Ram Navami 2026: नोट कर लें राम जन्मोत्सव का सबसे सटीक समय, ये 3 काम बदल देंगे आपके जीवन की दिशा
हर साल चैत्र माह में आने वाली शुक्ल पक्ष की नवमी तिथि पर राम नवमी को प्रभु श्रीराम के जन्मोत्सव के रूप में मनाया जाता है। ...और पढ़ें
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राम नवमी के दिन जरूर करें ये काम (AI Generated Image)
HighLights
सामान्य जन 26 मार्च को मनाएंगे राम नवमी
प्रभु राम की कृपा हेतु की जाती है विशेष पूजा
राम नवमी पर हवन करने से मिलता है लाभ
धर्म डेस्क, नई दिल्ली। वैदिक पंचांग के अनुसार, सामान्य जन 26 मार्च को, जबकि वैष्णव समाज 27 मार्च को राम नवमी का पर्व मनाएंगे। प्रभु श्रीराम की कृपा पाने के लिए इस दिन विशेष पूजा विधि, मंत्रों का जप और हवन करने का विधान है।
इस विधि से करें पूजा
- सुबह जल्दी उठकर नित्यकर्मों से निवृत होकर स्नान आदि करें और साफ-सुथरे विशेषकर पीले रंग के कपड़े पहनें।
- एक चौकी पर लाल या पीले रंग का कपड़ा बिछाएं और भगवान राम, सीता, लक्ष्मण और हनुमान जी की मूर्ति या फोटो स्थापित करें।
- हाथ में जल और अक्षत लेकर व्रत या पूजा का संकल्प लें।
- रामलला की प्रतिमा को पंचामृत से स्नान कराएं और नए वस्त्र, आभूषण, चंदन का तिलक लगाएं।
- पूजा में पीले रंग के फूल अर्पित करें।
- राम जी को मिठाई, केसर भात, पंचामृत, धनिया पंजीरी का भोग लगाएं और उनके भोग में तुलसी दल जरूर डालें।
- पूजा के दौरान रामरक्षा स्तोत्र या रामचरितमानस का पाठ करें।
- दोपहर 12 बजे शंखनाद के साथ भगवान का जन्मोत्सव मनाएं।
- धूप, दीप और कपूर जलाकर राम जी की आरती करें और सभी लोगों में प्रसाद बांटे।
- अगर आपने व्रत रखा है, तो पूजा के बाद प्रसाद ग्रहण करके अपना व्रत खोलें।
राम नवमी मध्याह्न मुहूर्त - सुबह 11 बजकर 13 मिनट से दोपहर 1 बजकर 41 मिनट तक
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(Picture Credit: Freepik)
करें इन मंत्रों का जप
1. ॐ श्री रामाय नमः॥
2. ॐ श्री रामचन्द्राय नमः।
3. ॐ रां रामाय नमः।
4. श्रीराम तारक मंत्र - श्री राम, जय राम, जय जय राम।
5. श्रीराम गायत्री मंत्र -
ॐ दाशरथये विद्महे सीतावल्लभाय धीमहि।
तन्नो रामः प्रचोदयात्॥
6. श्री राम रक्षा मंत्र - ॐ ह्रां ह्रीं रां रामाय नमः॥

(AI Generated Image)
हवन की विधि (Ram Navami Havan Vidhi)
- राम नवमी के दिन सुबह स्नान के बाद स्वच्छ कपड़े पहनें और पूजा स्थल पर गंगाजल का छिड़काव करें।
- अब शुभ मुहूर्त में हवन कुंड (वेदी) स्थापित करें और आम की लकड़ी, कपूर व गोबर के उपले से हवन कुंड में अग्नि प्रज्ज्वलित करें।
- हाथ में जल, फूल, और चावल लेकर हवन का संकल्प लें और सबसे पहले गणेश जी का स्मरण करें।
- इसके बाद माता दुर्गा और भगवान राम का ध्यान करते हुए जौ, तिल, घी, और हवन सामग्री से 108 आहुतियां दें।
- एक सूखा नारियल (गोला) लेकर उसमें बची हुई हवन सामग्री भरें और उसे 'पूर्णाहुति' के रूप में अग्नि में अर्पित कर दें।
- अंत में कपूर से भगवान राम की आरती करें।
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