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    आखिर क्यों कहा जाता है कि 'नर्मदा का हर कंकर है शंकर', कैसे साधारण पत्थर बन गए पूजनीय 'शिवलिंग'?

    Updated: Sat, 11 Apr 2026 01:37 PM (IST)

    भारत में ऐसी कई नदियां हैं, जिसके अस्तिस्व की कथा पौराणिक काल से जुड़ी हुई है। इसी तरह नर्मदा नदी की उत्पित्ति की कथा भगवान शिव से संबंधित है। ...और पढ़ें

    जानें नर्मदेश्वर शिवलिंग की पौराणिक कथा (Picture Credit- AI Generated)

    जानें नर्मदेश्वर शिवलिंग की पौराणिक कथा (Picture Credit- AI Generated)

    HighLights

    1. भगवान शिव के पसीने से हुआ नर्मदा नदी का उद्गम

    2. नर्मदा की तपस्या से प्रसन्न हुए थे भगवान शिव

    3. शिव जी के बाण से नदी के पत्थर बन गए शिवलिंग

    धर्म डेस्क, नई दिल्ली। नर्मदा नदी भारत की पवित्र माने जानी वाली नदियों में से एक है। कहा जाता है कि "नर्मदा का हर कंकर शंकर है।" नर्मदा के तट पर पाए जाने वाले शिवलिंग के आकार के पत्थरों को 'नर्मदेश्वर शिवलिंग' या 'बाणलिंग' कहा जाता है और यह सभी पत्थर स्वयंभू (स्वयं उत्पन्न होने वाला) शिवलिंग माने जाते हैं। इसके पीछे एक बड़ी ही खास कथा भी मिलती है, जिसके बारे में आज हम आपको बताने जा रहे हैं।

    कैसे हुआ नर्मदा नदी का उद्गम?

    नर्मदा नदी का उद्गम से जुड़ी कथा स्कंद पुराण में मिलती है, जिसके अनुसार, एक बार अमरकंटक में भगवान शिव घोर तपस्या में लीन थे। उस कठोर तप के त से उनके शरीर से पसीने की बूंदें गिरने लगीं। शिव जी के इसी पसीने की बूंदों से पवित्र नर्मदा नदी की उत्पत्ति हुई। शिव जी से उत्पत्ति के कारण नर्मदा को 'शिवप्रिया' और 'शंकरकन्या' भी कहा जाता है।

    इसलिए कहलाते हैं 'बाणलिंग'

    पौराणिक कथा के अनुसार, जब भगवान शिव ने राक्षस त्रिपुरासुर का वध किया था, तो शिव जी के धनुष से एक अत्यधिक शक्तिशाली और दिव्य बाण नर्मदा नदी के जल में जा गिरा। इसी बाण के तेज से नर्मदा के जल में मौजूद पत्थर शिवलिंग के रूप में परिवर्तित हो गए। इसी कारण नर्मदा से निकलने वाले शिवलिंगों को 'बाणलिंग' भी कहते हैं।

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    (Picture Credit- AI Generated)

    भगवान शिव ने दिया यह वरदान

    नर्मदा के पत्थरों के शिवलिंग बनने के पीछे एक और बहुत ही रोचक कथा मिलती है। कथा के अनुसार, एक बार नर्मदा नदी ने अपनी कठोर तपस्या से ब्रह्मा जी को प्रसन्न किया और यह वरदान मांगा कि मुझे भी 'गंगा' के समान पवित्रता और प्रसिद्धि मिले। इस पर ब्रह्मा जी ने कहा कि जब कोई अन्य देवता भगवान शिव और विष्णु जी की बराबरी कर लेगा, तभी कोई दूसरी नदी गंगा के समान पवित्र हो पाएगी।

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    इस बात को सुनकर नर्मदा ने भगवान शिव की आराधना करनी शुरू कर दी। नर्मदा की इस अटूट भक्ति को देखकर महादेव प्रसन्न हुए और नर्मदा के सामने प्रकट हुए। तब नर्मदा ने भगवान शिव से यह वरदान मांगा कि को उनकी भक्ति सदैव शिव के चरणों में बनी रहे। नर्मदा की इस निस्वार्थ और निष्काम भक्ति से शिव शंकर ने उन्हें वरदान दिया कि "तुम्हारे तट पर जितने भी पत्थर हैं, वे आज से शिवलिंग कहलाएंगे और पूजे जाएंगे।"

    नर्मदेश्वर शिवलिंग के अद्भुत लाभ

    • अन्य शिवलिंग की तुलना में नर्मदेश्वर शिवलिंग का पूजन अत्यंत फलदायी माना गया है, क्योंकि नर्मदा तट से निकले शिवलिंगों में स्वयंभू दिव्य ऊर्जा होती है।
    • रोजाना विधि-विधान से नर्मदेश्वर शिवलिंग की पूजा-अर्चना करने से घर-परिवार में सुख, शांति और समृद्धि बनी रहती है।
    • मान्यता है कि रोजाना इस पवित्र शिवलिंग पर जल अर्पित करने और आराधना करने से जीवन के सभी प्रकार के रोग, दोष और कष्ट दूर होते हैं।
    • इस शिवलिंग की एक और खास बात यह है कि सामान्यतः शिवलिंग पर चढ़ी वस्तु ग्रहण नहीं की जाती, लेकिन नर्मदेश्वर शिवलिंग का प्रसाद ग्रहण किया जा सकता है।

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    अस्वीकरण: इस लेख में बताए गए उपाय/लाभ/सलाह और कथन केवल सामान्य सूचना के लिए हैं। दैनिक जागरण यहां इस लेख फीचर में लिखी गई बातों का समर्थन नहीं करता है। इस लेख में निहित जानकारी विभिन्न माध्यमों/ज्योतिषियों/पंचांग/प्रवचनों/मान्यताओं/धर्मग्रंथों/दंतकथाओं से संग्रहित की गई हैं। पाठकों से अनुरोध है कि लेख को अंतिम सत्य अथवा दावा न मानें एवं अपने विवेक का उपयोग करें। दैनिक जागरण के खिलाफ है।