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    मेष संक्रांति 2026: आरती के बिना अधूरी है सूर्य पूजा, जरूर करें इसका पाठ

    Updated: Tue, 14 Apr 2026 09:14 AM (GMT+05:30)

    मेष संक्रांति (Mesh Sankranti 2026) का दिन भगवान सूर्य की पूजा के लिए समर्पित है। ...और पढ़ें

    Mesh Sankranti 2026: मेष संक्रांति आरती। (Ai Generated Image)

    Mesh Sankranti 2026: मेष संक्रांति आरती। (Ai Generated Image)

    HighLights

    1. मेष संक्रांति का बहुत बड़ा धार्मिक महत्व है

    2. इस दिन सूर्य देव की पूजा होती है

    3. इस दिन गंगा स्नान से अक्षय फलों की प्राप्ति होती है

    धर्म डेस्क, नई दिल्ली। ज्योतिष शास्त्र में मेष संक्रांति (Mesh Sankranti 2026) का दिन एक बड़े बदलाव का प्रतीक माना जाता है। इस दिन सूर्य देव अपनी उच्च राशि यानी मेष में प्रवेश करते हैं, जिससे सौर नववर्ष का आरंभ होता है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, सूर्य देव की पूजा में आरती का पाठ जरूर करना चाहिए। ऐसा कहा जाता है कि विधि-विधान से पूजा करने के बाद अगर आरती न की जाए, तो पूजा का पूर्ण फल प्राप्त नहीं होता है। ऐसे में आइए भक्ति भाव के साथ भगवान सूर्य देव की आरती करते हैं, जो इस प्रकार हैं -

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    ।।भगवान सूर्य देव की आरती।। (Bhagwan Surya Dev Ji Ki Aarti)

    ॐ जय सूर्य भगवान, जय हो दिनकर भगवान।

    जगत् के नेत्रस्वरूपा, तुम हो त्रिगुण स्वरूपा।

    धरत सब ही तव ध्यान, ॐ जय सूर्य भगवान।।

    ।।ॐ जय सूर्य भगवान...।।

    सारथी अरुण हैं प्रभु तुम, श्वेत कमलधारी। तुम चार भुजाधारी।।

    अश्व हैं सात तुम्हारे, कोटि किरण पसारे। तुम हो देव महान।।

    ।।ॐ जय सूर्य भगवान...।।

    ऊषाकाल में जब तुम, उदयाचल आते। सब तब दर्शन पाते।।

    फैलाते उजियारा, जागता तब जग सारा। करे सब तब गुणगान।।

    ।।ॐ जय सूर्य भगवान...।।

    संध्या में भुवनेश्वर अस्ताचल जाते। गोधन तब घर आते।।

    गोधूलि बेला में, हर घर हर आंगन में। हो तव महिमा गान।।

    ।।ॐ जय सूर्य भगवान...।।

    देव-दनुज नर-नारी, ऋषि-मुनिवर भजते। आदित्य हृदय जपते।।

    स्तोत्र ये मंगलकारी, इसकी है रचना न्यारी। दे नव जीवनदान।।

    ।।ॐ जय सूर्य भगवान...।।

    तुम हो त्रिकाल रचयिता, तुम जग के आधार। महिमा तब अपरम्पार।।

    प्राणों का सिंचन करके भक्तों को अपने देते। बल, बुद्धि और ज्ञान।।

    ।।ॐ जय सूर्य भगवान...।।

    भूचर जलचर खेचर, सबके हों प्राण तुम्हीं। सब जीवों के प्राण तुम्हीं।।

    वेद-पुराण बखाने, धर्म सभी तुम्हें माने। तुम ही सर्वशक्तिमान।।

    ।।ॐ जय सूर्य भगवान...।।

    पूजन करतीं दिशाएं, पूजे दश दिक्पाल। तुम भुवनों के प्रतिपाल।।

    ऋतुएं तुम्हारी दासी, तुम शाश्वत अविनाशी। शुभकारी अंशुमान।।

    ।।ॐ जय सूर्य भगवान...।।

    ॐ जय सूर्य भगवान, जय हो दिनकर भगवान।

    जगत् के नेत्रस्वरूपा, तुम हो त्रिगुण स्वरूपा।स्वरूपा।।

    धरत सब ही तव ध्यान, ॐ जय सूर्य भगवान।।

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    अस्वीकरण: इस लेख में बताए गए उपाय/लाभ/सलाह और कथन केवल सामान्य सूचना के लिए हैं। दैनिक जागरण यहां इस लेख फीचर में लिखी गई बातों का समर्थन नहीं करता है। इस लेख में निहित जानकारी विभिन्न माध्यमों/ज्योतिषियों/पंचांग/प्रवचनों/मान्यताओं/धर्मग्रंथों/दंतकथाओं से संग्रहित की गई हैं। पाठकों से अनुरोध है कि लेख को अंतिम सत्य अथवा दावा न मानें एवं अपने विवेक का उपयोग करें।