राक्षसों के वध से लेकर मां लक्ष्मी की तपस्या तक: ब्रज के 12 वनों से जुड़े दिलचस्प पौराणिक रहस्य
ब्रज क्षेत्र के 12 पावन वन, जो भगवान श्रीकृष्ण और राधा रानी की दिव्य लीलाओं से जुड़े हैं। इसमें मधुवन, तालवन, वृंदावन जैसे प्रत्येक वन के महत्व और उनस ...और पढ़ें

ब्रज क्षेत्र में बसे 12 प्रमुख वनों के नाम जो भगवान कृष्ण और राधारानी की लीलाओं से जुड़े हैं।

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धर्म डेस्क, नई दिल्ली। ब्रज क्षेत्र जहां भगवान श्रीकृष्ण की लीलाओं का साक्ष्य आज भी सदियों बाद जीवंत है। भारत के उत्तर में बसा एक ऐसा पवित्र क्षेत्र जो अध्यात्म, कला, प्रेम और संस्कृति के लिए जाना जाता है। भगवान श्रीकृष्ण की दिव्य लीलाओं से ओतप्रोत जहां भगवान श्रीकृष्ण ने अपना सुनहरा बचपन बिताया, ग्वालों संग गायें चराईं, राधा रानी संग रासलीला रचाई और अत्यंत विशाल गोवर्धन पर्वत को अपनी उंगली पर उठाया।
मथुरा-वृंदावन के केंद्र में बसा ब्रज क्षेत्र जिसका विस्तार हरियाणा, राजस्थान, मध्यप्रदेश और उत्तर प्रदेश राज्यों तक है। आज हम जानेंगे ब्रज क्षेत्र के उन 12 दिव्य और पावन वनों के बारे में, जिनका संबंध भगवान कृष्ण और राधा रानी की दिव्य लीलाओं से है।
मधुवन
ब्रज क्षेत्र का अत्यंत प्राचीन वन जहां सतुयग में मधु नाम के दैत्य का शासन था, जिसका वध करने के बाद भगवान विष्णु मधुसूदन कहलाए। इसके बाद त्रेतायुग में मधु के पुत्र लवणासुर का वध भगवान राम के छोटे भाई शत्रुघ्न ने इसी वन में किया और मथुरा नगरी की स्थापना की। इस वन की सबसे खास बात ध्रुव टीला, जिसपर सिर्फ 5 साल के बालक ध्रुव ने 6 महीने तक कठोर तपस्या करके भगवान विष्णु के दर्शन प्राप्त किए थे।
तालवन
द्वापरयुग में यह वन ताड़ के मीठे फलों के पेड़ों से भरा हुआ था। इस वन पर धेनुकासुर नाम के गधे के रूप वाले राक्षस का नियंत्रण था, जो किसी को भी वहां आने नहीं देता था। जब भगवान कृष्ण के ग्वाल-बालों ने ताड़ के मीठे फल खाने की इच्छा जाहिर की, तो बलराम जी ने धेनुकासुर को पैरों से पकड़कर ताड़ के पेड़ पर दे मारा, जिसके कारण उसकी मौत हो गई।
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कुमुदवन
माना जाता है कि, ब्रज का कुमुदवन प्राचीन काल में कमल के अलग-अलग प्रजाति के सुंदर फूलों से घिरा हुआ था। वर्तमान समय में इसे कदमखंडी के नाम से भी जाना जाता है। श्रीकृष्ण अपने मित्रों के साथ इस वन में आते थे और इन वन के फूलों से माता यशोदा और राधा रानी के लिए सुंदर-सुंदर आभूषण बनाते थे। इस वन में कुमुद बिहारी जी का प्राचीन मंदिर भी बना है।
बहुलावन
ब्रज का बहुलावन बहुला गाय की सत्यनिष्ठा के लिए जाना जाता है। पद्म पुराण के मुताबिक, एक बार बहुला गाय को भूखे बाघ ने पकड़ लिया। गाय ने बाघ को अपने भूखे बछड़े को दूध पिलाकर वापस आने का वादा किया। बाघ ने गाय की बात पर विश्वास किया। माना जाता है कि, बाघ के रूप में स्वयं भगवान श्रीकृष्ण बहुला गाय की परीक्षा ले रहे थे। गाय की सत्यनिष्ठा को देखकर भगवान श्रीकृष्ण ने उसे आशीर्वाद दिया। इस वन में बहुला नाम का एक कुंड भी है।
कामवन
शास्त्रों में इस वन को इच्छाओं को पूरा करने वाला वन कहा गया है। यह द्वादश वनों में सबसे बड़ा और सुंदर वन माना जाता है। महाभारत काल में पांडवों ने अपने वनवास का कुछ समय यहीं पर बिताया था। इसी वन में भगवान कृष्ण से जुड़ी कई अनोखी लीलाएं देखने को मिलती है। 84 पवित्र कुंड (जैसे विमल कुंड और कामेश्वर महादेव मंदिर) यहीं स्थित हैं।
खदिरवन
माना जाता है कि, प्राचीन काल में इस वन में खदिर यानी कत्था के पेड़ों की संख्या काफी थी। यहां भगवान श्रीकृष्ण और उनके भाई बलराम गायें चराने आते थे। इसी वन में भगवान श्रीकृष्ण ने बकासुर राक्षस (बगुले) का वध किया था।

वृंदावन
हिंदू धर्म में वृंदा का मतलब है तुलसी, यह वन तुलसी देवी की तपस्थली और उनकी देख रेख में विकसित हुआ दिव्य वन है। वृंदावन को द्वादश वनों का दिल भी कहा जाता है। भगवान श्रीकृष्ण ने अपनी प्रमुख दिव्य लीलाएं जैसे कि, माखन चुराना, महारास और कालिया नाग मर्दन इसी पवित्र भूमि पर की थीं।
भद्रवन
भद्र का अर्थ है कल्याणकारी या सुंदर। यह वन खासतौर पर बलरामजी की पसंदीदा क्रीड़ास्थल है। इस वन में भगवान श्रीकृष्ण अपने भाई बलराम और अन्य मित्रों के संग गिल्ली डंडा और अन्य देसी खेल खेलते थे।
भांडीरवन
भांडीरवन का इतिहास दिव्य विवाह से जुड़ा माना जाता है। गर्ग संहिता के मुताबिक इसी वन में स्थित एक विशाल वट वृक्ष के नीचे ब्रह्मा जी ने खुद पुरोहित बनकर श्रीकृष्ण और राधा रानी का अलौकिक विवाह संपन्न कराया था। इसी वन में भगवान कृष्ण और बलराम ने प्रलम्बासुर नामक दैत्य का वध किया था, जो ग्वाल बाला का रूप धारण करके उनके खेल में शामिल हो गए थे।
बेलवन
ब्रज क्षेत्र के इस वन को बिल्ववन के नाम से भी जाना जाता है, क्योंकि यहां बेल के पेड़ों का विशाल जंगल था। इस वन का इतिहास मां लक्ष्मी की तपस्या से भी जुड़ा माना जाता है। मां लक्ष्मी वैकुंठ छोड़कर यहां इस इच्छा से आई कि, वे कृष्ण की रासलीला देख सकें। भगवान कृष्ण ने उन्हें समझाया कि, गोपियों जैसा अनन्य भाव लाए बिना रासलीला में प्रवेश करना असंभव है, जिसके बाद मां लक्ष्मी ने कठोर तपस्या की थी।

लोहवन
द्वापरयुग में कंसन ने इस वन को लोहे के सामान मजबूत सुरक्षा घेरे में बदल दिया था और यहां लोहासुर नाम के दैत्य को तैनात कर दिया था, ताकि भगवान कृष्ण प्रवेश न कर सके। बताया जाता है कि, भगवान कृष्ण ने खेल-खेल में ही लोहासुर नामक दैत्य का वध कर दिया और इस क्षेत्र को उसके भय से मुक्त कराया।
महावन
प्राचीन ग्रंथों में महावन को पुराना गोकुल भी कहा जाता है। कंस के कारागार से निकलने के बाद वासुदेव जी ने बालकृष्ण को आदी रात को यहीं नंद बाबा के घर छोड़ा था। यहीं पर भगवान कृष्ण ने सात सालों तक अपना बचपन बिताया। इसके अलावा इसी स्थान पर मिट्टी खाने पर जब मां यशोदा ने कृष्ण लला को मुंह खोलने को कहा, तो ब्रह्मांड के दर्शन किए थे।
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