ससुराल में मान-सम्मान या बात-बात पर तनाव? कुंडली का आठवां भाव खोलता है सारे राज
कुंडली का आठवां भाव ससुराल पक्ष के साथ आपके संबंधों को दर्शाता है। विभिन्न ग्रहों की आठवें भाव में स्थिति आपके ससुराल के साथ रिश्ते को कैसे प्रभावित ...और पढ़ें

कुंडली का 8वां भाव बताएगा कैसा होगा ससुराल? (AI-Generated Image)

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धर्म डेस्क, नई दिल्ली। क्या आपको पता है कि, ज्योतिष शास्त्र में 8वां भाव उम्र, रहस्य, आकस्मिक घटनाओं और गहरे परिवर्तनों का मुख्य घर माना जाता है। इसे मृत्यु भाव भी कहा जाता है।
इसके अलावा 8वां भाव आपके ससुराल पक्ष के साथ आपके संबंधों की कहानी को भी बयां करता है, जैसे ससुराल में आपका परिवार के साथ कैसा रिश्ता रहेगा, क्या वहां आपको अपार प्रेम और धन की प्राप्ति होगी या फिर वैचारिक मतभेद बने रहेंगे?
यह पूरी तरह से इस बात पर निर्भर करता है कि आपकी कुंडली के आठवें घर में कौन-सा ग्रह विराजमान है।
अष्टम में सूर्य
कुंडली के अष्ट भाव में सूर्य के होने से अहंकार या वैचारिक टकराव की स्थिति दूर होती है। ससुर या परिवार के किसी बड़े पुरुष सदस्य से मतभेद होने की संभावना भी बनी रहती है।
इन सब के बावजूद ससुराल पक्ष काफी प्रतिष्ठित, सरकारी सेवा से जुड़ा या समाज में रसूखदार होता है।
अष्टम में चंद्रमा
अष्ट भाव में चंद्रमा होने से ससुराल पक्ष के साथ एक गहरा भावनात्मक जुड़ाव होने के साथ ससुराल के लोग स्वभाव से काफी देखभाल करने वाले भी हो सकते हैं।
दरअसल चंद्रमा के प्रभाव से बार-बार मन बदलता रहता है, जिससे रिश्ते नरम होने के साथ स्वभाव में थोड़ी अस्थिरता बनी रह सकती है।
अष्ट भाव में मंगल
अष्ट भाव में मंगल होने से ससुराल पक्ष में तनाव, लड़ाई-झगड़े और क्रोध की स्थिति देखने को मिल सकती है। यहां मांगलिक दोष का प्रभाव साफतौर पर दिखाई देता है, जिससे ससुराल पक्ष से टकराव या विवाद की स्थिति देखने को मिल सकती है।

अष्टम भाव में बुध
कुंडली के अष्टम भाव में बुध के विराजमान होने से बेहतरीन बातचीत और गहरी समझदारी बनती है। आप उनके साथ मिलकर किसी नए बिजनेस की शुरुआत करने के साथ आर्थिक लाभ से जुड़ी योजना बना सकते हैं।
अष्ट भाव में गुरु
कुंडली में अष्ट भाव में गुरु के होने से ससुराल पक्ष से काफी सहयोग मिलने के साथ सम्मान भी प्राप्त होता है। शादी के बाद ससुराल से आर्थिक लाभ, धन और सही मार्गदर्शन की प्राप्ति होती है। परिवार धार्मिक और अच्छे संस्कारों वाला होता है।
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अष्ट भाव में शुक्र
अष्ट भाव में शुक्र ससुराल और जीवनसाथी के परिवार के साथ बेहतरीन तालमेल बनाए रखने में मदद करता है। रिश्तों में प्यार, सम्मान और आदर का भाव बना रहता है।
अष्ट भाव में शनि
कुंडली में अष्टम भाव में शनि होने के कारण शुरुआत में ससुराल में चुनौतियों का सामना करना पड़ सकता है। इस स्थिति में जिम्मेदारियां बढ़ने के साथ धीरे-धीरे चीजें आपके पक्ष में होते चली जाएगी।
अष्ट भाव में राहु
अष्ट भाव में राहु के होने से ससुराल में अजीबो गरीब घटनाएं घटित होने के साथ उलझन, भ्रम या गलतफहमियां देखने को मिल सकती है। इसके अलावा व्यक्ति का ससुराल अलग संस्कृति और विदेश से जुड़ा हो सकता है।
अष्ट भाव में केतु
अष्ट भाव में केतु अलगाव का प्रतीक है, इसलिए यहां होने से ससुराल पक्ष से दूरी या अलगाव की भावना देखने को मिल सकती है। व्यक्ति का मन ससुराल वालों के साथ ज्यादा नहीं लगता और वह हमेशा खुद को अकेला महसूस करता है।
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