदा इस दृश्य को देखकर बेहोश हो गई।
अर्जुन (Arjun)
भगवद गीता के 11वें अध्याय के अनुसार जब अर्जुन युद्ध भूमि पर अपने परिजनों और भाइयों के साथ युद्ध करने की स्थिति में नहीं थे, तब भगवान श्रीकृष्ण ने उन्हें अपने दिव्य विराट स्वरूप के दर्शन कराए थे, जिसके बाद अर्जुन युद्ध लड़ने की लिए तैयार हुए।
बताया जाता है कि, जब श्रीकृष्ण ने अपना विराट रूप दिखाया तो हजारों सूरज एक साथ जल रहे थे, अर्जुन हाथ जोड़कर रोते हुए बोले- 'प्रभु मैं यह बर्दाश्त नहीं कर सकता, कृप्या फिर से कृष्ण बन जाओ।'
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अश्वत्थामा (Ashwatthama)
अष्ट चिरंजीवी में शामिल अश्वत्थामा जो गुरु द्रोणाचार्य का पुत्र भी था, माना जाता है कि वह आज भी पृथ्वी पर जीवित है। अश्वत्थामा ने पांडवों के वंश को खत्म करने और अपने पिता गुरु द्रोणाचार्य की मौत का बदला लेने के लिए उत्तरा के गर्भ में पल रहे परीक्षित को मारने की कोशिश की थी।
तब भगवान श्रीकृष्ण आए और अपने चक्र से उसका हथियार रोक दिया और असली विष्णु विराट स्वरूप दिखाया। तब भगवान श्रीकृष्ण ने श्राप दिया कि तुम हमेशा इस घाव के साथ जिओगे और किसी से प्यार नहीं मिलेगा।
भगवान ब्रह्मा (Lord Brahma)
पौराणिक मान्यताओं के मुताबिक, भगवान ब्रह्मा ने श्रीकृष्ण की शक्ति की परीक्षा लेने के लिए चुपके से सभी बछड़ों को उठा लिया। जब श्रीकृष्ण बछड़ों को ढूंढने गए तब ब्रह्मा ने बालकों को भी उठा लिया और उन्हें ब्रह्मलोक ले गए।
कुछ पल बाद वे वापस आए तो धरती पर एक साल बीत चुका था। ब्रह्मा जी जब धरती पर आए तो काफी हैरान हो गए क्योंकि जिन बालकों और बछड़ों को वे ले गए थे वे सभी धरती पर खेल रहे थे। जिसके बाद भगवान श्रीकृष्ण उनके सामने विराट स्वरूप में आए और ब्रह्मा जी से कहा कि इस दुनिया में सब कुछ उनसे ही उत्पन्न हुआ है।
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उद्धव (Uddhav)
उद्धव भगवान श्रीकृष्ण के भाई थे। धरती छोड़ने से पहले श्रीकृष्ण ने उद्धव को अपने विराट स्वरूप के दर्शन कराए और उन्हें उद्धव गीता दी, वह ज्ञान जो अर्जुन को भी कभी नहीं मिला।
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