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    Lohri 2026: 13 जनवरी को जलेगी लोहड़ी की पवित्र अग्नि, नोट कर लें पूजा का सबसे शुभ मुहूर्त

    Updated: Fri, 09 Jan 2026 05:24 PM (IST)

    लोहड़ी 2026 खुशियों और सकारात्मक बदलाव का संदेश लेकर आती है। यह पर्व हमें सिखाता है कि कैसे प्रकृति के साथ तालमेल बिठाकर हम अपनी परंपराओं को जीवित रख ...और पढ़ें

    इस साल कब मनेगी लोहड़ी?: Lohri 2026

    इस साल कब मनेगी लोहड़ी?: Lohri 2026

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    जानिए मुख्य बातें और खबर का सार एक नजर में

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    धर्म डेस्क, नई दिल्ली। उत्तर भारत, विशेषकर पंजाब और हरियाणा का सबसे लोकप्रिय त्यौहार 'लोहड़ी' आने वाला है। यह पर्व न केवल कड़ाके की ठंड के कम होने का संकेत देता है, बल्कि नई फसल की खुशी और आपसी भाईचारे का प्रतीक भी है। साल 2026 में लोहड़ी को लेकर उत्साह अभी से दिखने लगा है।

    लोहड़ी 2026 की सही तारीख और शुभ मुहूर्त

    हर साल की तरह, लोहड़ी मकर संक्रांति से ठीक एक दिन पहले मनाई जाती है। साल 2026 में लोहड़ी 13 जनवरी, मंगलवार को मनाई जाएगी।

    द्रिक पंचांग के अनुसार, इस वर्ष लोहड़ी का पर्व 13 जनवरी, 2026 को मनाया जाएगा, जो कि मंगलवार का दिन है। जहां लोहड़ी का पारंपरिक उत्सव 13 जनवरी की रात को होगा। वहीं, लोहड़ी संक्रांति का मुहूर्त 14 जनवरी, 2026 को दोपहर 03:13 बजे शुरू होगा। इस गणना के आधार पर, 13 जनवरी की शाम को अग्नि प्रज्वलित कर लोहड़ी मनाना बेहद शुभ माना जा रहा है।

    क्यों मनाई जाती है लोहड़ी?

    लोहड़ी मुख्य रूप से रबी की फसल (खासकर गेहूं और सरसों) की कटाई से जुड़ा पर्व है। किसान इस दिन अग्नि देव को नई फसल अर्पित कर आभार जताते हैं। इसके साथ ही, अगली अच्छी पैदावार की कामना करते हैं। यह दिन सूर्य के उत्तरायण होने की पूर्व संध्या भी है, जिससे दिन लंबे और रातें छोटी होने लगती हैं।

    Lohri Significance

    (Image Source: AI-Generated)

    दुल्ला भट्टी: लोहड़ी की अधूरी कहानी

    लोहड़ी का त्योहार 'दुल्ला भट्टी' के जिक्र के बिना अधूरा है। लोक कथाओं के अनुसार, मुगल काल में दुल्ला भट्टी पंजाब के एक नायक थे, जिन्होंने गरीब लड़कियों (सुंदरी और मुंदरी) को ज़मींदारों के चंगुल से छुड़ाया और उनका विवाह करवाया था। आज भी लोहड़ी की आग के चारों ओर लोग "सुंदर मुंदरिये हो!" गाकर दुल्ला भट्टी की वीरता को याद करते हैं।

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    उत्सव का पारंपरिक तरीका

    लोहड़ी की रात लोग खुले मैदान में इकट्ठा होते हैं और लकड़ियों व उपलों से विशाल अग्नि जलाते हैं। इस पवित्र अग्नि में तिल, गुड़, गजक, मूंगफली और मक्का (पॉपकॉर्न) डाले जाते हैं। लोग ढोल की थाप पर भांगड़ा और गिद्दा करते हैं। घरों में विशेष रूप से 'मक्के की रोटी और सरसों का साग' बनाया जाता है।

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    अस्वीकरण: इस लेख में बताए गए उपाय/लाभ/सलाह और कथन केवल सामान्य सूचना के लिए हैं। दैनिक जागरण तथा जागरण न्यू मीडिया यहां इस लेख फीचर में लिखी गई बातों का समर्थन नहीं करता है। इस लेख में निहित जानकारी विभिन्न माध्यमों/ज्योतिषियों/पंचांग/प्रवचनों/मान्यताओं/धर्मग्रंथों/दंतकथाओं से संग्रहित की गई हैं। पाठकों से अनुरोध है कि लेख को अंतिम सत्य अथवा दावा न मानें एवं अपने विवेक का उपयोग करें। दैनिक जागरण तथा जागरण न्यू मीडिया अंधविश्वास के खिलाफ है।