एक लोटा जल से कम करें 'नवग्रह दोष' ! शिवलिंग पर जल में मिलाकर चढ़ाएं ये चीजें, जानें किस ग्रह के लिए क्या है उपाय
सावन के महीने में शिवलिंग पर विशेष जल चढ़ाकर नवग्रह दोष से मुक्ति पाई जा सकती है। प्रत्येक ग्रह के ...और पढ़ें

सावन में नवग्रह दोष से पाएं मुक्ति । (Picture Credit- AI Generated)

समय कम है?
जानिए मुख्य बातें और खबर का सार एक नजर में
धर्म डेस्क, नई दिल्ली। सावन के महीने में शिव जी को प्रसन्न करके आप नवग्रह दोष से मुक्ति भी पा सकते हैं। इसके लिए शिवलिंग पर जल अर्पित करते समय कुछ विशेष चीजों को उसमें मिला लें। मान्यता है कि सूर्य, चंद्र, मंगल, बुध, गुरु, शुक्र, शनि, राहु और केतु व्यक्ति के जीवन पर अलग-अलग प्रकार का प्रभाव डालते हैं। इनके कमजोर या पीडि़त होने पर व्यक्ति के जीवन पर गंभीर असर देखने को मिलते हैं।
यदि नवग्रहों में से कोई ग्रह आपकी कुंडली में कमजोर है, तो उसे मजबूत बनाने के लिए सावन में 11 दिनों तक ग्रह के हिसाब से शिवलिंग पर विशेष जल से अभिषेक करें। ऐसा करने से ग्रह दोष के प्रभाव कम हो जाएंगे और आप जीवन में सुख और समृद्धि प्राप्त कर पाएंगे। तो चलिए जानते हैं कि किस ग्रह को मजबूत बनाने के लिए कैसा जल शिवलिंग को अर्पित करना चाहिए।
सूर्य दोष
सूर्य को सभी ग्रहों का पिता माना गया है। इससे हमें आत्मविश्वास, ऊर्जा, प्रतिष्ठा और जीवन शक्ति मिलती है। यदि आपका सूर्य कमजोर है तो रोजाना शिवलिंग पर जल में लाल चंदन मिलाकर अभिषेक करें और इसी जल से सूर्य को अर्घ्य भी दें। ऐसा करने से आपका सूर्य मजबूत हो जाएगा।
चंद्र दोष
चंद्रमा को मन, भावनाओं और मानसिक शांति से जोड़ा जाता है। यदि किसी जातक का चंद्रमा पीडि़त है, तो रोजाना जल में अक्षत अर्थात चावल मिलाकर शिवलिंग पर चढ़ाएं। ऐसा करने से भगवान शिव अति प्रसन्न हो जाते हैं।
मंगल दोष
मंगल को साहस, शक्ति और ऊर्जा का कारक माना जाता है। यदि आपका मंगल कमजोर है, तो मिट्टी के कलश में गुड़ और लाल चंदन मिलाकर शिवलिंग पर अर्पित करने से आपको बहुत लाभ मिलेगा।
बुध दोष
बुध ग्रह को बुद्धि, वाणी और संचार का प्रतीक माना जाता है। बुध के कमजोर होने पर आपको जल में दूर्वा यानी दूब का रस मिलाकर शिवलिंग पर चढ़ाना चाहिए। इससे बुध मजबूत होता है।
गुरु दोष
गुरु को ज्ञान, शिक्षा, धर्म और समृद्धि से संबंधित माना जाता है। यदि गुरु पीड़ित या अशुभ स्थिति में हैं तो जल में गेंदे के फूल और हल्दी मिलाकर शिवलिंग और केले के वृक्ष की जड़ में अर्पित करना चाहिए।
शुक्र दोष
शुक्र को सुख-सुविधा, सौंदर्य और वैवाहिक जीवन से जोड़ा जाता है। शुक्र के कमजोर होने पर जीवन से सारे सुख और समृद्धी चली जाती है। ऐसे में जल में शक्कर घोलकर शिवलिंग पर चढ़ाने से बहुत फायदा होता है।
शनि दोष
शनि को कर्म और अनुशासन से संबंधित ग्रह माना जाता है। शनि के कमजोर होने पर जल में शक्कर और काले तिल मिलाकर पीपल के वृक्ष की जड़ में चढ़ाएं। इसी जल से शिवलिंग का जलाभिषेक करें। शनि के गंभीर प्रभाव से आपको मुक्ति मिल जाएगी।
राहु दोष
राहु को छाया ग्रह माना जाता है। इसके लिए जल में उड़द यानी काली उड़द डालकर शिवलिंग पर अर्पित करने से बहुत लाभ मिलता है।
केतु दोष
केतु को भी छाया ग्रह माना जाता है। केतु को शांत करने के लिए जल में सप्तधान्य मिलाकर शिवलिंग पर चढ़ाने से केतु शांत होता है।
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