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    पंचक में मृत्यु क्यों मानी जाती है अशुभ; इस काल में मृत्यु होने पर परिवार पर क्यों मंडराता है संकट?

    Updated: Wed, 22 Jul 2026 06:30 PM (IST)

    हिंदू धर्म में पंचक काल का विशेष महत्व है, खासकर मृत्यु के बाद के संस्कारों में। शास्त्रों के अनुसार, पंचक में मृत्यु होने पर परिवार पर संकट से बचने औ ...और पढ़ें

    पंचक में अशुभ मृत्यु का क्या है रहस्य? (Picture Credit: AI Generated)

    पंचक में अशुभ मृत्यु का क्या है रहस्य? (Picture Credit: AI Generated)

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    धर्म डेस्क, नई दिल्ली। हिंदू धर्म में मृत्यु के बाद होने वाले संस्कारों का अत्यंत महत्व है। गरुड़ पुराण और ज्योतिष शास्त्र जैसे ग्रंथों के मुताबिक, किसी व्यक्ति की मौत किसी नक्षत्र या समय में हुई है, इसका असर परिवार और मृत आत्माओं की यात्रा पर पड़ता है। इसी को ध्यान में रखते हुए पंचक काल को काफी अहम माना गया है। जुलाई महीने में 2 बार पंचक पड़ रहा है।

    जुलाई महीने का पहला पंचक 4 जुलाई, शनिवार से शुरू होकर 8 जुलाई बुधवार तक चला थ। जबकि जुलाई का दूसरा पंचक 31 जुलाई शुक्रवार को शुरू होकर 4 अगस्त 2026 तक रहेगा। एस्ट्रोपत्री के ज्योतिषियों के अनुसार, पंचक दोष हमें सतर्कता और विधि-विधान का महत्व सिखाता है। शास्त्रों की परंपराएं डर पैदा करने के लिए नहीं, बल्कि भावी संकटों से परिवार की रक्षा और आत्मा की शांति के लिए बनाई गई हैं।

    पंचक दोष और सनातन विधान

    जीवन और मृत्यु ईश्वर के हाथ में है, पर पंचक का विधान हमें यह याद दिलाता है कि भक्ति और उचित कर्मकांड से बड़े से बड़े दोष और संकट का निवारण संभव है।

    सनातन परंपरा में पंचक के दौरान मृत्यु होने पर विशेष शास्त्रीय उपाय बताए गए हैं-

    कुश के पुतलों का दाह संस्कार- पंचक काल में मृत आत्मा के साथ आटे या कुश के बने पुतलों का दाह संस्कार किया जाता है। ऐसा करने से पंचक दोष पूरी तरह समाप्त हो जाता है।

    संकटों से रक्षा- पुतलों का दाह संस्कार कर पंचक दोष का निवारण करना यह दर्शाता है कि सनातन परंपरा में हर समस्या का समाधान, शांति का मार्ग और संतुलन बनाए रखने का विधान मौजूद है।

    विशेष दान-पुण्य- पंचक के दौरान अगर किसी की मौत हो जाए, तो उनके परिजनों को मृतक के नाम से ब्राह्मणों को दान करना चाहिए। इसमें अन्न दान से लेकर वस्त्र और छाया पात्र दान तक शामिल है।

    गरुड़ पुराण का पाठ- माना जाता है कि, घर में किसी की मृत्यु के बाद गरुड़ पुराण का पाठ कराने से मृत आत्मा को सद्गति प्राप्त होती है और दोषों का असर भी कम होता है।

    नक्षत्र शांति का पाठ- कुछ इलाकों में तेरहवीं या अंतिम संस्कार के वक्त नक्षत्र शांति पूजन कराया जाता है।

    पंचक में मृत्यु क्यों हैं अशुभ?

    धार्मिक और प्रचलित मान्यताओं के मुताबिक पंचक में मृत्यु को इसलिए अशुभ माना जाता है, क्योंकि ऐसी आशंका बनी रहती है कि, उस परिवार या कुल से 5 अन्य मृत्यु या कष्टकारी घटनाएं घट सकती हैं।

    शास्त्रों में बताया गया है कि, अगर विधि-विधान से शांति पूजन न की जाए, तो मृत आत्मा को मोक्ष प्राप्ति में बाधा का सामना करना पड़ सकता है और परिवार पर संकट गहरा सकता है।

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    अस्वीकरण: इस लेख में बताए गए उपाय/लाभ/सलाह और कथन केवल सामान्य सूचना के लिए हैं। दैनिक जागरण यहां इस लेख फीचर में लिखी गई बातों का समर्थन नहीं करता है। इस लेख में निहित जानकारी विभिन्न माध्यमों/ज्योतिषियों/पंचांग/प्रवचनों/मान्यताओं/धर्मग्रंथों/दंतकथाओं से संग्रहित की गई हैं। पाठकों से अनुरोध है कि लेख को अंतिम सत्य अथवा दावा न मानें एवं अपने विवेक का उपयोग करें। दैनिक जागरण अंधविश्वास के खिलाफ है।

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