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    भगवान राम को आखिर क्यों लेनी पड़ी सरयू में जल समाधि? पढ़ें रामायण का भावुक प्रसंग

    Updated: Tue, 09 Jun 2026 02:00 PM (IST)

    वाल्मीकि रामायण के उत्तर कांड में भगवान श्रीराम के सरयू नदी में जल समाधि लेने का मार्मिक प्रसंग वर्णित है। लक्ष्मण के त्याग और माता सीता के धरती में स ...और पढ़ें

    लक्ष्मण का त्याग और राम की समाधि का प्रसंग (AI Generated Image)

    लक्ष्मण का त्याग और राम की समाधि का प्रसंग (AI Generated Image)  

    HighLights

    1. यमराज से गुप्त वार्ता के कारण लक्ष्मण का त्याग

    2. महर्षि दुर्वासा के श्राप से अयोध्या को बचाया लक्ष्मण ने

    3. माता सीता के धरती में समाने से राम हुए विरक्त

    धर्म डेस्क, नई दिल्ली। हिंदू पौराणिक कथाओं और रामायण के मुताबिक, भगवान श्रीराम का जीवन मर्यादा और धर्म का सर्वोच्च प्रतीक है। श्रीराम जी को मर्यादा पुरुषोत्तम माना जाता है। रामायण में भगवान श्रीराम के द्वारा सरयू नदी में जल समाधि लेने का वर्णन देखने को मिलता है।

    यह प्रसंग बेहद भावुक है। अब आपके मन में यह सवाल आ रहा होगा कि आखिर किस कारण भगवान श्रीराम ने जल समाधि ली, तो चलिए इस आर्टिकल में आपको विस्तार से बताते हैं वाल्मीकि रामायण के उत्तर कांड के इस खास प्रसंग के बारे में।

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    (AI Generated Image)  

    यमराज ने धरण किया तपस्वी का रूप

    रामायण के अनुसार, एक बार यमराज ने भगवान श्रीराम से मिलने के लिए तपस्वी का रूप धारण किया। तपस्वी ने राम जी से कहा कि हमारे बीच गुप्त वार्ता होगी। इस दौरान तपस्वी ने राम जी के सामने शर्त रखी थी कि वार्ता के दौरान जो अंदर आएगा, तो उस द्वारपाल को मृत्यु दंड दिया जाएगा। इसके बाद राम जी ने कक्ष के बाहर का द्वारपाल लक्ष्मण जी को बनाया। 

    राम जी और यमराज की वार्ता हुई भंग

    इस दौरान राम जी मिलने के लिए महर्षि दुर्वासा वहां पहुंचे और लक्ष्मण जी ने महर्षि दुर्वासा को अंदर से जाने से मना कर दिया, लेकिन महर्षि दुर्वासा जिद करने लगे। महर्षि दुर्वासा ने कहा कि अगर मुझे अंदर नहीं जाने दिया जाएगा, तो मैं पूरी आयोध्या को भस्म करने का श्राप दूंगा। इसलिए लक्ष्मण जी ने महर्षि दुर्वासा कक्ष में जाने दिया। महर्षि दुर्वासा के कक्ष में आने पर राम जी और यमराज की वार्ता भंग हो जाती है।

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    श्रीराम जी ने सरयू नदी में ली जल समाधि

    इसके बाद राम जी ने वचन तोड़ने पर लक्ष्मण जी का त्याग कर दिया। लक्ष्मण जी ने सरयू नदी के तट पर जाकर जल समाधि ली। लक्ष्मण जी के द्वारा जल समाधि लेने पर राम जी बेहद दुखी हुए और उन्हें पता चला गया कि उनके अवतार लेने मुख्य उद्देश्य पूरा हो गया है। इसके बाद भवगान श्रीराम ने सरयू नदी में जल समाधि ली। भगवान श्रीराम के द्वारा सरयू नदी में जल समाधि लेने का प्रसंग वाल्मीकि रामायण के उत्तर कांड में देखने को मिलता है।

    लक्ष्मण जी के द्वारा जल समाधि लेने और माता सीता के धरती में समाने के बाद भगवान श्रीराम ने लंबे समय तक जीवन व्यतीत किया। इसके बाद उनको लगा कि उनके अवतार लेने का मुख्य उद्देश्य पूरा हो गया है, तो ऐसे में भगवान श्रीराम सरयू नदी के किनारे में जल समाधि ली। जल समाधि लेने के बाद भगवान श्रीराम विष्णु स्वरूप में बैकुंठ लोक पहुंच गए।

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