Mahashivratri 2026: यहां शिव-पार्वती ने लिए थे सात फेरे, जानिए इस धाम का रहस्य जहां शिव-पार्वती का हुआ था मिलन
उत्तराखंड का त्रियुगीनारायण मंदिर (Triyuginarayan Temple) शिव और पार्वती के विवाह का प्रतीक है, जहां उनकी शादी हुई थी। इस प्राचीन मंदिर में एक अखंड अग ...और पढ़ें

Mahashivratri 2026: त्रियुगीनारायण मंदिर के रहस्य।
HighLights
महाशिवरात्रि का पर्व शिव और शक्ति के मिलन का प्रतीक है
महाशिवरात्रि पर व्रत रखने से शुभ फलों की प्राप्ति होती है
इस दिन शिव धाम दर्शन के लिए जरूर जाना चाहिए
धर्म डेस्क, नई दिल्ली। Mahashivratri 2026: महाशिवरात्रि का पर्व शिव और शक्ति के मिलन का प्रतीक है। जब हम शिव-पार्वती के विवाह की बात करते हैं, तो हिमालय की गोद में बसा त्रियुगीनारायण मंदिर जहन में आ जाता है। उत्तराखंड के रुद्रप्रयाग जिले में स्थित यह प्राचीन मंदिर न केवल अपनी सुंदरता के लिए, बल्कि अपने चमत्कारों व रहस्य के लिए भी जाना जाता है। आइए त्रियुगीनारायण मंदिर की प्रमुख बातों को जानते हैं, जो इस प्रकार हैं -

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अखंड अग्नि का रहस्य
त्रियुगीनारायण मंदिर (Triyuginarayan Temple) की सबसे बड़ी विशेषता यहां प्रज्वलित अखंड अग्नि है। ऐसी मान्यता है कि यह अग्नि उसी हवन कुंड की है, जिसके फेरे भगवान शिव और माता पार्वती ने लिए थे। तीन युग बीत जाने के बाद भी यह अग्नि आज तक जल रही है। इसी कारण इसे अखंड धूनी साहिब भी कहा जाता है। भक्त यहां लकड़ी चढ़ाते हैं और इसकी भस्म को आशीर्वाद के रूप में अपने साथ ले जाते हैं, जो वैवाहिक जीवन में सुख-शांति का प्रतीक मानी जाती है।
साक्षी थे श्री हरि
पौराणिक कथाओं के अनुसार, जब माता पार्वती ने शिव को पति रूप में पाने के लिए कठोर तपस्या की, तब इसी स्थान पर उनका विवाह संपन्न हुआ। भगवान विष्णु ने इस विवाह में माता पार्वती के भाई की भूमिका निभाई थी। ब्रह्मा जी इस दिव्य विवाह के पुरोहित बने थे। मंदिर के पास स्थित तीन कुंड ब्रह्म कुंड, विष्णु कुंड और रुद्र कुंड उसी समय के साक्षी माने जाते हैं, जहां देवताओं ने विवाह से पहले स्नान किया था।
अखंड सौभाग्य का प्रतीक
त्रियुगीनारायण धाम को अखंड सौभाग्य देने वाला धाम माना जाता है। इस धाम में देश-विदेश से श्रद्धालु आकर विवाह करना सौभाग्य की बात मानते हैं। महाशिवरात्रि के दिन यहां भक्तों की भारी भीड़ उमड़ती है। श्रद्धालु मंदिर की परिक्रमा करते हैं और उस स्थान के दर्शन करते हैं जहां श्री हरि विष्णु और ब्रह्मा जी ने इस विवाह की रस्में पूरी की थीं।
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दर्शन के लिए जरूर जाएं इस धाम
यह मंदिर केदारनाथ मार्ग पर सोनप्रयाग से लगभग 12 किलोमीटर की दूरी पर स्थित है। महाशिवरात्रि के शुभ अवसर पर अगर आप शिव-शक्ति के इस पवित्र स्थान पर जाना चाहते हैं, तो त्रियुगीनारायण की यात्रा आपके लिए आध्यात्मिक शांति और रहस्य का संगम होगी। साथ ही इसके दर्शन मात्र से भक्तों के सभी कष्टों का अंत हो जाता है।
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