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    रक्षाबंधन 2026 पर चंद्र ग्रहण का साया, भारत में सूतक काल मान्य होगा या नहीं? पढ़ें पूरी डिटेल

    Updated: Thu, 11 Jun 2026 08:27 PM (GMT+05:30)

    साल 2026 में 28 अगस्त को रक्षाबंधन के दिन आंशिक चंद्र ग्रहण लगेगा, जो लगभग 5 घंटे 39 मिनट तक रहेगा। ...और पढ़ें

    रक्षाबंधन पर चंद्र ग्रहण का साया (AI-Generated Image)

    रक्षाबंधन पर चंद्र ग्रहण का साया (AI-Generated Image)

    HighLights

    1. 28 अगस्त 2026 को रक्षाबंधन पर चंद्र ग्रहण।

    2. भारत में ग्रहण अदृश्य, सूतक काल मान्य नहीं।

    3. राखी का त्योहार बिना बाधा मनाया जा सकेगा।

    धर्म डेस्क, नई दिल्ली। साल 2026 में रक्षाबंधन के दिन चंद्रग्रहण का साया पड़ रहा है, जो 28 अगस्त को श्रावण पूर्णिमा के दिन होगा। इस खगोलीय घटना से राखी के उत्सव पर इसके प्रभावों को लेकर सवाल पूछे जाते हैं।

    आमतौर पर चंद्र ग्रहण पूर्णिमा के दौरान लगता है और यह खास घटना आंशिक चंद्र ग्रहण होगी। रक्षा बंधन पर इसके प्रभावों को समझना काफी जरूरी है।

    चंद्र ग्रहण की टाइमिंग

    चंद्र ग्रहण सुबह 6 बजकर 52 मिनट पर शुरू होकर भारतीय मानक समयानुसार दोपहर 12 बजकर 32 मिनट तक चलेगा। करीब 5 घंटे 39 मिनट तक चंद्र ग्रहण का प्रभाव रहेगा।

    यह गहरा आंशिक चंद्र ग्रहण चंद्रमा के एक बड़े भाग को ढक लेगा, जिससे चंद्रमा का हल्का लाल रंग या तांबे जैसा हो जाएगा, जिसे अक्सर ब्लड मून भी कहा जाता है।

    किस राशि और नक्षत्र में लगेगा ग्रहण

    ज्योतिषीय नजरिए से देखा जाए, तो यह ग्रहण कुंभ राशि और शतभिषा नक्षत्र में होगा, जिससे यह इस राशि के जातकों के लिए खास रूप से महत्वपूर्ण है। हालांकि ग्रहण का असल प्रभाव हर व्यक्ति की कुंडली के मुताबिक भिन्न होता है, जिसका मतलब है कि, इसका प्रभाव सार्वभौमिक नहीं है।

    रक्षा बंधन पर चंद्र ग्रहण का प्रभाव

    विशेषज्ञों के मुताबिक, साल का दूसरा चंद्र ग्रहण भारत में नहीं दिखाई देगा। धार्मिक मान्यताओं के मुताबिक, ग्रहण का असर सिर्फ उन्हीं हिस्सों में पड़ता है, जहां इसे देखा जा सकता है। इसलिए ग्रहण के दौरान अशुभ माने जाने वाला सूतक काल भी भारत में लागू नहीं होगा।

    इसका मतलब है कि रक्षा बंधन बिना किसी बाधा के मनाया जा सकता है। बहनें अपने भाइयों को शुभ अवसर पर राखी बांध सकती हैं। हालांकि भाद्र काल में राखी बांधने से सावधान रहने की जरूरत है, क्योंकि यह काल राखी के लिए काफी अशुभ माना जाता है।

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    साल का दूसरा चंद्र कहां दिखाई देगा?

    साल का दूसरा चंद्र ग्रहण मुख्य रूप से अमेरिका, यूरोप, अफ्रीका और प्रशांत एवं अटलांटिक महासागरों के आसपास के हिस्सों में दिखाई दे सकता है। इन स्थानों पर दर्शक चंद्रमा को एक अलग रंग में देखेंगे, जिससे इस खगोलीय घटना का आकर्षण और भी बढ़ जाएगा।

    कुल मिलाकर इस साल रक्षा बंधन पर चंद्र ग्रहण का साया रहने वाला है, लेकिन भारत में यह नहीं दिखाई देगा इसलिए इसके नकारात्मक प्रभाव मान्य नहीं होंगे। इस तरह भाई-बहन का त्योहार खुलकर मनाया जा सकेगा।

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