रक्षाबंधन 2026: भाई को राखी बांधते समय लगाएं केसर का तिलक, क्यों माना जाता है इसे इतना शुभ?
रक्षाबंधन पर भाई की आरती उतारते समय केसर का तिलक लगाना बेहद शुभ होता है। जानिए केसर के तिलक का ...और पढ़ें

केसर का तिलक क्यों है शुभ? (AI-Generated Image)

समय कम है?
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धर्म डेस्क, नई दिल्ली। रक्षाबंधन का त्योहार भाई-बहन के अटूट प्रेम, विश्वास और सम्मान का सबसे बड़ा प्रतीक है। इस खास दिन बहनें अपने भाई की कलाई पर रक्षासूत्र यानी राखी बांधकर उसकी लंबी उम्र और सुख-समृद्धि की कामना करती हैं। राखी बांधने की इस पूरी प्रक्रिया में भाई की आरती उतारना और माथे पर तिलक लगाना एक बहुत ही जरूरी रस्म है।
आमतौर पर बहनें रोली या कुमकुम का तिलक लगाती हैं, लेकिन क्या आप जानती हैं कि रक्षाबंधन पर भाई को केसर का तिलक लगाना सबसे ज्यादा शुभ क्यों माना जाता है? आइए इस आर्टिकल में आज इसी के बारे में समझते हैं।
केसर का तिलक ही क्यों?
हिंदू धर्म में केसर को बहुत ही पवित्र और देवी-देवताओं को प्रिय माना गया है। पूजा-पाठ से लेकर भगवान के अभिषेक तक में केसर का इस्तेमाल होता है। ज्योतिष शास्त्र की मानें तो केसर का सीधा संबंध देवगुरु बृहस्पति से होता है। गुरु ग्रह को ज्ञान, सफलता, धन और समाज में मान-सम्मान का कारक माना जाता है। ऐसे में जब एक बहन अपने भाई के माथे पर केसर का तिलक लगाती है, तो इसका सीधा सा अर्थ है कि वह अपने भाई के जीवन में इन सभी चीजों के आने की प्रार्थना कर रही है। इससे गुरु ग्रह मजबूत होता है।
सकारात्मक ऊर्जा और शांति
हमारे माथे के ठीक बीचों-बीच, जहां तिलक लगाया जाता है, वहां 'आज्ञा चक्र' होता है। विज्ञान और आयुर्वेद भी यह मानता है कि केसर की खुशबू और इसका लेप माथे पर एक अजीब सी शांति देता है। जब केसर का तिलक इस चक्र पर लगता है, तो यह भाई के अंदर सकारात्मक ऊर्जा (Positive Energy) को तेजी से बढ़ाता है। इससे मन एकाग्र रहता है, फैसले लेने की क्षमता बेहतर होती है और तनाव कम होता है।
तरक्की और भाग्य में वृद्धि
ऐसा माना जाता है कि केसर का तिलक लगाने से सोए हुए भाग्य के दरवाजे भी खुल जाते हैं। अगर भाई किसी नए काम की शुरुआत कर रहा है, पढ़ाई में है, या करियर में तरक्की चाहता है, तो केसर का तिलक उसके लिए बहुत लकी साबित हो सकता है। यह तिलक बुरी नजर और नकारात्मक शक्तियों से भी रक्षा करता है।
कैसे बनाएं और लगाएं केसर का तिलक?
इसे तैयार करना बहुत आसान है। एक छोटी सी साफ कटोरी में थोड़ा सा गंगाजल या शुद्ध पानी लें। उसमें केसर की कुछ पत्तियां (धागे) डालकर हल्के हाथ से मिलाएं या घिसें। आप चाहें तो इसमें थोड़ा सा शुद्ध पीला चंदन भी मिला सकती हैं। जब इसका खूबसूरत पीला-लाल रंग निखर कर आ जाए, तो दाहिने हाथ की अनामिका उंगली (Ring finger) से भाई के माथे पर तिलक करें। इसके बाद तिलक के ऊपर थोड़े से साबुत चावल (अक्षत) जरूर लगाएं।
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