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राखी बांधने के बाद आरती उतारना क्यों है जरूरी? शास्त्रों में दर्ज है भाई के कल्याण की यह परंपरा

Updated: Wed, 19 Aug 2026 06:01 PM (IST)

रक्षाबंधन पर बहनें अपने भाई की कलाई पर राखी बांधने के बाद उनकी आरती क्यों उतारती हैं? इस परंपरा के पीछे का धार्मिक कारण क्या है?

रक्षाबंधन पर आरती उतारने का विधान क्यों है? (AI-Generated Image)

रक्षाबंधन पर आरती उतारने का विधान क्यों है? (AI-Generated Image)

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धर्म डेस्क, नई दिल्ली। रक्षाबंधन से जुड़ी तमाम पारंपरिक रस्में हैं जिसे हिंदू परिवारों में बड़े ही शौक से निभाया जाता है। इसी में से एक है राखी बांधने के बाद भाई की आरती उतारने का रिवाज। हम सभी से रस्म निभाते हैं लेकिन यह क्यों किया जाता है इसके बारे में शायद ही कोई जानता हो।

हर साल सावन महीने की पूर्णिमा तिथि को राखी का पवित्र त्योहार पूरे उत्साह के साथ मनाया जाता है। इस दिन बहनें भाई के लिए उपवास रखती हैं, पूजा की थाली सजाती हैं, उनके माथे पर रोली और अक्षत का तिलक लगाती हैं और कलाई पर राखी बांधती हैं। इसके तुरंत बाद वे अपने भाईयों की आरती उतारती हैं। चलिए जानते हैं इस रस्म के पीछे का रहस्य क्या है?

क्या आरती उतारना केवल एक रस्म है?

सनातन धर्म की मान्यताओं के अनुसार, आरती को ईश्वर के प्रति अपनी असीम भक्ति और सम्मान प्रकट करने का माध्यम माना गया है। जब बहन राखी बांधने के बाद भाई की आरती उतारती है, तो वह दीपक की ज्योति के माध्यम से अपने भाई के अच्छे स्वास्थ्य, सुखी जीवन और दीर्घायु होने की प्रार्थना भगवान से करती है। यह केवल एक औपचारिकता नहीं, बल्कि अपने भाई के लिए बहन का दिल से दिया गया आशीर्वाद और कामना होती है।

दीपक जलाने का धार्मिक महत्व

हिंदू धर्म में जलते हुए दीपक को शुभता, सकारात्मक ऊर्जा और ज्ञान के प्रकाश का प्रतीक माना गया है। मान्यताओं के अनुसार, प्रकाश अंधकार को दूर भगाता है। आरती के दौरान जब बहन दीपक को भाई के सामने घुमाती है, तो इसका प्रतीकात्मक अर्थ ये होता है कि वह अपने भाई के जीवन से हर तरह की नेगिटिविटी, परेशानी और सभी दुखों को दूर करने की कामना कर रही है। थाली में जलता दीया भाई के जीवन में खुशहाली और सफलता के मार्ग का प्रतीक है।

तिलक, राखी और मिठाई का सही क्रम

रक्षाबंधन के समय एक धार्मिक क्रम होता है। पूजा में राखी, तिलक, मिठाई और आरती इन सभी का एक निश्चित क्रम है। सबसे पहले बहन भाई के माथे पर तिलक लगाकर उसकी समृद्धि की कामना करती है। इसके बाद, दाहिनी कलाई पर रक्षासूत्र बांधा जाता है, जो दोनों के रिश्ते को सुरक्षा का कवच प्रदान करता है। इसके ठीक बाद भाई की आरती उतारकर मुंह मीठा किया जाता है। फिर भाई अपनी बहन की पूरे जीवन रक्षा करने का संकल्प लेता है और अपने सामर्थ्य के अनुसार उसे कुछ न कुछ गिफ्ट देता है। इस पूजा में गिफ्ट या तोहफा बहन के प्रति प्यार जताने का एक तरीका माना जाता है।

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अस्वीकरण: इस लेख में बताए गए उपाय/लाभ/सलाह और कथन केवल सामान्य सूचना के लिए हैं। दैनिक जागरण यहां इस लेख फीचर में लिखी गई बातों का समर्थन नहीं करता है। इस लेख में निहित जानकारी विभिन्न माध्यमों/ज्योतिषियों/पंचांग/प्रवचनों/मान्यताओं/धर्मग्रंथों/दंतकथाओं से संग्रहित की गई हैं। पाठकों से अनुरोध है कि लेख को अंतिम सत्य अथवा दावा न मानें एवं अपने विवेक का उपयोग करें।